मणिकर्णिका घाट ध्वस्तीकरण पर कांग्रेस-सपा का सवाल:खड़गे का पोस्ट, अपनी नेम प्लेट चिपकाने के लिए विरासत से छेड़छाड़ कर रहे PM, प्रियंका-अखिलेश भी हमलावर

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काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर चल रही 25 करोड़ रुपये की पुनर्विकास परियोजना का काम विवादों के बीच जारी है। घाट से निकले मलबे को बड़ी नाव की मदद से गंगा पार भेजा गया है। तोड़फोड़ के दौरान मिले कलाकृतियों को जिला प्रशासन ने सांस्कृतिक विभाग के मदद से संरक्षित करके गुरूधाम में रखवाया है। इस बीच विपक्ष की ओर से सरकार पर हमला तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री से दो सवाल करते हुए एक्स पर पोस्ट किया है। लिखा आप चाहते हैं इतिहास की हर धरोहर को मिटाकर आपकी नेम प्लेट चिपका दी जाए। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लिखा है, सच्चा आस्थावान नहीं सहेगा। दरअसल मणिकर्णिका घाट का पुनर्विकास चार चरणों में किया जा रहा है। यह परियोजना जी-प्लस वन मॉडल पर आधारित है। इसका उद्देश्य अंतिम संस्कार के लिए जगह बढ़ाना, स्वच्छता सुधारना और व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करना बताया जा रहा है। इस पूरे प्रकरण पर डीएम सत्येंद्र कुमार ने सफाई देते हुए कहा कि किसी भी मूर्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। पहले 2 तस्वीर देखें… बारी-बारी से जानिए नेताओं ने क्या कहा- प्रियंका गांधी ने लिखा-अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण प्रियंका गांधी ने भी इस मामले पर आवाज उठाई है। उन्होंने एक्स पर लिखा- बनारस में मणिकर्णिका घाट पर बुल्डोजर चलाकर सदियों पुरानी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को ध्वस्त करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। मणिकर्णिका घाट और इसकी प्राचीनता का धार्मिक महत्व तो है ही, इससे लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी की स्मिृतियां भी जुड़ी हैं। विकास के नाम पर, चंद लोगों के व्यावसायिक हितों के लिए, देश की धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों को मिटाना घोर पाप है। इसके पहले भी बनारस में रिनोवेशन के नाम पर कई सदी पुराने अनेक मंदिर ध्वस्त किए जा चुके हैं। काशी की धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान मिटाने की ये साजिशें तत्काल बंद होनी चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सवा उठाए- क्या इस सब के पीछे फिर से व्यावसायिक मित्रों को फ़ायदा पहुंचाने की मंशा है? जल, जंगल, पहाड़, सब आपने उनके हवाले किए हैं, अब सांस्कृतिक विरासत की बारी आ गई है। देश की जनता के आपसे दो सवाल हैं- 1. जीर्णोद्धार, साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण विरासत को सहेज कर भी हो सकता था? पूरे देश को याद है संसद परिसर से आपकी सरकार ने किस तरह से महात्मा गांधी, बाबासाहेब आंबेडकर समेत भारत की महान हस्तियों की प्रतिमाओं को बिना किसी राय-मशवरे के एक कोने में रखवा दिया। जलियांवाला बाग़ मेमोरियल की दीवारों से इतिहास से हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों को इसी Renovation के नाम पर मिटाया गया। 