शुक्रवार को कांस्टीट्यूशन क्लब में बस्तर शांति समिति द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में पीड़ितोंं ने कहा कि 2011 में सुप्रीम कोर्ट का आदेश, जिसमें जस्टिस रेड्डी ने सलवा जुडूम (राज्य समर्थित आदिवासी बल, जिसे ‘कोया कमांडो’ भी कहा जाता था) को ग़ैरक़ानूनी और असंवैधानिक करार दिया था। इससे उनकी नक्सलियों से लड़ने की क्षमता कमज़ोर हुई, नक्सलियों का मनोबल बढ़ा,और उनके जीवन को और ख़तरा बढ़ गया।
पीड़ितों ने कहा कि अगर सलवा जुडूम पर रोक का आदेश नहीं होता तो 2014 तक नक्सली हमारे क्षेत्र से भाग गए होते और आज उनके परिवार के मारे गए सदस्य उनके साथ होते।
बस्तर शांति समिति के संयोजक जयराम ने कहा, ‘जब सलवा जुडूम को ताकत मिली थी, तब नक्सली इतने कमजोर हो गए थे कि उनका खात्मा होने वाला था। लेकिन रेड्डी साहब के सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने नक्सलियों को फिर से हिम्मत दी। इससे नक्सलवाद एक नासूर बन गया।’ उन्होंने बताया कि सलवा जुडूम के तहत छत्तीसगढ़ सरकार ने आदिवासी नौजवानों को स्पेशल पुलिस ऑफिसर बनाकर नक्सलियों के खिलाफ मोर्चा खोला था लेकिन 2011 में सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस रेड्डी भी शामिल थे, ने इसे गैर-कानूनी और असंवैधानिक बताकर सलवा जुडूम को तुरंत बंद करने और हथियार छीनने का आदेश दिया था।
इंडिया ब्लॉक ने 19 अगस्त 2025 को औपचारिक रूप से जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया। एनडीए की तरफ से सीपी राधाकृष्णन उम्मीदवार है।
उल्लेखनीय है कि उपराष्ट्रपति चुनाव 9 सितम्बर 2025 को होगा।
