अयोध्या में सरयू नदी में रविवार को सीनियर दरोगा (SSI) अजय कुमार गोंड का शव मिला था। यह पता चलते ही दरोगा के ADM भाई अरुण कुमार और उनकी PCS पत्नी अंजू (ट्रेजरी ऑफिसर, इटावा) ने बस्ती में धरना शुरू कर दिया था। ADM भाई ने आरोप लगाया कि यह प्लांड मर्डर है। पुलिस ने अपना काम ठीक से नहीं किया। पूरे थाने को सस्पेंड कर सीओ पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। दरोगा के भाई-भाभी करीब 2 घंटे तक धरने पर बैठे रहे। इसके बाद ADM (LR) कीर्ति प्रकाश भारती और ASP श्यामकांत, सीओ सदर सतेंद्र भूषण तिवारी धरने पर बैठे दरोगा के भाई-भाभी से मिलने पहुंचे। उन्हें मनाकर वहां से डीआईजी के पास ले गए। अरुण और दरोगा के अन्य घरवालों ने रेंज ऑफिस में बस्ती के डीआईजी संजीव त्यागी से मुलाकात की। डीआईजी ने बताया कि अजय कुमार गोंड के परिजन रेंज ऑफिस में मिलने आए थे। परिवार को घटना में साजिश की आशंका है। सभी परिजन काफी दुखी हैं। शिकायत और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, दरोगा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पूरे चेहरे पर चोट के निशान पाए गए हैं। नाक और दोनों कानों पर भी चोट के निशान हैं। इसके अलावा पेट (स्टमक) में थोड़ा पानी मिला है। विसरा सुरक्षित कर जांच के लिए भेजा गया है। साथ ही, सीने के बीच की हड्डी और मस्तिष्क (ब्रेन) का एक हिस्सा भी जांच के लिए भेजा गया है। सिलसिलेवार पूरा मामला पढ़िए 8 फरवरी को अयोध्या की सरयू नदी में दरोगा अजय कुमार गोंड का शव मिला था। वह ड्यूटी के दौरान 5 फरवरी की शाम थाने से निकले थे। इसके बाद से उनका कुछ पता नहीं चला। लापता होने के अगले दिन 6 फरवरी को दरोगा की बाइक बस्ती के कुआनो नदी के पास मिली थी। दरोगा आखिरी बार एक सीसीटीवी फुटेज में सफाईकर्मी के साथ बाइक पर जाते हुए दिखे थे। दरोगा की पत्नी रंजीता गोंड ने आरोप लगाया था कि पति के गायब होने की सूचना दूसरे दिन थाने पर फोन करने के बाद मिली। 5 फरवरी की रात में उनका फोन भी स्विच ऑफ था। दरोगा अजय गोंड बस्ती जिले के परशुरामपुर थाने में तैनात थे। वह पत्नी और 2 बच्चों के साथ बस्ती में ही रहते थे। देवरिया के रहने वाले थे दरोगा देवरिया के मूड़ाडीह गांव के रहने वाले अजय गोंड 2016 बैच के दरोगा थे। उनकी शादी 2006 में रंजीता के साथ हुई थी। उनके 2 बेटे अमित राज और उत्कर्ष राज हैं। बड़ा बेटा कानपुर में पढ़ाई कर रहा, जबकि पत्नी और छोटा बेटा उनके साथ बस्ती के मिश्रौलिया मोहल्ले में किराए के मकान में रहते हैं। अजय के पिता भी रिटायर्ड दरोगा हैं। अजय 4 भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर थे। बड़े भाई दिलीप कुमार गोंड स्वास्थ्य विभाग में सुपरवाइजर पद पर कार्यरत हैं। छोटे भाई अरुण कुमार गोंड ADM हैं। उनकी बहन शशि प्रभा सरकारी टीचर हैं। पत्नी बोलीं- 5 फरवरी की दोपहर आखिरी बार बात हुई थी
पत्नी रंजीता ने बताया- अजय 5 फरवरी को सुबह चाय-नाश्ता करके थाने के लिए निकले थे। परशुरामपुर थानाध्यक्ष विश्व मोहन राय के अवकाश पर जाने के बाद पति के पास ही थाने का प्रभार था। उन्होंने दोपहर साढ़े 3 बजे मुझसे बात की थी। थाने के सिपाहियों के मुताबिक, शाम करीब 5 बजे दरोगा अजय थाने में तैनात सफाईकर्मी के साथ बाइक से कहीं निकले थे। थाने से बाहर जाते हुए उनका एक वीडियो भी सामने आया है। रंजीता ने बताया कि रात 8 से 9 बजे के बीच उन्होंने कॉल किया, लेकिन फोन बंद मिला था। थाने से 50 किमी दूर कुआनो नदी किनारे मिली बाइक
रंजीता गोंड की शिकायत के मुताबिक, अगली सुबह जब थाने में फोन किया, तो उनकी बात एक सिपाही से हुई। उसने बताया कि अजय साहब कल शाम से लापता हैं। इसके बाद रंजीता ने यह बात अपने घरवालों को बताई। हर जगह पता किया, लेकिन उनका कहीं कोई पता नहीं चला। वहीं, 6 फरवरी को दरोगा अजय की बाइक थाने से 50 किमी दूर कुआनो नदी के अमहट घाट पर मिली। उनके पर्सनल मोबाइल और सीयूजी नंबर की आखिरी लोकेशन भी यहीं की थी। इसके बाद रंजीता ने पति अजय गोंड की गुमशुदगी दर्ज कराई। रंजीता ने यह भी बताया कि अजय को पहले दुबौलिया थाने में तैनाती के दौरान एक नाबालिग बच्चे की मौत के मामले में धमकियां मिली थीं। पत्नी ने इस पहलू से भी मामले की जांच की मांग की है। अब पढ़िए पत्नी रंजीता गोंड ने क्या कहा… मेरे पति एसएसआई अजय कुमार गोंड परशुरामपुर थाने में तैनात थे। 