बाल उमंग पखवाड़ा के आयोजन में बच्चों ने दिखाई प्रतिभा

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कार्यक्रम की शुरूआत जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के निदेशक वैभव कुमार सभी अभिभावक (दादा-दादी, नाना-नानी, माता-पिता), बच्चे एवं किलकारी सहरसा के प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक, प्रणव भारती द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।बाल उमंग पखवाड़ा के अंतर्गत दिनांक 16 नवम्बर को चौपाल का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से जेनरेशन गैप को पाटने का कार्य किया गया।जिसमें बच्चों के दादा-दादी, नाना-नानी, माता-पिता के द्वारा 10 विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई जो इस प्रकार है।जिसमें बच्चों के लिए पारिवारिक माहौल,बैंकिंग एवं फाइनेंस, बालिका शिक्षा का महत्त्व,यातायात, सामाजिक सुरक्षा,चाइल्ड राइट्स,बच्चों की राजनीतिक समझ, औषधीय पौधों की जानकारी,व्यवसाय का महत्त्व खेती / कृषि पर इन चर्चाओ के साथ-साथ दादा-दादी, नाना-नानी द्वारा बच्चों के समक्ष पारंपरिक कहानी वाचन, संस्कार गीत, पारम्परिक संगीत-गीत इत्यादी की प्रस्तुति हुई।

मौके पर हस्तकला तथा चित्राकला विधा के बच्चों ने वेस्ट मटेरियल का अभिनव उपयोग कर विभिन्न प्रकार के सामग्रियों से सम्पूर्ण बाल भवन परिसर को आकर्षक सजावट से सुसज्जित किया, जो पर्यावरण संरक्षण एवं रचनात्मकता का अद्भुत सन्देश प्रस्तुत करता है।

इस अवसर पर किलकारी बिहार बाल भवन, सहरसा के प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक, प्रणव भारती, ने कहा बाल उमंग पखवाड़ा के अंतर्गत आयोजित चौपाल से बच्चों को पारिवारिक महत्व के प्रासंगिकता की समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास है।साथ ही बच्चों से सबंधित विषयगत चर्चा से बच्चों की समझ विकसित करना है। इस अवसर पर हमारा प्रयास है कि बाल भवन के माध्यम से तृतीय पीढ़ियों को सशक्त मंच मिले। जहाँ वे अपनी प्रतिभा को आत्मविश्वास के साथ अभिव्यक्त कर सकें। समाज के सभी वर्गों का सहयोग बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अनिवार्य है, और यह आयोजन उसी दिशा में एक सार्थक पहल है।