सोनीपत जिले में कमर्शियल गैस सिलेंडर की बाधित सप्लाई ने मिठाई कारोबार की मिठास बिगाड़ दी है। जिले के हजारों छोटे-बड़े मिठाई दुकानदार इस समय भीषण गैस किल्लत से जूझ रहे हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि अब तलाई वाले आइटम जैसे समोसा, जलेबी और लड्डू बनाना चुनौती बन गया है। इसका सीधा असर जनता की जेब पर पड़ रहा है और गोहाना में मिठाइयों के दाम प्रति किलो 10 रुपए तक बढ़ गए हैं। कई हलवाइयों को मजबूरी में डीजल, कोयला, लकड़ी और इलेक्ट्रिक भट्ठियों का सहारा लेना पड़ रहा है। दुकानदारों का कहना है कि अगर जल्द गैस सिलेंडर की सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो कई दुकानों के लाइव काउंटर बंद करने पड़ सकते हैं, जिससे व्यापार पर भी असर पड़ेगा। प्रधान बोले- कारोबार कमर्शियल गैस सिलेंडर पर निर्भर सोनीपत हलवाई संगठन के प्रधान श्रीकृष्ण पेड़े वाले कृष्ण के अनुसार जिले में करीब 65 हलवाई संगठन से पंजीकृत हैं, जबकि इसके अलावा हजारों छोटे और मध्यम स्तर के हलवाई भी काम कर रहे हैं। इन सभी का रोजाना का काम काफी हद तक कमर्शियल गैस सिलेंडर पर निर्भर करता है। गैस की सप्लाई बाधित होने से लगभग सभी दुकानदारों के सामने उत्पादन और बिक्री को लेकर चुनौती खड़ी हो गई है। उन्होंने बताया कि जो बड़े दुकानदार अपने स्टीम प्रोजेक्ट लगाकर काम कर रहे हैं, उन्हें कुछ राहत जरूर है, लेकिन बाकी दुकानदारों के लिए स्थिति गंभीर बनी हुई है। सोनीपत के हलवाई हट्टा बाजार और गोहाना में दैनिक भास्कर एप की टीम ने मिठाई की दुकानों पर हालात का जायजा लिया। कई प्रतिष्ठित मिठाई दुकानों पर कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी के कारण काम प्रभावित होता दिखाई दिया। दुकानदारों ने बताया कि बड़ी दुकानों में एक महीने में 50 से 60 कमर्शियल सिलेंडर तक का इस्तेमाल होता है, जबकि रोजाना कम से कम दो सिलेंडर की जरूरत पड़ती है। सप्लाई बंद होने से सबसे ज्यादा असर लाइव काउंटर पर पड़ रहा है। समोसा, जलेबी और पकोड़े पर असर
दुकानदारों का कहना है कि समोसा, जलेबी, लड्डू, बालूशाही और ब्रेड पकोड़ा जैसे तलाई वाले आइटम कमर्शियल गैस पर ही अच्छी तरह तैयार किए जा सकते हैं। फिलहाल कई दुकानों के पास केवल एक-दो दिन का ही गैस स्टॉक बचा हुआ है। अगर जल्द सप्लाई बहाल नहीं हुई तो इन आइटम के लाइव काउंटर बंद करने पड़ सकते हैं। डीजल और इलेक्ट्रिक भट्ठी का लिया सहारा
टाल वाली मशहूर मिठाई दुकान के संचालक अंकित जैन का कहना है कि यह समस्या केवल सोनीपत ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में देखी जा रही है। दुकानदारों को काम जारी रखने के लिए डीजल की भट्ठी और इलेक्ट्रिक प्लेट बर्नर का सहारा लेना पड़ रहा है। हालांकि इन विकल्पों से काम करना काफी महंगा पड़ रहा है और उत्पादन लागत बढ़ रही है। लॉन्ग टर्म में बढ़ सकती है कीमतें
अंकित जैन ने बताया कि फिलहाल रोजमर्रा में बिकने वाले आइटम के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं, लेकिन अगर स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो कीमतों पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि गैस एजेंसियों से कभी-कभार एक या दो सिलेंडर मिल जाते हैं, लेकिन वह जरूरत के मुकाबले काफी कम हैं।
लकड़ी और कोयले की भट्ठियों पर हुए शिफ्ट
लाला त्रिलोकी पोते मिठाई दुकान के संचालक बिट्टू ने बताया कि कमर्शियल गैस सिलेंडर न मिलने से परेशानी जरूर है, लेकिन उन्होंने डीजल, कोयला और लकड़ी की भट्ठियों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इससे काम में समय ज्यादा लग रहा है, फिर भी मजबूरी में इसी तरह काम चलाया जा रहा है। छोटे दुकानदार इलेक्ट्रिक हीटर से चला रहे काम
हलवाई संगठन के प्रधान कृष्ण ने बताया कि कई छोटे दुकानदारों ने इलेक्ट्रिक हीटर का इस्तेमाल शुरू कर दिया है, जबकि कुछ बड़े दुकानदार बॉयलर या स्टीम प्रोजेक्ट लगाकर काम चला रहे हैं। हालांकि तलाई वाले आइटम स्टीम बॉयलर पर तैयार नहीं किए जा सकते, इसलिए कमर्शियल गैस की जरूरत बनी रहती है। गोहाना में मिठाई के दाम बढ़े गोहाना के प्रसिद्ध मातुराम हलवाई के संचालक नीरज गुप्ता ने बताया कि वहां गैस एजेंसियों की ओर से फिलहाल 5 किलो के छोटे कमर्शियल सिलेंडर ही मिल पा रहे हैं। पहले दुकानों को रोजाना 19 किलो के दो सिलेंडर मिलते थे, लेकिन अब मुश्किल से पांच-पांच किलो के कुछ सिलेंडर ही मिल पा रहे हैं। नीरज गुप्ता के अनुसार काम चलाने के लिए डीजल, लकड़ी, कोयला और इलेक्ट्रिक भट्ठियों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे लागत काफी बढ़ गई है। लकड़ी के गुटके अब 13-14 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिल रहे हैं, जबकि दो साल पहले इनकी कीमत केवल 6-7 रुपए प्रति किलो थी। बढ़ती लागत के कारण गोहाना में मिठाइयों के दाम करीब 10 रुपए प्रति किलो तक बढ़ाने पड़े हैं।
सोनीपत में कमर्शियल गैस का संकट, हलवाइयों की भट्ठियां ठंडी:समोसा-जलेबी के काउंटर बंद होने की कगार पर; गोहाना में ₹10 महंगी हुई मिठाई
