सीएम के ‘नकली भतीजे’ ने किया कॉलोनी का उद्घाटन:सत्ता से करीबी दिखाने मंदसौर के बिल्डरों का कारनामा, एक तस्वीर से खुला असली-नकली का राज

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मध्य प्रदेश के नीमच जिले की मनासा तहसील में हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सत्ता के गलियारों से लेकर आम जनता तक को हैरान कर दिया। यहां मंदसौर के दो महत्वाकांक्षी कॉलोनाइजरों ने अपने नए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए मुख्यमंत्री के परिवार के नाम का ही इस्तेमाल कर डाला। उन्होंने न केवल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भाई और भतीजे के नाम का दुरुपयोग किया, बल्कि एक कदम आगे बढ़कर एक नकली भतीजे को ही मंच पर सम्मानित कर दिया। जब इस मामले का खुलासा हुआ तो पुलिस ने दोनों बिल्डर्स को बुलाकर माफीनामा लिखवाया और जाने दिया। बिल्डर्स ने माफीनामा में लिखा है कि उन्हें भी नहीं पता था कि जिस शख्स को उन्होंने सम्मानित किया वो सीएम का असली भतीजा नहीं है। पुलिस अब उस शख्स की तलाश कर रही है जिसने बिल्डर्स के पास नकली भतीजा भेजा। क्या है ये पूरा मामला? कौन है दोनों बिल्डर्स और कैसे हुआ सीएम के नकली भतीजे का भंडाफोड़? पढ़िए रिपोर्ट खाटू धाम कॉलोनी और बड़े नामों का इस्तेमाल
कोमल बाफना मंदसौर का एक जाना-माना, लेकिन विवादास्पद नाम है। प्रॉपर्टी के कारोबार में उतरने से पहले वह डोडाचूरा का एक बड़ा व्यापारी हुआ करता था। अपनी नई परियोजना, ‘खाटू धाम कॉलोनी’ को नीमच जिले की मनासा तहसील में लॉन्च करते हुए, बाफना और विजयवर्गीय ने इसे सफल बनाने के लिए एक बड़ा दांव खेला। उन्होंने कॉलोनी के प्रचार के लिए जो बैनर और पोस्टर शहर भर में लगवाए, उनमें स्थानीय नेताओं के साथ-साथ प्रदेश के बड़े चेहरों को भी जगह दी। इन बैनरों पर उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, सांसद सुधीर गुप्ता, राज्यसभा सदस्य बंशीलाल गुर्जर के साथ एक प्रमुख नाम था – नारायण यादव, जो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भाई और मध्य प्रदेश कुश्ती संघ के अध्यक्ष हैं।
सीएम के परिवार का संरक्षण हासिल का संदेश
बैनर में नारायण यादव की तस्वीर का इस्तेमाल कर यह संदेश देने की कोशिश की गई कि इस परियोजना को मुख्यमंत्री के परिवार का सीधा संरक्षण प्राप्त है। 6, 7 और 8 फरवरी को कॉलोनी की लॉन्चिंग के लिए तीन दिवसीय भव्य धार्मिक आयोजन रखा गया, जिसमें मंदिर लोकार्पण, 151 कन्या पूजन और विशाल भंडारे की घोषणा की गई। पूरे क्षेत्र में यह प्रचारित किया गया कि इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नारायण यादव होंगे। जब असली मेहमान नहीं आए तीन दिवसीय कार्यक्रम शुरू हुआ। पहले दिन लोग नारायण यादव की प्रतीक्षा करते रहे, लेकिन वे नहीं आए। दूसरे दिन भी उनकी अनुपस्थिति ने आयोजकों को असहज कर दिया। जब लोगों ने पूछताछ शुरू की, तो कॉलोनाइजरों ने एक नई कहानी गढ़ी। उन्होंने घोषणा की कि नारायण यादव जी अपनी व्यस्तताओं के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पा रहे हैं, लेकिन उनकी जगह पर उनके बेटे अभय यादव, कार्यक्रम में आएंगे। यह घोषणा सुनते ही लोगों की उम्मीदें फिर से बंध गईं। मुख्यमंत्री का भतीजा, यानी परिवार का एक सीधा सदस्य, कार्यक्रम में आ रहा था, जो कि एक बड़ी बात थी। नकली ‘अभय’ का मंच पर सम्मान
8 फरवरी को कार्यक्रम का अंतिम दिन था। मंच सजा हुआ था और लोगों की भीड़ जमा थी। कुछ ही देर में एक युवक वहां पहुंचा, जिसका परिचय ‘अभय यादव’ के रूप में कराया गया। कॉलोनाइजर कोमल बाफना और हरीश विजयवर्गीय ने मंच पर उसका भव्य स्वागत किया। उसे फूलों की माला पहनाई गई, शॉल ओढ़ाई गई और सम्मान के प्रतीक के रूप में खाटू श्याम की एक बड़ी तस्वीर भेंट की गई। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच तस्वीरें खींची गईं। आयोजक अपनी योजना में सफल होते दिख रहे थे। उन्होंने जनता को यह विश्वास दिला दिया था कि मुख्यमंत्री का परिवार उनके साथ खड़ा है। तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल और सच्चाई सामने