2. मणिकर्णिका घाट में बुलडोज़र का शिकार बनी सैंकड़ों साल पुरानी मूर्तियों पर कुल्हाड़ी चलाकर उन्हें मलबे में क्यों डाला गया, किसी म्यूजियम में संभाल कर रखा जा सकता था? आपने दावा किया था “मां गंगा ने बुलाया है” आज आपने मां गंगा को भुला दिया है। बनारस के घाट बनारस की पहचान हैं। क्या आप इन घाटों को जनता की पहुंच से दूर करना चाहते हैं? लाखों लोग हर वर्ष काशी मोक्ष प्राप्ति के लिए अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में आते हैं। क्या आपकी मंशा इन श्रद्धालुओं से विश्वासघात करने की है ? सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लिख, सच्चा आस्थावान नहीं सहेगा सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में लिखा- राजमाता, पुण्यश्लोक, धर्मरक्षिका पूजनीय देवी अहिल्याबाई होल्कर जी की मूर्ति के अपमान व उनकी सनातनी काशी-विरासत के प्रति तिरस्कार पूर्ण कार्रवाई को कोई भी सच्चा आस्थावान नहीं सहेगा। भाजपाई ये सब काम सिर्फ़ पैसा कमाने के लिए कर रहे हैं, उनको न काशी से मतलब है न काशीवासियों से, न उनसे जुड़े किसी ऐतिहासिक महान व्यक्तित्व से। अविनाशी काशी ही भाजपा के विनाश का कारण बनेगी। जानिए विवाद की वजह… मणिकर्णिका काशी के 84 प्रमुख घाटों में शामिल है। यह देवी अहिल्याबाई होल्कर के बनाए 5 घाटों में से एक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी जगह पर भगवान विष्णु की मणि गिरी थी, जिससे इसका नाम मणिकर्णिका पड़ा। पारंपरिक स्थापत्य, ऐतिहासिक शिल्पकला और धार्मिक आस्था जुड़ी है। देवी अहिल्याबाई ने यहां तीर्थयात्रियों के लिए कई काम कराया था। अब इस घाट को तोड़ा जा रहा है। यहां नए सिरे से घाट तैयार होगा, इसकी डिजाइन फाइनल है। मणिकर्णिका घाट को साल-1771 में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने बनवाया था। फिर 1791 में उन्होंने ही इसका जीर्णोद्धार कराया था। लोगों ने जब मलबे में अहिल्याबाई की मूर्ति देखी, तो विरोध शुरू कर दिया। लोगों के विरोध के बाद DM सत्येंद्र ने कहा- घाट की मूर्तियों को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। उन्हें सुरक्षित रखा गया है। कुछ लोग AI से घाट के गलत वीडियो बनाकर जारी कर रहे हैं। ऐसे लोगों को ट्रेस किया जा रहा है। दरअसल, PM मोदी ने साल- 2023 में इस काम का शिलान्यास किया था। बाढ़ की वजह से करीब डेढ़ साल से काम बंद था। अब इस प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने की कोशिश की जा रही है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट को नए तरीके से तैयार किया जाएगा। कार्यदायी संस्था ने घाट पर निर्माण का कार्य के लिए हाइड्रा की मदद से जो पक्के घाट हैं, उनके पत्थरों को तोड़ा जा रहा है। उन्हें बड़ी नाव की मदद से गंगा पार भेजा जा रहा। इसी कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि वहां मौजूद 300 साल पुरानी मणि (पत्थर की बनी हुई संरचना) भी हटाई गई है‌। लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। अब जानिए स्थानीय लोगों ने क्या कहा..
स्थानीय बद्री विशाल ने कहा- काशी में विकास कार्य चल रहा है। प्रशासन के भूल हुई है। लेकिन अब उस मूर्ति को सम्मान पूर्वक स्थापित कराना चाहिए। जिलाधिकारी ने कहा है कि मूर्ति संरक्षित हैं तो इस बात को अब बढ़ा नहीं करना चाहिए लेकिन अगर मां अहिल्याबाई का अपमान हुआ तो हम विरोध करेंगे। महारानी की क्षतिग्रस्त मूर्तियों के समक्ष क्षमायाचना की महारानी अहिल्याबाई ट्रस्ट के अध्यक्ष यशवंत होल्कर महारानी की तोड़ी गई मूर्तियों के समक्ष क्षमायाचना और शुद्धि पूजन के लिए गुरुधाम मंदिर पहुंचे। दो खंडित और दो साबुत मूर्तियां यहीं रखी हैं। उन्होंने कहा कि काशी में रानी अहिल्याबाई की मूर्ति का अपमान अक्षम्य है। काशी में उनकी स्मृतियों के साथ ऐसे आचरण की कल्पना भी इंदौर राजपरिवार को नहीं थी। ट्रस्ट और इंदौर राजपरिवार इसकी कटु शब्दों में भर्त्सना करता है। मणिकर्णिका घाट की मढ़ी के चार किनारों