अब छात्र निजी स्कूलों की बजाय सरकारी स्कूलों की ओर रुख कर रहे हैं, जो शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। ड्रॉपआउट की संख्या के अंतर को जीरो कर दिया गया है। यह इस साल की सबसे बड़ी उपलब्धि है। वहीं, नए नामांकन में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी क्रम में कल करीब 4 लाख साइकिलों का वितरण किया जाएगा, ताकि छात्रों को स्कूल आने-जाने में सुविधा मिल सके। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कही। वे स्कूल चलें हम अभियान के तहत बुधवार को सांदीपनि विद्यालय टीटीनगर में राज्य स्तरीय प्रवेश उत्सव का शुभारंभ कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने बच्चों से कहा कि पढ़ें-लिखें आगे बढ़ें, भविष्य में जहां तक अपने पंख लेकर उड़ना चाहें, उड़ें। उन्होंने कहा कि हमने स्कूली बच्चों, विशेषकर छात्राओं के लिए स्कूटी योजना भी लागू की है। इसके अलावा, सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए करीब 76,000 शिक्षकों की नियुक्ति भी की है। सरकार का लक्ष्य इस वर्ष लगभग 1 करोड़ 45 लाख बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करना है, जिससे प्रदेश में शिक्षा का स्तर और अधिक सुदृढ़ हो सके। सीएम बोले- ड्रॉपआउट हुआ जीरो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नए नामांकन में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसमें से सिर्फ सरकारी स्कूलों के आंकड़े देखें तो यह वृद्धि 36 प्रतिशत से अधिक है। यह साफ बताता है कि लोगों का सरकारी स्कूलों पर भरोसा बढ़ रहा है। पूरे प्रदेश से यह रुझान आ रहा है कि सांदीपनि स्कूलों में बच्चे प्रवेश लेने के लिए निजी स्कूलों को छोड़ रहे हैं। इन स्कूलों में अलग-अलग प्रकार से बच्चों के लिए हर तरह की सुविधाएं मौजूद हैं। यहां लाइब्रेरी, ग्राउंड से लेकर हाईटेक लैब मौजूद हैं। इस साल भी बच्चों के लिए 250 करोड़ रुपए का बजट सीएम डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान में अनुसूचित जाति वर्ग के स्टूडेंट्स के लिए 95 हजार की क्षमता वाले 1900 से अधिक छात्रावासों का संचालन स्कूल शिक्षा विभाग कर रहा है। कक्षा 1, कक्षा 6 और कक्षा 9 में प्रवेश की व्यवस्था को आसान बनाया गया है। यही नहीं, साल 2024-25 में 89 हजार से अधिक और साल 2025-26 में 94 हजार से अधिक लैपटॉप बांटे जा चुके हैं। बच्चों के लिए हमने इस साल भी बजट में 250 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। बच्चों पर की पुष्प वर्षा इस कार्यक्रम के साथ ही शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत हो गई है। कार्यक्रम में सीएम ने बच्चों पर पुष्प वर्षा की और साइकिलें वितरित कीं। इस मौके पर स्कूल शिक्षा मंत्री उदय राव प्रताप, मंत्री विश्वास सारंग, मंत्री विजय शाह, मंत्री कृष्णा गौर समेत कई नेता मौजूद रहे। करीब 92 हजार सरकारी स्कूलों और 85 लाख विद्यार्थियों वाले इस बड़े तंत्र में नामांकन बढ़ाने, ड्रॉपआउट बच्चों को वापस लाने और शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की जाएगी। राज्य से लेकर गांव स्तर तक कार्यक्रमों की रूपरेखा तय कर दी गई। स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कार्यक्रमों का आयोजन व्यवस्थित और प्रभावी तरीके से किया जाए। पहले दिन बालसभा के जरिए बच्चों को स्कूल से जोड़ा जा रहा है। दूसरे दिन भविष्य से भेंट कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ विद्यार्थियों से संवाद करेंगे। तीसरे दिन सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों के माध्यम से पालकों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी, जबकि चौथे दिन ऐसे बच्चों पर ध्यान दिया जाएगा, जो पढ़ाई में पिछड़ गए। गांव और बस्तियों में बच्चों की होगी पहचान अभियान का सबसे अहम उद्देश्य स्कूलों में नामांकन बढ़ाना है। इसके लिए गांव और बस्तियों में ऐसे बच्चों की पहचान की जाएगी, जो अभी तक स्कूल से बाहर हैं। शिक्षकों और प्रशासनिक अमले को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि हर बच्चे को स्कूल से जोड़ने की कोशिश की जाए। अभिभावकों का स्कूल स्तर पर स्वागत कर उन्हें शिक्षा के महत्व के बारे में बताया जाएगा।
