कुरुक्षेत्र के KDB मेला ग्राउंड में चल रहे पशु मेले में 50 लाख का एक घोड़ा पहुंचा। यह फतेहाबाद के लेरिया गांव से लाया गया है। नुकरे नस्ल के इस घोड़े का नाम बादशाह है, जो सिर से पैर तक पूरी तरह सफेद है। बादशाह की उम्र 28 महीने है और यह 65 इंच ऊंचा है। इसकी कीमत सुनकर पशु मेले में आए पशुपालक भी हैरान हैं। घोड़े के मालिक पूर्व सरपंच संतलाल ने बताया कि आंध्र प्रदेश का एक व्यक्ति बादशाह को लेने के लिए आया था, उसने इसकी कीमत 50 लाख रुपए लगाई थी। मगर, उसे मना कर दिया क्योंकि उन्होंने बादशाह को बेचने के लिए नहीं पाला। संतलाल ने यह भी बताया कि बादशाह को सर्दी और गर्मी में अलग-अलग डाइट दी जाती है। सर्दियों में उसे दूध में बादाम दिया जाता है। हफ्ते में 4 बार उसकी तेल से मालिश की जाती है। अब सिलसिलेवार ढंग से घोड़े बादशाह के बारे में जानिए… मां-बाप भी नुकरा नस्ल के थे संतलाल ने बताया कि बादशाह की मां फतेह भी नुकरा नस्ल की घोड़ी थी। बादशाह के जन्म के बाद फतेह की मौत हो गई थी। बादशाह उसकी पहली और अंतिम निशानी है। इसके पिता का नाम हंसराज बिल्ला और दादा का नाम राजबीर सूर्यबाली था। उन्होंने बड़े शौक और पूरी देखभाल के साथ बादशाह की परवरिश की है। तीनों टाइम की अलग-अलग डाइट संतलाल ने आगे कहा कि बादशाह को दिन में तीन बार अलग-अलग खुराक देते हैं। सुबह को 2 से 3 किलो उबले काले चने दिए जाते हैं। सुबह 11 बजे उसे घुमाने के लिए फार्म पर लेकर जाते हैं, जहां वह घास चरता है। शाम को उसे गाय का दूध पिलाया जाता है। सर्दी में उसे दूध में बादाम उबालकर देते हैं और बाजरा भी दिया जाता है। गाजर और देसी घी की चूरी भी खिलाते उन्होंने बताया कि गर्मी के दिनों में उसे मक्खन भी खिलाया जाता है। इसके अलावा जौ, गाजर, गाजर का जूस और देसी गाय के घी की चूरी देते हैं। चूरी को 100-150 ग्राम घी में बनाया जाता है और उसमें बादाम भी पीसकर मिला देते हैं। हफ्ते में 3 से 4 दिन उसकी तेल से मालिश होती है। इसे हर रोज नहलाया जाता है। बादशाह की सेवा के लिए उन्होंने अलग से कोई आदमी नहीं रखा है, क्योंकि वह उनका अपना है और उसकी हर जरूरत उन्हें ही पूरी करनी है। 40 साल पहले दादा रखते थे घोड़ी संतलाल ने बताया कि उन्हें अपने दादा प्रताप सिंह से घोड़े रखने का शौक लगा। करीब 40 साल पहले उनके दादा के पास एक घोड़ी थी। दादा अपनी घोड़ी की सेवा खुद करते थे। बादशाह की तरह घोड़ी को इतनी विशेष खुराक तो नहीं दी जाती थी, लेकिन उनके दादा उसकी ठीक तरह से देखभाल करते थे। दादा के बाद से उन्होंने घोड़े रखना शुरू कर दिया। घोड़ा पालने की गुजरात से ट्रेनिंग ली उन्होंने बताया कि वे गाय, भैंस और झोटे पीढ़ी दर पीढ़ी रखते आए हैं, जिनके बारे में उन्हें लगभग सारी जानकारी है। घोड़े रखने में उन्हें शुरू में काफी मशक्कत करनी पड़ी, क्योंकि घोड़ों के बारे में उन्हें जानकारी नहीं थी। फिर उन्होंने गुजरात से स्पेशल और प्रोफेशनल ट्रेनिंग लेकर यह काम शुरू किया। फिलहाल, उनके पास 8 और घोड़े हैं। दौड़ का मास्टर है बादशाह संतलाल ने यह भी बताया कि बादशाह पहली बार किसी कॉम्पिटिशन में उतरा है। उन्हें उम्मीद है कि बादशाह यह कॉम्पिटिशन जरूर जीतेगा। उनका बादशाह को बेचने का कोई इरादा नहीं है। उनका घोड़ा सुंदरता के साथ-साथ दौड़ने में भी ‘बादशाह’ है। बादशाह 1 सेकंड में 35 से 40 फुट तक दौड़ लगा सकता है। ————————————— ये खबर भी पढ़ें :- कुरुक्षेत्र पशु मेले में आया ₹1 करोड़ का घोड़ा:₹29 करोड़ के ‘भारत रत्न’ का बेटा अतिबल; देसी घी की चूरी खाता, एक घंटे मालिश होती हरियाणा के कुरुक्षेत्र में केडीबी मेला ग्राउंड में लगे पशु मेले में ₹1 करोड़ का घोड़ा पहुंचा। यह घोड़ा कैथल के गुहला-चीका के पूर्व MLA के फॉर्म से लाया गया। मारवाड़ी नस्ल के घोड़े का नाम अतिबल है। मजबूत कद-काठी, चमकदार रंग, संतुलित चाल और बेहतरीन ग्रूमिंग अतिबल की पहचान है। पढ़ें पूरी खबर…
₹50 लाख के घोड़े बादशाह की सर्दी-गर्मी में अलग डाइट:कुरुक्षेत्र के पशु मेले में आया, दूध संग बादाम खाता, हफ्ते में 4 बार तेल मालिश
