श्रद्धा के साथ मनाया गया नरक चतुर्दशी का पर्व

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नरक चतुर्दशी को रूप चौदस भी कहा जाता है। धनतेरस के साथ दिवाली के पांच दिनों का उत्सव शुरु हो जाता है। दूसरे दिन छोटी दिवाली मनाई जाती है। छोटी दिवाली को रूप चौदस और नरक चतुर्दशी के तौर पर भी मनाया जाता है।

ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप जोशी ने बताया कि हिंदू पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक नरक चतुर्दशी का दिन लंबी उम्र और सौंदर्य का दिन होता है। इस दिन लंबी आयु के लिए लोग यमराज की पूजा करते हैं। आज नरक चतुर्दशी के दिन भगवान कृष्ण की भी पूजा की जाती है, क्योंकि उन्होंने आज के ही दिन सत्यभामा की सहायता से नरकासुर का वध किया था। इसी के साथ नरकासुर की कैद से 16100 रानियों को भी मुक्ति दिलायी थी।

मान्यताओं के अनुसार आज के दिन तेल व उबटन लगाकर स्नान करने का विधान है। आज के दिन स्नान के समय करवा चौथ के करवे में रखे जल से स्नान करने से पापों का नाश होता है और नरक की यातना भी नहीं सहनी पड़ती।

रविवार को चतुर्दशी तिथि दोपहर बाद लगी थी। सोमवार को चतुर्दशी तिथि उदय काल में रहेगी। इस कारण से कुछ लोग सोमवार को नरक चतुर्दशी मनाएंगे।