एसडीपीओ के जांच में हुआ खुलासा: रजरप्पा पुलिस पर सीसीएल प्रबंधन लग रहा बेबुनियाद आरोप

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इन बिंदुओं पर एसडीपीओ ने की जांच

एसडीपीओ ने जांच के दौरान उन आरोपों पर ध्यान दिया जिसमें कहा गया था कि रजरप्पा थाना पुलिस को सूचना देने के बावजूद रात में कोई नहीं पहुंचा। प्राथमिकी दर्ज करने में आना-कानी हुई, पुलिस ने तस्करों को सहयोग की। साथ ही रजरप्पा थाना के कुछ कर्मियों की ओर से सीसीएल के अधिकारियों को धमकाया गया। यह सारे आरोप एसडीपीओ ने सत्य से परे पाया।

थाने में काफी देर से पहुंचे सीसीएल के अधिकारी

एसडीपीओ के जरिये जांच के क्रम में यह पाया गया कि रजरप्पा थाना के द्वारा प्रत्येक दिन रात्रि गश्ती में जाने वाले पुलिस पदाधिकारी का नाम एवं मोबाईल नबंर सीसीएल के क्षेत्रिय सुरक्षा पदाधिकारी श्याम सुन्दर रवानी को व्हाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है। घटना के दिन भी व्हाट्सएप में भेजा गया था, परन्तु उनके द्वारा अवैध कोयला के छापामारी करने के पूर्व या बाद में कोई भी सूचना गश्ती में प्रतिनियुक्त पुलिस पदाधिकारी को नहीं दिया गया।

सीसीएल प्रबंधन के पास संसाधनों की कमी नहीं है, फिर भी कोयला लदा वाहन पकड़े जाने के बाद वाहन को रजरप्पा थाना या सुरक्षित स्थान पर न ही ले जाया गया। न ही सुरक्षा गार्ड की तैनाती की गई। इस संबंध में गश्ती में प्रतिनियुक्त पुलिस पदाधिकारियों ने किसी भी वरीय पुलिस पदाधिकारी को इसकी कोई भी सूचना नहीं दी। केवल मीडिया के माध्यम से लोगों को दिग्भ्रमित करने का कार्य किया गया है ।

कथित अवैध कोयला डीपों के बारे में सीसीएल प्रबंधन के द्वारा ही बताया गया कि वन क्षेत्र अन्तर्गत पड़ता है। परन्तु इसकी सूचना वन विभाग को ससमय नहीं दिया गया। वन विभाग को सूचना 19 अगस्त को विलम्ब से दिया गया।

सीसीएल प्रबंधन ने 03 हाइवा को पकड कर रखने की बात मीडिया में कही। किन्तु प्राथमिकी दर्ज के समय जब्त प्रदर्श के तौर पर कोई भी हाइवा रजरप्पा थाना को सुपुर्द नहीं किया गया है। सीसीएल की कार्यशैली पर सवाल खड़ा होता है कि वह जब्त 03 हाइवा वाहन कैसे छोड़ा गया।

क्षेत्रीय सुरक्षा प्रभारी श्याम सुन्दर रखानी के जरिये रजरप्पा थाना पुलिस को लिखित में सूचना काफी विलम्ब से दिया गया। इसके बावजूद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले में अनुसंधान शुरू किया।