यमुनानगर जिले के सलेमपुर गांव में वीरवार सुबह हुए भीषण एलपीजी सिलेंडर धमाके के बाद हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। इस हादसे में घायल 11 लोगों में से 10 का इलाज पीजीआई चंडीगढ़ में चल रहा है, जबकि 8 वर्षीय अंशु का उपचार जगाधरी सिविल अस्पताल में जारी है। राहत की बात यह है कि इस हादसे में कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन शरीर 50 से 60 प्रतिशत झुलसा होने के चलते कई बच्चों की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है, जिसमें 2 महीने का बच्चा भी शामिल है। 17 क्वार्टरों में रह रहे हैं करीब 90 लोग जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वहां एक ही छत के नीचे 17 छोटे-छोटे क्वार्टर बने हुए हैं। प्रत्येक क्वार्टर में 5 से 6 लोग रहते हैं। इस तरह करीब 90 लोग परिवार सहित यहां निवास कर रहे थे। धमाका इतना जोरदार था कि दो क्वार्टरों की दीवारें पूरी तरह ढह गईं और लेंटर भी हिलकर अलग हो गया। अब आसपास के जुड़े अन्य क्वार्टरों पर भी गिरने का खतरा मंडरा रहा है, जिसके चलते कुछ परिवार यह जगह छोड़ने का मन बना रहे हैं। ये क्वार्टर एक कोल्ड ड्रिंक फैक्ट्री के हैं, जो लंबे समय से बंद पड़ी है, लेकिन इसके क्वार्टरों में आज भी प्रवासी परिवार रह रहे हैं। हर क्वार्टर का आकार लगभग 10×10 फीट है और इनमें वेंटिलेशन के लिए एक खिड़की तक नहीं है। इसी छोटे से कमरे में 5–6 लोग, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, रहते हैं और खाना भी पकाते हैं। ऐसे हालात में इस तरह की दुर्घटना में बड़े स्तर पर नुकसान होना स्वाभाविक है। गुड़िया ने बताया – दृश्य बेहद भयावह था हादसे में घायल रीना देवी की बेटी गुड़िया ने बताया कि वह घटना के समय फैक्ट्री में काम करने गई हुई थी। सूचना मिलने पर जब वह वापस लौटी तो दृश्य बेहद भयावह था। उसकी मां और छोटे भाई-बहन बुरी तरह झुलसे हुए थे। गुड़िया ने बताया कि उनका परिवार औरंगाबाद का रहने वाला है और करीब 4 महीने पहले ही यहां आकर बसे थे। गुड़िया के अनुसार हादसे के वक्त घर पर ज्यादातर महिलाएं और बच्चे ही मौजूद थे। सुबह करीब साढ़े 7 बजे सभी अपने-अपने काम पर निकल जाते हैं। यही हादसा आधे घंटे पहले होता तो नुकसान ज्यादा उठाना पड़ सकता था। अंशु ने सुनाई आपबीती 8 वर्षीय अंशु, जो फिलहाल जगाधरी के अस्पताल में भर्ती है, ने बताया कि वह क्वार्टर के बाहर खेल रही थी। तभी अचानक जोरदार धमाका हुआ और गेट उखड़कर उसके सामने आ गिरा। कुछ ही पल में मलबा उसके सिर पर आ गिरा और वह बेहोश हो गई। अस्पताल पहुंचने के बाद में वह होश में आई। पुलिस जांच में अभी तक हादसे की सटीक वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। घायल रामसरण के अनुसार एक सिलेंडर लीक हो रहा था, जिससे कमरे में गैस भर गई और बाहर जल रहे चूल्हे की आग ने उसे पकड़ लिया, जिससे धमाका हुआ। गैस निकालने की जल्दबाजी में हादसा वहीं दूसरी ओर, यह भी आशंका जताई जा रही है कि एक सिलेंडर से दूसरे में गैस ट्रांसफर करते समय लीकेज के कारण यह हादसा हुआ। कुछ लोगों का कहना है कि सिलेंडर दो हजार रूपए में ब्लैक में खरीदा गया था, जिसे गैस निकालकर जल्द वापस करना था। गैस निकालने की जल्दबाजी में यह दुर्घटना हुई। हालांकि प्रशासन ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है। घटना के बाद पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर जांच कर रही हैं। प्रशासन की ओर से घायलों के इलाज पर नजर रखी जा रही है और प्रभावित क्वार्टरों की सुरक्षा का आकलन भी किया जा रहा है। हादसे में ये सब हैं घायल शांति (पुत्री विजेंदर, 4 वर्ष), शुभवती (पुत्री गजेंदर, 11), नेहा (पुत्री बेंदे राज, 9), रीना (पत्नी गजेंदर, 40), सरस्वती (पुत्री वृंदा लाल, 10), दो माह की गर्भवती संगीता (पत्नी रामसरण, 20), सिमरन (पुत्री गजेंदर, 2 माह), विजयंती (पुत्री योगेंदर, 6), रामसरण (पुत्र रामविलास, 43), रामज्ञान (पुत्र हरिचंद, 43) और अंशु (पुत्री भूटन ठाकुर, 8) शामिल हैं।
यमुनानगर में सिलेंडर ब्लास्ट, 10 घायल चंडीगढ़ रेफर:17 क्वार्टरों में रह रहे 90 लोगों में भय, दीवारें टूटने और लेंटर हिलने से बढ़ा खतरा
