इस बार का छठ पर्व खूंटी जिला के लिए विशेष रहा, क्योंकि तोरपा, मुरहू और खूंटी के प्रमुख घाटों पर बनारस से आए पंडितों की टीम ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गंगा आरती की। गंगा आरती का दृश्य देखते ही बनता था। दीपों की कतारें, मंत्रोच्चार और शंख घंटों की ध्वनि से पूरा माहौल आध्यात्मिक और दिव्य बन गया।
श्रद्धालुओं ने दीप जलाकर आरती में भाग लिया और सूर्य देव से अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। तोरपा छाता नदी छठ घाट और खूंटी के चौधरी तालाब में इस बार भी भगवान भास्कर की प्रतिमा स्थापित कर भक्ति भाव से पूजा अर्चना की गई। जिले के तपकरा, तोरपा का नदी घाट, कर्रा, रनिया, गोविंदपुर, अड़की सहित सभी ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में छठ महापर्व पूरे भक्ति भाव से मनाया गया।
इसके पूर्व सोमवार की संध्या को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी थी। महिलाओं ने नदी और तालाबों में खड़े होकर परंपरागत विधि से अर्घ्य अर्पित किया। घाटों की आकर्षक सजावट, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और स्थानीय युवाओं की स्वेच्छा सेवा से पूरे कार्यक्रम में अनुशासन और सौहार्द का अद्भुत माहौल रहा।
खूंटी और आसपास के इलाकों में चारों दिनों तक चलने वाले इस लोक आस्था के महापर्व ने लोगों को एकता और समर्पण का संदेश दिया। जिले के हर कोने में छठ की भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला।
