मंडला में 5 घरों के बच्चों ने मांओं को खोया:एक साथ उठीं अर्थियां; बेटी की शादी के लिए मजदूरी करने वाली मां भी नहीं रहीं

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“मेरी दो बहनों की शादी हो गई है। अब मेरी शादी होनी थी। 20 जनवरी को मेरी मम्मी और पापा मेरे लिए लड़का देखने जाने वाले थे। मेरी शादी के लिए कुछ पैसे इकट्ठे हो जाएं, इसलिए मेरी मां मजदूरी करने जाती थी। उस दरिंदे ने मेरी मां को कुचलकर मार दिया। हमारे आर्थिक हालात बेहद कमजोर हैं। आगे क्या होगा, हम नहीं जानते।” यह कहना है जबलपुर के हिट एंड रन मामले में मृत हुई गोमता बाई की बेटी सुकरती ऊईके का। मां की मौत के बाद 18 साल की सुकरती सहमी हुई है। सुकरती अकेली नहीं है, जिसने अपनी मां को खोया है। मंडला जिले के बम्होरी गांव में ऐसे 5 और बेटे-बेटियां हैं, जिन्होंने अपनी मां को खो दिया है। घटना के बाद से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पहले देखिए 3 तस्वीरें… 18 जनवरी 2026, दोपहर करीब 12 बजे
बरेला थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे पर एक कार ने सड़क की साफ-सफाई करने वाले मजदूरों को लंच करते वक्त रौंद दिया। हादसे में 2 महिला मजदूर चैनवती और लच्छो बाई की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 11 मजदूर घायल हो गए। शनिवार-रविवार की रात करीब 12 बजे फिर खबर आई कि अस्पताल में 3 और आदिवासी महिला मजदूर कृष्णा, गोमता और घसीटी (वर्षा कुशराम) ने दम तोड़ दिया। 8 मजदूर अभी भी घायल हैं, जिनमें से 2 की हालत गंभीर बनी हुई है। कार चलाने वाला ड्राइवर अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। सोमवार को दैनिक भास्कर की टीम मृतकों और घायलों के गांव बम्होरी पहुंची और परिजनों से बात की। सभी मृतक महिला मजदूरों के आर्थिक हालात बेहद कमजोर थे। ज्यादातर महिलाएं अपने घर की रोजी-रोटी चलाने और 26 जनवरी को लगने वाले मेले में बच्चों को खर्च के लिए पैसे देने के लिए 230 रुपए प्रतिदिन की मजदूरी कर रही थीं। गोमता बाई अपनी तीसरी बेटी की शादी के लिए पैसे इकट्ठा करने के लिए मजदूरी कर रही थी। नेशनल हाईवे पर परिजनों का 5 घंटे का जाम
2 मृत महिला मजदूरों की डेडबॉडी शनिवार शाम को ही गांव पहुंच गई थी। इसके बाद रात में 3 अन्य महिलाओं की अस्पताल में मौत हो गई। सोमवार सुबह सभी डेडबॉडी का पोस्टमॉर्टम कर परिजनों को सौंपा गया। परिजनों ने डेडबॉडी के साथ घटनास्थल पर पहुंचकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। हजारों ग्रामीण उनके समर्थन में मौके पर पहुंचे। NHAI, शासन और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए करीब 5 घंटे तक प्रदर्शन किया गया। इस दौरान नेशनल हाईवे पूरी तरह जाम रहा, जो करीब 10 किलोमीटर तक फैला रहा। एडिशनल एसपी सूर्यकांत शर्मा, अपर कलेक्टर नाथूराम गोंड और एसडीएम अभिषेक सिंह के कई घंटों के प्रयास के बाद परिजन माने। शाम 5:30 बजे धरना और जाम समाप्त हुआ। परिजनों की मांग थी कि मृतकों के परिवार को 25 लाख रुपए, एक सदस्य को नौकरी और घायलों को 10 लाख रुपए मुआवजा दिया जाए। प्रशासन ने अधिकांश मांगें मान लीं, जिसके बाद परिजन सहमत हुए। 6:30 बजे गांव पहुंचे शव, रात 8 बजे हुआ अंतिम संस्कार
जैसे ही डेडबॉडी गांव पहुंचीं, चीख-पुकार गूंज उठी। पूरा गांव मातम में डूब गया। मंडला पुलिस के जवान पूरे गांव में तैनात रहे। कुछ ग्रामीणों ने गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर जंगल में गड्ढे खोदकर अंतिम संस्कार की तैयारी की। परिजनों ने करीब एक घंटे तक शव घर में रखे, इसके बाद अर्थियां उठाई गईं। रात करीब 9 बजे सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में सभी मृत महिलाओं को दफनाया गया। इसके बाद हमने परिजनों से बात की और उनके हालात जाने। एक घर की सास-बहू की एक साथ मौत
