छिंदवाड़ा शहर के गोलगंज इलाके में स्थित 110 साल पुरानी और 4000 स्क्वायर फीट में बनी जामा मस्जिद आज भी आजादी के आंदोलन और सामाजिक एकता की मिसाल है। उत्तर प्रदेश के रामपुर निवासी स्वतंत्रता सेनानी अली बंधुओं (शौकत अली और मोहम्मद अली) ने अपनी नजरबंदी के दौरान 1916 में लोगों को एकजुट करने के लिए टर्की की डिजाइन में इसका निर्माण कराया था, जहां ब्रिटिश शासन के खिलाफ गुप्त बैठकें होती थीं। वर्तमान में यह मस्जिद जिले के मुस्लिम समाज का प्रमुख धार्मिक केंद्र है, हालांकि इसे ऐतिहासिक धरोहर का आधिकारिक दर्जा प्राप्त नहीं है। शादाब अली के अनुसार, इस मस्जिद का निर्माण वर्ष 1916 में “अली बंधुओं” द्वारा कराया गया था। शौकत अली और मोहम्मद अली उत्तर प्रदेश के रामपुर के रहने वाले बड़े स्वतंत्रता सेनानी थे। वे लगातार आज़ादी की गतिविधियों में सक्रिय रहते थे, जिससे वे अंग्रेजों की नजर में खटकते थे। इसी वजह से उन्हें नजरबंद कर अपनी मां के साथ छिंदवाड़ा लाया गया था। यहां उन्होंने समाज को एक मंच पर लाने के लिए जामा मस्जिद के निर्माण का निर्णय लिया। इसका उद्देश्य था कि यह जगह सिर्फ नमाज़ के लिए ही नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने का केंद्र भी बन सके। इसके निर्माण में कुल कितना समय लगा, इसका अंदाजा नहीं है। यह जिले की एकमात्र मस्जिद है जो टर्की की मस्जिद की डिजाइन में बनी है। देखिए तस्वीरें… अंग्रेजों के खिलाफ बनती थीं गुप्त रणनीतियां ब्रिटिश शासन के दौरान यह मस्जिद धीरे-धीरे एक महत्वपूर्ण सामाजिक और आंदोलन का केंद्र बन गई। यहां गुप्त रूप से बैठकों का आयोजन होता था, जहां स्वतंत्रता सेनानी अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति बनाते थे। धार्मिक सभाओं के माध्यम से लोगों के बीच देशभक्ति का संदेश फैलाया जाता था। उस समय जब खुलकर विरोध करना मुश्किल था, तब जामा मस्जिद गोलगंज ने आंदोलन की ताकत बनने की भूमिका बखूबी निभाई। 1921 में महात्मा गांधी आए थे छिंदवाड़ा एडवोकेट शौकत अली जाफरी के अनुसार, अली बन्धुओं के बुलावे पर 1921 में महात्मा गांधी भी छिंदवाड़ा आए थे और इस मस्जिद में पहुंचे थे। उन्होंने यहां लोगों से मुलाकात की और बैठकों के माध्यम से आज़ादी की लड़ाई को और मजबूत करने का संदेश दिया। उस समय अली बंधुओं के साथ एनी बेसेंट, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, मोतीलाल नेहरू और जवाहरलाल नेहरू जैसे बड़े नेता भी जुड़े हुए थे। ब्रिटेन में गोलमेज सम्मेलन के दौरान 1931 में छोटे भाई मोहम्मद अली की मौत हो गई, वहीं बड़े भाई शौकत अली का भी कुछ साल बाद निधन हो गया। आज भी 5 वक्त होती है नमाज, ईद पर जुटती है भीड़ आज 110 साल बाद भी जामा मस्जिद गोलगंज छिंदवाड़ा के मुस्लिम समाज का प्रमुख धार्मिक केंद्र है। यहां रोजाना पांच वक्त की नमाज़ अदा की जाती है और हर शुक्रवार को जुमे की नमाज़ में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। रमजान के महीने में यहां खास रौनक देखने को मिलती है। ईद के अवसर पर सुबह से ही हजारों लोग नमाज़ अदा करने के लिए यहां इकट्ठा होते हैं, जिससे मस्जिद और आसपास का पूरा इलाका लोगों से भर जाता है। 4000 स्क्वायर फीट में बनी इस मस्जिद को ऐतिहासिक धरोहर का आधिकारिक दर्जा प्राप्त नहीं है, लेकिन आजादी से जुड़ी गतिविधियों के चलते बुजुर्ग आज भी इसे खास मानते हैं।
इबादत, इतिहास की यादों कों समेटे छिंदवाड़ा की जामा मस्जिद:110 साल पहले अली बंधुओं ने कराया था निर्माण; 1921 में महात्मा गांधी भी आए थे