कहते हैं, झूठ के पांव नहीं होते। बाफना और विजयवर्गीय की यह चालाकी कुछ ही घंटों में तार-तार हो गई। कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। इन्हीं में से एक तस्वीर मनासा के थाना प्रभारी शिव रघुवंशी तक पहुंची। टीआई रघुवंशी व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री के भाई नारायण यादव और उनके असली बेटे अभय यादव को पहचानते थे। जैसे ही उन्होंने वायरल तस्वीर में सम्मानित हो रहे ‘अभय यादव’ का चेहरा देखा, वे चौंक गए। यह कोई और व्यक्ति था। संदेह होते ही टीआई रघुवंशी ने तुरंत असली अभय यादव को फोन लगाया। फोन पर हुई बातचीत ने पूरे धोखे का पर्दाफाश कर दिया। अभय यादव ने बताया कि वे किसी निजी काम से ग्वालियर में हैं और मनासा में उनके आने का कोई कार्यक्रम था ही नहीं। उन्हें इस बात की जानकारी भी नहीं थी कि उनके और उनके पिता के नाम का इस तरह से इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस का एक्शन और कॉलोनाइजरों का माफीनामा
मामले की गंभीरता को समझते हुए टीआई रघुवंशी ने बिना देर किए कॉलोनाइजर कोमल बाफना और हरीश विजयवर्गीय को थाने तलब कर लिया। पुलिस के सवालों के सामने उनकी सारी हेकड़ी निकल गई। जब उनसे नारायण यादव के फोटो इस्तेमाल करने की अनुमति और उनके बेटे की उपस्थिति के बारे में पूछा गया, तो वे संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। उन्हें यह समझते देर नहीं लगी कि उनका झूठ पकड़ा जा चुका है। तत्काल कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए, दोनों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए एक माफीनामा लिखा। फिलहाल पुलिस ने उन्हें इस माफीनामे के आधार पर छोड़ दिया है, लेकिन मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े इस संवेदनशील मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब उस व्यक्ति, कन्हैयालाल चौहान, की तलाश कर रही है, जिसका नाम कॉलोनाइजरों ने अपने बयान में लिया है। उनके अनुसार, उज्जैन के इसी कन्हैयालाल ने उन्हें नारायण यादव और फिर उनके बेटे के आने का आश्वासन दिया था। पुलिस को शक है कि यह एक संगठित प्रयास हो सकता है और कन्हैयालाल के पकड़े जाने के बाद इस मामले में और भी परतें खुल सकती हैं। सीएम के परिवार से नजदीकी के पीछे मकसद बिल्डर कोमल बाफना 2016 से पहले तक सरकार से लाइसेंस लेकर डोडाचूरा का व्यापार करता था। मंदसौर नगर परिषद के अध्यक्ष प्रहलाद बंधवार की हत्या के मामले में पुलिस ने उससे पूछताछ की थी, हालांकि कोई सीधा संबंध नहीं मिला। मंदसौर के ही एक चर्चित सलीम लाला एनकाउंटर से कथित जुड़ाव के चलते उस पर फिरोज लाला नामक व्यक्ति ने गोली भी चलाई थी। हाल ही में, एक मारपीट के मामले में उसके बेटे चयन और साले हरीश पर भी प्रकरण दर्ज हुआ है। बाफना जैसे कारोबारियों के लिए सत्ता से निकटता दिखाना व्यापार में सफलता की गारंटी जैसा होता है। एक नई कॉलोनी को विकसित करने में सरकारी विभागों से कई तरह की अनुमतियां लेनी पड़ती हैं। यदि परियोजना के साथ मुख्यमंत्री के परिवार का नाम जुड़ जाए, तो न केवल अधिकारी बेवजह परेशान करने से बचते हैं, बल्कि ग्राहकों के बीच भी एक सकारात्मक संदेश जाता है। बाफना ने पहले भी एक कार्यक्रम में नारायण यादव के साथ अपनी तस्वीरें खिंचवाकर खुद को उनका “खास” बताने की कोशिश की थी। असली अभय यादव ने कहा- नाम का गलत इस्तेमाल हुआ
इस घटना पर मुख्यमंत्री के भतीजे, असली अभय यादव, ने स्पष्ट रूप से अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने एक मीडिया बयान में कहा, मेरे पिताजी (नारायण यादव) के नाम का उपयोग कॉलोनी की लॉन्चिंग के लिए किया जा रहा था, जबकि उनका वहां जाने का कोई कार्यक्रम ही नहीं था। मुझे पता चला कि मेरी जगह किसी और अभय को वहां सम्मानित किया गया, जबकि मैं तो उस दिन ग्वालियर में था। पुलिस अपना काम कर रही है।