हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी नेता प्रतिपक्ष और सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा मेहरबान होने जा रही है। सरकार पूर्व सीएम हुड्डा के चंडीगढ़ सेक्टर-7 स्थित सरकारी आवास का साढ़े सोलह लाख रुपए पेनल रेंट माफ करने की तैयारी कर रही है। यह रेट अगस्त 2024 से 2025 के अंत तक चंडीगढ़ के सेक्टर-7 स्थित सरकारी आवास में ओवरस्टे के कारण लगा है, जब हुड्डा के पास नेता प्रतिपक्ष का दर्जा नहीं था। उन्होंने इस पेनल रेंट माफ करने का सरकार से अनुरोध किया है। जिसके बाद सरकार ये पेनल रेंट माफ करने की तैयारी कर रही है। संभावना है कि कल होने वाली कैबिनेट मीटिंग में इसको लेकर सीएम नायब सैनी फैसला ले लें। 2019 में हुड्डा को नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था। इसके बाद ही कैबिनेट मंत्री के बराबर रैंक दिए जाने की वजह से उन्हें सेक्टर 7 की यह कोठी नंबर 70 अलॉट की गई थी। इससे पहले 2014 से 2019 तक हुड्डा चंडीगढ़ के सेक्टर 3 स्थित MLA फ्लैट में रहते थे। एक साल तक नहीं खाली की कोठी नियमों के अनुसार नई सरकार बनने के बाद हुड्डा को 15 दिन के भीतर यह कोठी नंबर 70 खाली करनी थी। मगर उन्होंने कोठी नहीं छोड़ी। हरियाणा में विधानसभा चुनाव का रिजल्ट 8 अक्टूबर 2024 को आया था। जिसमें भाजपा ने 90 में से 48 सीटें जीतकर सरकार बनाई। इसके बाद CM नायब सैनी और उनके मंत्रियों ने 17 अक्टूबर 2024 को शपथ ली थी। सरकार ने हुड्डा को दिसंबर 2024 में कोठी खाली करने कहा था। हुड्डा ने इसके लिए 15 दिन का टाइम मांगा था, लेकिन अब एक साल से ज्यादा समय हो चुका है। हालांकि अब हुड्डा नेता प्रतिपक्ष बन चुके हैं। इसलिए अब इस कोठी को नहीं खाली कराया जाएगा। हुड्डा पर लगाए पेनल रेंट के ये नियम हरियाणा लोक निर्माण विभाग के नियमानुसार सरकार के किसी भी मंत्री या विधायक को नई सरकार बनने के 15 दिन में सरकारी आवास खाली करना होता है। यदि वह तय समय पर नहीं खाली करता है तो उसके खिलाफ पीनल रेंट की कार्रवाई होती है। पहले महीने मकान खाली नहीं होने पर 50 गुना किराया वसूल किया जाता है। वहीं दूसरे महीने में 100 गुना और तीसरे महीने 200 गुना पीनल रेंट वसूला जाता है। इसके बाद भी कोई कोठी खाली नहीं करता है, तो फिर चौथे महीने से 400 गुना पीनल रेंट वसूल किया जाता है।
हुड्डा की घोषणा भी उनके काम नहीं आई भूपेंद्र हुड्डा जब हरियाणा के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने घोषणा की थी कि पूर्व मुख्यमंत्री को भी प्रदेश में कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जाएगा, उन्हें मंत्रियों को मिलने वाली तमाम सुविधाएं भी मिलेंगी। जब साल 2014 में घोषणा की गई तो इसके दायरे में तब दो ही पूर्व मुख्यमंत्री आते थे। इनमें एक चौधरी ओमप्रकाश चौटाला और दूसरे चौधरी हुकम सिंह थे। ओम प्रकाश चौटाला उस वक्त जेल में थे, इसलिए वह यह सुविधाएं नहीं ले पाए। हुकम सिंह को तब सरकार ने कैबिनेट मंत्री वाली सभी सुविधाएं प्रदान की थीं। हुड्डा ने जब यह नियम लागू किया, तब विपक्षी दलों और नेताओं का कहना था कि भूपेंद्र हुड्डा भविष्य में खुद का जुगाड़ कर रहे हैं। हुआ भी ऐसा ही, जब 2014 में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हार गई और भाजपा सत्ता में आ गई, तो हुड्डा पूर्व मुख्यमंत्री हो गए। मनोहर लाल खट्टर की अगुआई में बनी पहली सरकार ने कुछ दिन बाद ही हुड्डा का फैसला पलट दिया। हुड्डा की कोठी को लेकर खूब हुई कंट्रोवर्सी हुड्डा की सरकारी कोठी को लेकर खूब कंट्रोवर्सी हुई। सूबे के मंत्री और सांसदों ने कोठी को लेकर खूब बयान दिए थे। BJP की राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा ने कहा था कि उन्हें यह समझना होगा कि कोठी तो उनको आज नहीं तो कल खाली करनी ही होगी। उनको बीजेपी के नेताओं से यह सीख लेनी चाहिए, हमारे नेताओं ने समय रहते ही घरों को खाली कर दिया है। कैबिनेट मंत्री बेदी ने कहा था कि अब वह नेता प्रतिपक्ष नहीं है, उनको कोठी खाली कर देनी चाहिए। मंत्री गोयल की थी कोठी पर नजर हुड्डा जिस कोठी नंबर 70 पर कब्जा किए बैठे हैं, वह सैनी सरकार के मंत्री विपुल गोयल को पसंद आ गई थी। इसी वजह से सरकार ने भी इसे खाली कराने के लिए तेजी दिखाई। हालांकि हुड्डा के कोठी खाली न करने पर अब मंत्री गोयल ने दूसरी कोठी के लिए आवेदन कर दिया था। उन्होंने सरकार से चंडीगढ़ के सेक्टर 7 की कोठी नंबर 71 मांगी। ये कोठी अभी चंडीगढ़ के कोटे की है, इसलिए सरकार यूटी की इस कोठी को अपनी 68 नंबर कोठी से बदलने की तैयारी कर रही है। इसके बाद गोयल को मनचाही कोठी मिल पाई।
भूपेंद्र हुड्डा पर मेहरबान होंगे CM नायब सैनी:सरकारी कोठी का माफ होगा 16.50 लाख पेनल रेंट; एक साल से नहीं की खाली