5 फरवरी की शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच लापता हो गए। अमहट घाट पर जो उनकी बाइक मिली, वह पुलिस को गुमराह करने के लिए वहां रखी गई। मुझे आशंका है कि मेरे पति को बंधक बनाया गया था। वह थाना क्षेत्र या उसके आसपास ही थे, क्योंकि वह कहीं और नहीं गए थे। इसी इलाके में उनके साथ किसी भरोसेमंद व्यक्ति ने धोखा किया है। सबसे दुखद बात यह है कि उनके लापता होने की जानकारी मुझे थाने की ओर से नहीं दी गई। अगले दिन सुबह 9 से 10 बजे जब मैंने उन्हें रोज की तरह फोन किया, तब मुझे पता चला कि वह तो पिछली शाम से ही गायब हैं। जब मैंने थाने के कर्मचारियों से पूछा कि उनकी लोकेशन या कॉल डिटेल क्यों नहीं निकाली गई, तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। तीन दिन चला सर्च, कुआनो में नहीं मिला सुराग
6 फरवरी को दरोगा अजय की बाइक मिलने के बाद पुलिस को उनके डूबने की आशंका थी। इसको देखते हुए पुलिस ने SDRF गोरखपुर की टीम के साथ कुआनो नदी में लगातार 3 दिन तक सर्च अभियान चलाया। अमहट घाट से भद्रेश्वरनाथ तक करीब 2 किमी क्षेत्र में मोटर बोट से 8 राउंड सर्च किया गया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद 8 फरवरी की शाम करीब 4 बजे अभियान रोक दिया गया। 3 घंटे बाद आई अयोध्या से खबर
सर्च अभियान बंद होने के करीब 3 घंटे बाद शाम 7 बजे सूचना मिली कि अयोध्या के दर्शननगर चौकी क्षेत्र अंतर्गत तिघुरा माझा गांव में सरयू नदी में एक शव देखा गया है। ग्रामीणों की सूचना पर अयोध्या पुलिस मौके पर पहुंची। शव की पहचान दरोगा अजय गोंड के रूप में हुई। अब पढ़िए दरोगा के छोटे भाई ADM अरुण कुमार ने जो बताया… मैं एसडीएम रह चुका हूं और वर्तमान में एडीएम हूं। इसके बावजूद मुझे कोई सहयोग नहीं मिला। मेरी मांग है कि पूरे थाने को सस्पेंड किया जाए। 4 लोगों के खिलाफ हत्या (धारा- 302) का मुकदमा दर्ज हो और हर्रैया के सीओ के खिलाफ कार्रवाई की जाए। सीओ ने मुझसे जिस तरह से बात की और मेरे भाई को जिस तरह से फंसाने की कोशिश की, उसे मैं बर्दाश्त नहीं करूंगा। यह आत्महत्या नहीं, प्लांड मर्डर है। जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री तक जाऊंगा, यह बात नोट कर लीजिए। मुझे कप्तान से बात नहीं करनी। जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, मैं यहां से नहीं जाऊंगा और शव भी यहीं रहेगा। मेरा भाई मरा है, आपका नहीं। मुझे दर्द है, बहुत दर्द है। यह हमारे चेहरे देखकर भी समझा जा सकता है। दरोगा के पिता बोले- किडनैपिंग के बाद हत्या हुई
दरोगा अजय गोंड के पिता रामचंद्र प्रसाद ने बताया कि यह घटना 5 तारीख को शाम 6 बजे हुई थी। हमें इसकी जानकारी बहू रंजीता ने 6 तारीख को सुबह 10 बजे दी। अब तक यह साफ नहीं है कि पुलिस क्या कार्रवाई कर रही है। हमे आशंका है कि वह परशुरामपुर थाने से अकेले बाइक पर अपने घर पत्नी के पास आ रहे थे। इसके कुछ दूर पहले उनकी किडनैपिंग हो गई और फिर हत्या की गई। पुलिस विभाग, सीओ और एसपी सभी इस मामले में लगातार संपर्क में थे। 8 तारीख की शाम 5-6 बजे उनकी लाश अयोध्या के पास सरयू नदी में मिली। बस्ती एसपी यशवीर सिंह ने बताया कि दरोगा का शव बरामद कर लिया गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर मौत के कारणों की पुष्टि होगी। मामले की गहन जांच की जा रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। ———————– ये खबर भी पढ़ेंः- कानपुर में NICU में बच्ची जिंदा जली:चेहरा-पेट जलकर काला हुआ, चमड़ियां उधड़ी; वॉर्मर मशीन में आग लगी, अस्पताल में हंगामा कानपुर के प्राइवेट हॉस्पिटल के NICU के वॉर्मर मशीन में रविवार शाम आग लग गई। इससे उसमें भर्ती एक मासूम बच्ची जिंदा जल गई। बच्ची तड़पती रही, पूरा शरीर जलकर काला हो गया, उसकी चमड़ियां उधड़ गईं। चेहरा, छाती, पेट, जांघ बुरी तरह झुलस गया। पढ़ें पूरी खबर…
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