सीटू का दो दिविसिय ज़िला सम्मेलन शुरू, मज़दूरों की समस्याओं पर होगा मंथन

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उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सीटू मज़दूरों में हकों की लड़ाई लड़ता है लेकिन अंतिम लक्ष्य देश में समाजवादी व्यवस्था क़ायम करना है। आज़ादी के बाद हमारे देश में पूंजीवादी व्यवस्था मजबूत हुई है जिसमें कुछ मुठी भर पूंजीपति और कम्पनियां धन दौलत इकठ्ठा कर रही है लेकिन बहुसंख्यक आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन जी रहे हैं। अब स्थिति ये आ गयी है कि रोज़गार जो कभी रेगुलर आधार पर मिलता था वो अब कुछ घण्टो का मिल रहा है। मज़दूरों के हकों के लिए बने श्रम कानूनों को समाप्त कर दिया गया है जिससे मज़दूरों का शोषण आने वाले समय में और तेज़ी से बढ़ेगा। पिछले दस साल में केंद्र की मोदी सरकार ने मनरेगा, मिड डे मील, बालविकास परियोजना, आशा वर्करों के मानदेय में कोई बृद्धि नहीं कि है और प्रचारित ये किया जा रहा है कि मोदी सरकार मज़दूरों की हिमायती है।