भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार गुरनाम सिंह चढूनी ने बुधवार को पोर्टल के आंकड़े साझा करते हुए आरोप लगाया कि कृषि विभाग, मंडी बोर्ड और खरीद एजेंसियों के अधिकारियों की मिलीभगत से धान घोटाले को अंजाम दिया गया है। पोर्टल पर 7 जिलों रोहतक, भिवानी, गुरुग्राम, महेद्रगढ़, रेवाड़ी, मेवात और चरखी दादरी में 64,726 एकड़ में धान की रोपाई दिखाई गई है, जबकि इन जिलों में कोई खरीद नहीं की गई।
कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष कर्म सिंह मथाना और मीडिया प्रभारी राकेश कुमार के साथ मीडिया से बात कर रहे गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि फिजिकल वेरिफिकेशन के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। जांच के लिए उन्हीं अधिकारियों व कर्मचारियों को लगा दिया जाता है, जिन पर खुद घोटाले में शामिल होने के आरोप हैं। घोटाले की तह तक जाने के लिए धान कुटाई से पहले सीबीआइ से फिजिकल वेरिफिकेशन कराई जानी चाहिए। मंडी प्रशासन ने बिना धान आए गेट पास काट दिए और फर्जी तरीके से ही धान की खरीद दर्शाते हुए सभी दस्तावेज पूरे कर दिए।
भाकियू प्रधान ने कहा कि इस बार बाढ़ के कारण धान का उत्पादन 40 लाख टन तक सिमट गया। इसके बावजूद मंडियों में कहां से 62 लाख टन धान आया, इसकी सीबीआइ जांच की जानी चाहिए। फर्जी गेट पास काटकर पूरे घोटाले को अंजाम दिया गया है।
