सामूहिक रूप से गेहूं सुखाती महिलाएं दिनभर छत पर बैठकर गेहूं की निगरीनी करती रहीं, ताकि पक्षी उसमें चोंच में नहीं लगा सके। इस दौरान महिलाएं छठ की पौराणिक और लोक गीत गाती रही, जिससे चारो ओर गुनगुनाए जा रहे छठ गीत से माहौल पूरा भक्तिमय हो गया है।
छठ में स्वच्छता और पवित्रता का पूरा ख्याल रखा जाता है। पर्व के दौरान कहीं कोई चूक न हो जाए। इसको लेकर पूरा परिवार सावधान रहते हैं।साफ सफाई का विशेष ख्याल रखा जाता है।
25 अक्तूबर से शुरू होने वाला पर्व चार दिनों तक चलेगा। इस दौरान महिलाएं 36 घंटे का निर्जला व्रत रखेंगी और सूर्य देव की पूजा करेंगी। छठ पूजा में ठेकुआ का विशेष महत्व है, जो गेहूं के आटे, गुड़ और घी से बनाया जाता है। यह प्रसाद भगवान भास्कर को अर्पित किया जाता है और इसे बनाने के लिए विशेष नियमों का पालन करना पड़ता है।इसको लेकर महिलाएं गेहूं को धोने सूखने के बाद उनका आटा पिसवाया जाता है और फिर खरना के दिन से छठव्रती प्रसाद ठेकुआ तैयार करने में जुट जाती है।
