मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस परियोजना को विश्व बैंक के सहयोग से लागू कर रही है। कुल 2,687 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना हिमाचल के लिए मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि यह मिशन न केवल वर्ष 2023 और 2025 में आई प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई में मदद करेगा, बल्कि भविष्य में आपदाओं से निपटने के लिए प्रदेश के बुनियादी ढांचे को और मजबूत बनाएगा।
सुक्खू ने कहा कि एचपी-रेडी परियोजना का मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को सशक्त बनाना और आपदाग्रस्त सड़कों, पुलों व भवनों की मरम्मत करना है। इसके साथ ही नालों का तटीकरण कर बाढ़ के खतरे को घटाया जाएगा। यह परियोजना ग्रीन पंचायतों के माध्यम से रोजगार के अवसर सृजित करने, सार्वजनिक सेवाओं को सशक्त बनाने और जोखिम आधारित सामाजिक सुरक्षा व बीमा प्रणाली को मजबूत करने पर भी केंद्रित होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों और बागवानों के हितों को ध्यान में रखते हुए आपदा-रोधी ढांचा विकसित करने पर विशेष ध्यान दे रही है ताकि उनकी आजीविका प्रभावित न हो। उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत प्रदेश के दस स्थानों पर आधुनिक सीए (कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर) स्टोर बनाए जाएंगे, जिससे फसलों की गुणवत्ता सुरक्षित रहेगी और आपदाओं के समय नुकसान से बचा जा सकेगा।