कृष्णा कुड़ाफ के बेटे अभिषेक कुड़ाफ लगातार रो रहे हैं। उन्होंने बस इतना कहा,“मैंने अपनी मां और दादी दोनों को एक साथ खो दिया।”इसके आगे वे कुछ बोल नहीं पाए। कृष्णा की ननद प्रीति खुसरे ने कहा,“कमाएंगे नहीं तो खाएंगे क्या? मेरी मां और भाभी खाने के लिए मजदूरी करने निकली थीं। मेरी मां चैनवती और ननद कृष्णा मजबूरी में मजदूरी करने गई थीं। दोनों साथ में खाना बनाती थीं, फिर काम पर जाती थीं। मंगलवार को बाजार था, सब्जी-भाजी और घर का सामान खरीदना था। हम मना कर रहे थे, लेकिन वो नहीं मानी। उनकी मौत के बाद बच्चे कहां जाएंगे, क्या करेंगे?” तीसरी बेटी की शादी के लिए पैसे इकट्ठा कर रही थी मां
घर में मातम पसरा हुआ है। सैकड़ों महिलाएं रो-बिलख रही हैं। मृतक गोमता की बेटी सुकरती ने कहा,“मेरी मां मजदूरी करने गई थी। हम गरीब हैं, घर की हालत ठीक नहीं है, इसलिए वो काम पर जाती थी। मेरी शादी तय हो गई थी, इसलिए वो पैसे इकट्ठे कर रही थी। मेरी दो बहनों की शादी हो चुकी है, मैं तीसरी और आखिरी बेटी हूं। सुकरती ने बताया कि मंगलवार को लड़का देखने जाना था, लेकिन उससे पहले ही मां हमें छोड़कर चली गई। उन्हें मेरी शादी की बहत चिंता थी। अब हमारा क्या होगा? उपवास के दिन रोकने पर मां बोली- आज जाऊंगी तो हफ्ता हो जाएगा
लच्छो बाई के पति का निधन करीब 7 साल पहले हो चुका है। वे बेटी भगवंती और दामाद के साथ रहती थीं। हादसे के बाद उनका चेहरा पहचान में नहीं आ रहा था। बेटी भगवंती दो दिन पहले ली गई मां की तस्वीर फोन में देखकर बिलख रही है। गले से आवाज तक नहीं निकल पा रही। उन्होंने कहा,“हम गरीब हैं। मजदूरी नहीं करेंगे तो क्या करेंगे? मैं भी मजदूरी करती हूं। हम आदिवासी लोग रविवार और बुधवार को गोंड बाबा का उपवास रखते हैं। उस दिन मां का भी उपवास था। हमने बहुत रोका, लेकिन वो बोली- दो दिन और जाऊंगी तो हफ्ता हो जाएगा। मेला आ रहा है, पोतों को खर्च के लिए पैसे दे पाऊंगी। क्या पता था कि मां उपवास के दिन ही भगवान के पास चली जाएगी।” आखिरी कॉल में मां ने कहा- 26 जनवरी को मेले पर जरूर आना
मृतक घसीटी (वर्षा) की बेटी अर्चना का रो-रोकर बुरा हाल है। उसने कहा,“जब मां की मौत हुई, तब किसी ने नहीं बताया। मैं मंडला के हॉस्टल में रहकर आर्ट्स से बैचलर की पढ़ाई कर रही हूं। एक्सीडेंट की खबर मिली तो गांव आई। पता चला मां नहीं रहीं। मां इसलिए मजदूरी करती थी ताकि मैं पढ़ सकूं। दलाल 300 की जगह देता था सिर्फ 230 रुपए मजदूरी
एसडीएम अभिषेक सिंह ने बताया,“NHAI द्वारा मजदूरों को 300 रुपए प्रतिदिन मजदूरी देने की बात कही गई थी, लेकिन परिजनों से पता चला है कि उन्हें केवल 230 रुपए दिए जा रहे थे। गांव का एक व्यक्ति उन्हें हाईवे पर काम के लिए लाता था और 70 रुपए खुद रख लेता था। उसे भी चिन्हित कर लिया गया है। जल्द उस पर कार्रवाई होगी। मृतकों के परिजनों को उनकी मांग के अनुसार मुआवजा और नौकरी देने के प्रयास किए जाएंगे। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार कार्रवाई जारी है।” ये खबर भी पढ़ें… कार ने 13 को रौंदा, अब तक 5 की मौत जबलपुर के हिट एंड रन मामले में मृतकों के परिजन और स्थानीय लोग सोमवार को सड़क पर उतर आए। दोपहर करीब 1 बजे चक्काजाम शुरू हुआ, जो शाम 5.15 बजे प्रशासन के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ। चक्काजाम के चलते करीब 5–6 किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। पूरी खबर पढ़ें…