पर बनीं रानी मां की चार मूर्तियां तोड़ी गईं। इनमें से दो खंडित नहीं हैं, लेकिन अन्य दो का निचला हिस्सा ही मिला है। उनका शेष हिस्सा सात दिन में हमें उपलब्ध कराया जाए। तीन तीर्थों पर ही बनवाई थीं अपनी मूर्तियां उन्होंने कहा जो मूर्तियां तोड़ी गई हैं उनका पुरातात्विक महत्व भी है। रानी अहिल्याबाई होल्कर ने अपने जीवन काल में देश के तीन तीर्थों में अपनी मूर्तियां बनवाई थीं। गया और महेश्वर में एक-एक मूर्ति बनवाई। वहीं काशी में एक विश्वनाथ मंदिर में और चार मूर्तियों का एक सेट मणिकर्णिका घाट की मढ़ी के चारों तरफ लगवाया। यशवंत होल्कर ने कहा- हमारी योजना रानी मां की मूर्तियों को फिर उसी स्थान पर मंदिर के रूप में प्रतिष्ठित करने की है। मणिकर्णिका घाट का जो नया स्वरूप तैयार किया जा रहा है वह भी खासगी ट्रस्ट की सहमति के बिना नहीं किया जा सकता। देशभर की तमाम संपत्तियों की तरह ही मणिकर्णिका घाट के संरक्षण-संवर्द्धन का दायित्व ट्रस्ट का ही है। यह अधिकार सुप्रीम कोर्ट से मिला है। डोमराजा परिवार के विश्वनाथ चौधरी बोले-भ्रम फैलाया जा रहा काशी के प्रसिद्ध डोमराजा परिवार के सदस्य विश्वनाथ चौधरी ने मणिकर्णिका घाट के क्षेत्र में चल रहे विकास कार्य पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा वे काशी के डोमराजा के तीसरे पुत्र हैं और घाट पर 24 घंटे उनकी मौजूदगी रहती है। ऐसे में जो बातें सोशल मीडिया और कुछ माध्यमों में फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह निराधार और भ्रामक हैं। उन्होंने बताया कि मणिकर्णिका घाट के सुंदरीकरण की मांग स्वयं उनके चाचा ने की थी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक भी रहे हैं। जब यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री के सामने रखा गया तो उन्होंने कहा था कि मणिकर्णिका घाट का भी सुंदरीकरण कराया जाएगा। उसी के तहत वर्ष 2023 से यहां विकास कार्य चल रहा है। विश्वनाथ चौधरी ने कहा कि काशी में देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग आते हैं। कई यात्री खासतौर पर यह देखने आते हैं कि परंपरागत तरीके से लकड़ी से दाह संस्कार कैसे किया जाता है। ऐसे में घाट का व्यवस्थित और सुंदर होना सभी के हित में है। मूर्तियों को तोड़े जाने के आरोपों पर उन्होंने साफ कहा कोई भी मूर्ति तोड़ी नहीं गई है। मूर्तियों को सुरक्षित तरीके से उठाकर रखा गया है। जब यहां का कार्य पूरा हो जाएगा तो सभी मूर्तियां अपने-अपने मूल स्थान पर पुनः स्थापित कर दी जाएंगी। डीएम बोले- मूर्तियों को संरक्षित किया गया है डीएम सत्येंद्र कुमार के अनुसार मणिकर्णिका घाट पर रोजाना बड़ी संख्या में अंतिम संस्कार होते हैं। जगह कम है, सफाई में कठिनाई होती है। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए पुनर्विकास कार्य चल रहा है। दीवारों पर जो कलाकृतियां और मूर्तियां थीं, उन्हें सुरक्षित तरीके से निकालकर संस्कृति विभाग के माध्यम से संरक्षित किया गया है। पुनर्निर्माण पूर्ण होने के बाद उन्हें उसी स्वरूप में पुनर्स्थापित किया जाएगा। ———— यह खबर भी पढ़ें- काशी में मणिकर्णिका घाट तोड़ा:लोग बोले- बिना बताए अहिल्याबाई की मूर्ति हटाई; DM ने कहा- मूर्तियां सुरक्षित हैं काशी के मणिकर्णिका घाट को तोड़ा जा रहा है। यहां नए सिरे से घाट तैयार होगा, इसकी डिजाइन फाइनल है। मणिकर्णिका घाट को साल-1771 में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने बनवाया था। फिर 1791 में उन्होंने ही इसका जीर्णोद्धार कराया था। बुधवार को लोगों ने जब मलबे में अहिल्याबाई की मूर्ति देखी, तो विरोध शुरू कर दिया। पूरी खबर पढ़ें