बस्तर दशहरा में शामिल होने माता मावली की डोली व मां दंतेश्वरी का छत्र जगदलपुर हुआ रवाना

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दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी, कलेक्टर दंतेवाड़ा एवं एसपी ने भी डोली व छत्र की विधि-विधान से पूजा अर्चना के बाद माता की डोली को रवाना किया। माता की डोली व छत्र के साथ मंदिर समिति व जिला प्रशासन के लगभग 50 से ज्यादा सदस्य जिसमें डोली के साथ सेवादार, पुजारी, मांझी और चालकी परंपरागत साज-सज्जा के साथ जगदलपुर के लिए रवाना हुए। माता मावली की डोली एवं मां दंतेश्वरी दंतेवाड़ा का छत्र देर रात्रि में जगदलपुर जिया डेरा पंहुचेगी, जहां माता मावली की डोली एवं मां दंतेश्वरी के छत्र को स्थापित किया जायेगा। जहां बुधवार काे दिन भर श्रृद्धालुओं के दर्शनार्थ उपलब्ध रहेगा। वहीं बुधवार देर शाम काे मावली परघाव पूजा विधान में माता मावली की डोली एवं मां दंतेश्वरी दंतेवाड़ा का छत्र की अगवानी कर मां दंतेश्वरी मंदिर में स्थापित किया जायेगा।

रियासत कालीन परंपरानुसार प्रतिवर्ष अष्टमी के दिन ही माता मावली की डोली एवं मां दंतेश्वरी दंतेवाड़ा का छत्र को बस्तर दशहरा के लिए रवाना किए जाने से पहले शारदीय नवरात्र के पंचमी के दिन बस्तर राजपरिवार के सदस्य एवं बस्तर दशहरा समिति के सदस्य जगदलपुर से दंतेवाड़ा में स्थित माता के दरबार पहुंचकर परंपरानुसार पूजा-अर्चना के बाद माता मावली की डोली एवं मां दंतेश्वरी दंतेवाड़ा को बस्तर दशहरा में शामिल होने के लिए निमंत्रण दिया गया था। डोली को मंदिर से निकालने से पहले एक खास परंपरा निभाई जाती है। इसके तहत नगर कोतवाल बोधराज बाबा से अनुमति लेनी होती है। मान्यता है कि बोधराज बाबा दंतेवाड़ा की रक्षा करते हैं, उन्हें माटी देवता माना जाता है। डोली रवाना करने से पहले जिया परिवार के पुजारी बोधराज बाबा की पूजा करते हैं। इसके बाद ही डोली को मंदिर से बाहर लाया जाता है। डोली सबसे पहले जयस्तंभ चौक पर रुकती है। वहां से बोधराज बाबा की कुटिया जाकर फिर पूजा होती है और अनुमति ली जाती है, इसके बाद ही जगदलपुर के लिए रवाना हाेती है।