पहले दिन बालसभा, किताबें भी मिलेंगी 1 अप्रैल को सभी स्कूलों में बालसभा का आयोजन किया जा रहा है। इस दिन बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकों का वितरण हो रहा है, ताकि सत्र की शुरुआत से ही पढ़ाई में कोई बाधा न आए। साथ ही बच्चों के लिए विशेष भोजन की व्यवस्था भी की गई है, जिससे स्कूल का माहौल उत्साहपूर्ण बने। अभियान के दूसरे दिन विद्यार्थियों को प्रेरित करने पर जोर रहेगा। इस दिन विभिन्न क्षेत्रों के सफल लोग जैसे खिलाड़ी, कलाकार, अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता स्कूल पहुंचकर बच्चों से संवाद करेंगे। वे अपने अनुभव साझा कर पढ़ाई के महत्व को समझाएंगे और बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे। 3 अप्रैल को स्कूलों में सांस्कृतिक और खेल-कूद कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिनमें पालकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरान उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी और शिक्षा में उनकी भूमिका को मजबूत करने पर जोर रहेगा। जिन बच्चों की उपस्थिति 85% से अधिक रही है, उनके पालकों को सम्मानित भी किया जाएगा। कमजोर छात्रों पर विशेष ध्यान अभियान के आखिरी दिन ऐसे विद्यार्थियों की पहचान की जाएगी, जो कक्षोन्नति प्राप्त नहीं कर सके। उनके पालकों को समझाया जाएगा कि असफलता अंत नहीं है और लगातार प्रयास से बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है। साथ ही शाला प्रबंधन समिति की बैठक में नए सत्र की कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसमें शत-प्रतिशत नामांकन और ड्रॉपआउट कम करने पर विशेष फोकस रहेगा। हाई स्कूल में बच्चों को पहले दिन दिखाई प्रेजेंटेशन बैरागढ़ चिचली स्थित सरकारी हाई स्कूल में व्यवस्थाएं बेहतर नजर आईं। यहां स्कूल में साढ़े 350 से ज्यादा बच्चे हैं। पहले दिन बच्चों की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक रही। इस दौरान बच्चों को किताबें भी बांटी गईं। साथ ही पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के साथ स्कूल में पूरे साल होने वाली एक्टिविटीज दिखाई गईं, जिससे बच्चों का स्कूल के प्रति रुझान बढ़ाया जा सके। स्कूल की प्राचार्य निगम ने बताया कि आसपास की बस्तियों में प्रोजेक्टर के जरिए यह प्रेजेंटेशन वहां रहने वाले लोगों को दिखाए जा रहे हैं। इसके साथ सर्वे किए जा रहे हैं। पहला सर्वे होने के बाद 50 बच्चों की लिस्ट भी बनाई है। उनके अभिभावकों से लगातार संपर्क में हैं। अब हम आगे भी सर्वे कर नए बच्चों को स्कूल में दाखिला लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। दूसरी तरफ एक अलग तस्वीर… प्राथमिक स्कूल में बैठने की व्यवस्था तक नहीं
हुजूर विधानसभा क्षेत्र के गेहूंखेड़ा स्थित सरकारी प्राथमिक स्कूल में प्रवेश उत्सव के पहले दिन सिर्फ तीन बच्चे ही पहुंचे, जबकि स्कूल में स्टूडेंट्स की कुल संख्या 55 है। यही नहीं, स्कूल में न पीने के पानी की व्यवस्था है, न ही बच्चों के बैठने की व्यवस्था है। आवारा पशु स्कूल में घूमते नजर आते हैं। बच्चे क्लास में चटाई पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बीते कुछ दिनों से बिजली का काम चल रहा है, तो एक क्लास में तार का बंडल फैला हुआ है, तो एक अन्य क्लास में बर्तन रखे हुए हैं।
MP में 4 दिन का ‘स्कूल चलें हम’ अभियान:भोपाल में मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ, कहा-कल 4 लाख साइकिलों का वितरण करेंगे
