हरियाणा के मंदिरों में मूक, बधिर बोर्ड में शामिल होंगे:संचालन नियमों में संशोधन; अभी प्रवेश के लिए अयोग्य, SC के निर्देश पर फैसला

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हरियाणा के मंदिरों में मूक, बधिर या कुष्ठ रोगी भी मंदिर संचालन के लिए गठित बोर्ड में शामिल होंगे। इसको लेकर सरकार ने विधानसभा के विंटर सेशन में मंदिर संचालन नियमों में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इन मंदिरों में मनसा देवी (पंचकुला), शीतला देवी (गुरुग्राम), भीमेश्वरी देवी (बेरी), और यमुनानगर में श्री कपाल मोचन, श्री बद्री नारायण, श्री मंत्र देवी और श्री केदारनाथ मंदिर शामिल हैं। इन तीर्थस्थलों का प्रशासन, प्रबंधन और संचालन उनके संबंधित बोर्डों के अधीन है। हरियाणा में भी हरियाणा अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती मेला प्राधिकरण अधिनियम, 2024 के तहत प्राधिकरण का सदस्य बनने के लिए इसी तरह की पाबंदी है, जिसे संशोधन के माध्यम से हटा दिया गया है। हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 में भी संशोधन किया गया है ताकि कुष्ठ रोग को खतरनाक बीमारी की श्रेणी से हटाया गया है। SC के निर्देश पर सरकार ने लिया फैसला संशोधनों के साथ दिए गए उद्देश्यों और कारणों के विवरण के अनुसार, सरकार का कहना है कि बधिर, मूक और कुष्ठ रोगियों को मंदिर बोर्ड का सदस्य बनने की अनुमति देना, ‘फेडरेशन ऑफ लेपर्स ऑर्गनाइजेशन (FOLO) और अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया’ मामले में 7 मई, 2025 को सर्वोच्च न्यायालय (SC) द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन में और सामाजिक संरचना में आए बदलाव को देखते हुए, जहां अब शारीरिक रूप से अक्षम और असाध्य रोग से ग्रसित व्यक्तियों को समाज में अधिक स्वीकार्यता और सम्मान प्राप्त है के मद्देनजर लिया गया है। 3 मेंबरी कमेटी की गई गठित सर्वोच्च न्यायालय ने 7 मई को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और विधि सचिवों को निर्देश दिया था कि वे विधि एवं न्याय विभाग के 3 अधिकारियों की एक समिति का तत्काल गठन करें ताकि उन सभी राज्य कानूनों की पहचान की जा सके, चाहे वे संविधान से पहले के हों या बाद के, जिनमें कुष्ठ रोग से पीड़ित या ठीक हुए व्यक्तियों के संबंध में भेदभावपूर्ण अभिव्यक्ति अभी भी कानून की किताब का हिस्सा हैं। यह मामला कुष्ठ रोग से पीड़ित या ठीक हो चुके व्यक्तियों के विरुद्ध विभिन्न कानूनों में मौजूद भेदभावपूर्ण, अपमानजनक और निंदनीय प्रावधानों से संबंधित है। 17 दिसंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को तीन सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। ये कहा था सुप्रीम कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय ने आगे कहा कि समिति “इसके बाद सभी कानूनों, विनियमों, नियमों, उप-नियमों या निर्देशों में उपयुक्त संशोधन के लिए राज्य सरकार को सिफारिशें करेगी। इसमें यह भी कहा गया, सभी राज्य सरकारों को आवश्यक पहल करने और अपने राज्य कानूनों को संवैधानिक प्रतिबद्धताओं और सिद्धांतों के अनुरूप बनाने का निर्देश दिया जाएगा।