इस फैसले का असर पूरे प्रदेश में देखने को मिल रहा है। हड़ताल के कारण करीब तीन लाख यात्री जगह-जगह फंसे हैं, स्टेशन और बस स्टैंड यात्रियों से खचाखच भरे हैं और कई लोगों को मजबूर होकर ट्रेन या रोडवेज बसों में खड़े होकर सफर करना पड़ रहा है।
प्रदेश में शुक्रवार को जहां 7,000 बसें बंद हुई थीं, वहीं शनिवार से जयपुर से भी सभी स्लीपर बसें बंद कर दी गईं।
ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल्स ने भी सेवा रोक दी है।
हालांकि, कुछ निजी बसें गुपचुप तरीके से चल रही हैं, लेकिन ऑपरेटर्स यात्रियों से सामान्य किराए से छह गुना तक पैसा वसूल रहे हैं।
जयपुर में 600 रुपये का टिकट 3,500 रुपये तक में बेचा जा रहा है। यात्रियों का कहना है कि बसें तो कम हैं, लेकिन मजबूरी में जो मिल रही है, उसी में जाना पड़ रहा है।
जैसलमेर और मनोहरपुर हादसे के बाद परिवहन विभाग ने अवैध बस संचालन, बॉडी डिजाइन और सुरक्षा मानकों की जांच शुरू की।
कई बसों के चालान काटे गए और कुछ को सीज किया गया।
इसी कार्रवाई के विरोध में अखिल राजस्थान कॉन्टैक्ट कैरिज बस एसोसिएशन ने शुक्रवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया।
एसोसिएशन का कहना है कि
हम सुरक्षा मानकों का पालन कर रहे हैं, फिर भी लगातार चालान काटे जा रहे हैं। हमें दो-तीन महीने का समय दिया जाए। स्लीपर
बसों के पहिए थमने से ट्रेनों और रोडवेज बसों पर यात्री भार कई गुना बढ़ गया है।
जयपुर रेलवे स्टेशन पर आम दिनों की तुलना में तीन गुना ज्यादा भीड़ है।
देवउठनी एकादशी और शादी-ब्याह के सीजन के कारण भी स्थिति और बिगड़ गई है।
बीकानेर, पाली और बाड़मेर में स्लीपर बसें पूरी तरह बंद हैं, जिससे लोगों ने ट्रेनों और रोडवेज की शरण ली है।
पाली से जोधपुर की ऑनलाइन टिकट बुकिंग अगले पांच दिन के लिए रोक दी गई है।
बाड़मेर-जोधपुर रूट पर रोडवेज ने बसों की संख्या बढ़ाकर हर 20 मिनट पर एक सर्विस कर दी है।
हड़ताल का असर प्रदेशभर में
है। जयपुर के सिंधी कैंप पर भारी भीड़ है और बसों में धक्का-मुक्की
हाे रही है। बीकानेर में 150 स्लीपर बसें बंद है और यात्री ट्रेन का रुख कर रहे हैं।
जोधपुर में ऑफलाइन और ऑनलाइन बुकिंग काउंटर बंद
हाे गए है। पाली में अगले पांच दिन तक ऑनलाइन टिकट बुकिंग बंद कर दी गई है।
बाड़मेर में हर 20 मिनट पर रोडवेज बस सेवा शुरू
की गई है। श्रीगंगानगर में माल परिवहन भी प्रभावित हाे गया है। राजस्थान में यह हड़ताल ऐसे वक्त में शुरू हुई है, जब देवउठनी एकादशी के बाद शादियों और यात्रा सीजन का आरंभ हुआ है।
ऐसे में बसों का ठप होना लाखों यात्रियों के लिए सिरदर्द बन गया है।
सरकार और ऑपरेटरों के बीच बातचीत जल्द न हुई तो यात्रा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।
