मुख्यमंत्री ने सुबह जेएलएन ऑडिटोरियम एम्स परिसर में आयोजित ओणम पन्नोनम 2025 उत्सव में शामिल होकर मलयाली समाज की संस्कृति, परंपरा और भाईचारे का अद्भुत अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष ओणम उत्सव की शुरुआत मुख्यमंत्री सेवा सदन से हुई और दिल्ली के मलयाली परिवारों के साथ मिलकर इसे हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि जब पारंपरिक परिधानों में सजी झांकियां, सुगंधित पुष्प सज्जा और केरल के पारंपरिक व्यंजनों का भव्य प्रदर्शन हुआ, तो ऐसा अनुभव हुआ मानो स्वयं केरल की पावन भूमि पर उपस्थित हूं।
मुख्यमंत्री ने मलयाली समुदाय की सराहना करते हुए कहा कि केरल अपनी समृद्ध संस्कृति और सेवा भावना के लिए जाना जाता है। विशेषकर नर्सिंग और स्वास्थ्य सेवाओं में इस समुदाय का योगदान न केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में प्रशंसनीय और सम्माननीय है। उन्होंने आश्वस्त किया कि दिल्ली सरकार हर संस्कृति और समुदाय का सम्मान करती है और उनके सहयोग से राजधानी को और अधिक समृद्ध, सामंजस्यपूर्ण और प्रगतिशील बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने आज विकासपुरी स्थित केरल स्कूल में 171वीं नारायण गुरु जयंती समारोह का उद्घाटन किया और गुरुजी को कोटि-कोटि नमन किया। उन्होंने कहा कि नारायण गुरु का जीवन जातिवाद और ऊंच-नीच की बेड़ियों को तोड़कर समाज को इंसानियत, समरसता और समानता के मार्ग पर ले जाने के लिए प्रेरित करता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दिल्ली के विकास और प्रगति में केरल मूल के लोगों का विशेष योगदान है। अपनी मेहनत, संस्कार और सामाजिक सहयोग से केरल समाज ने दिल्ली को नई पहचान और नई ऊर्जा दी है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि नारायण गुरु के बताए मार्ग पर चलते हुए और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में दिल्ली सरकार हर वर्ग और हर संस्कृति की सेवा और विकास के लिए पूरी निष्ठा से समर्पित है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दिल्ली की असली ताकत उसकी विविधता है, और इसी विविधता में हमारी एकता का सामर्थ्य छिपा है। सरकार इस एकता और सद्भाव को और मजबूत करते हुए एक विकसित और समरस दिल्ली के निर्माण के लिए सतत प्रयासरत है।
