डोटासरा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में केवल पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों को कोसने का काम किया, जबकि जीएसटी जैसे मुद्दे पर स्वयं की पीठ थपथपाई। उन्होंने कहा कि जीएसटी के गलत क्रियान्वयन से देशवासियों को लूटा गया है, जिस पर प्रधानमंत्री को माफी मांगनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने ना तो मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने और ना ही बांसवाड़ा-रतलाम रेल परियोजना के बंद होने पर कोई स्पष्टीकरण दिया, जबकि यह परियोजना कांग्रेस सरकार के समय शुरू हुई थी और आदिवासी क्षेत्र के विकास के लिए बेहद जरूरी थी।
पेपर लीक पर चुप्पी साधने का आरोप लगाते हुए डोटासरा ने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस सरकार ने देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून बनाया, जिसका अनुसरण बाद में केन्द्र ने भी किया। लेकिन प्रधानमंत्री ने गुजरात, मध्यप्रदेश, हरियाणा और यूपी जैसे भाजपा शासित राज्यों में हुई पेपर लीक की घटनाओं पर एक शब्द तक नहीं बोला।
डोटासरा ने कांग्रेस सरकारों के योगदान को याद करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के समय जब देश में सुई तक नहीं बनती थी, तब पं. नेहरू ने बड़े बांध, कल-कारखाने, शिक्षा केंद्र और अस्पताल स्थापित किए। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने केवल नोटबंदी, गलत जीएसटी और किसानों पर तीन काले कानून लागू करने का ही काम किया है।
आदिवासियों के मुद्दे पर बोलते हुए डोटासरा ने कहा कि वन भूमि और वनोपज का अधिकार यूपीए सरकार ने दिया था, लेकिन भाजपा सरकार ने इन अधिकारों को कम कर उद्योगपतियों के हित साधने का काम किया है।
डोटासरा ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह रवैया उनकी हताशा और राजनीतिक उद्देश्य को दर्शाता है।
