यूपी में अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने इस्तीफा वापस ले लिया है। 4 दिन बाद फैसले से पलटने वाले अफसर ने कहा- मेरे ऊपर किसी तरह का दबाव नहीं है। फिलहाल मैं, अपने दफ्तर में काम कर रहा हूं। उन्होंने 27 जनवरी की दोपहर योगी का सपोर्ट करते हुए इस्तीफा दिया था। अफसर ने प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य विवाद को लेकर कहा था- मैं योगी जी के बारे में एक शब्द नहीं सुन सकता। ठेला गाड़ी (पालकी) पर बैठकर कोई मुख्यमंत्री को उल्टा सीधा नहीं कह सकता। वो हमारे अन्नदाता हैं। आप लोग ऐसे लोगों से सावधान रहिए। ये समाज में गलत माहौल बनाते हैं। अफसर बोले- मेरे भाई के आपराधिक संबंध प्रशांत कुमार सिंह ने भाई विश्वजीत सिंह पर गंभीर आपराधिक आरोप भी लगाए हैं। उन्होंने कहा कि विश्वजीत, मुख्तार अंसारी के मऊ गैंग का सक्रिय सदस्य है। वह उसका फाइनेंशियल एडवाइजर भी रहा है। उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। विश्वजीत ने अपने माता-पिता के साथ मारपीट की, जिस मामले में एफआईआर दर्ज है। कारोबारी का आरोप- अफसर ने 8 लाख की डिमांड की GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह पर अयोध्या के कपड़ा कारोबारी लक्ष्मण दास ने गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि 2 अप्रैल को प्रशांत कुमार ने टीम के साथ दुकान पर आकर छापा मारा था। सर्वे के नाम पर फर्जी तरीके से 8 लाख की डिमांड की थी। गाली देते हुए धमकाया था। लक्ष्मण दास ने कोर्ट में याचिका लगाई है। भाई-बहन ने दिव्यांगता का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया प्रशांत कुमार सिंह के सगे भाई विश्वजीत सिंह ने वर्ष 2021 में उनके फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र को लेकर शिकायत की थी। यह शिकायत 4 वर्षों से लंबित बताई जा रही है, जो अब उनके इस्तीफे के बाद सामने आई है। लेटर सीएमओ मऊ की ओर से महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, उत्तर प्रदेश लखनऊ एवं अध्यक्ष स्टेट मेडिकल बोर्ड को लिखा गया है। पत्र का विषय दिव्यांगता प्रमाण पत्र के परीक्षण से संबंधित है। इसमें प्रशांत कुमार सिंह के साथ उनकी बहन जया सिंह का भी नाम दर्ज है। बहन जया सिंह कुशीनगर के हाटा तहसील में तहसीलदार हैं। उन्होंने कहा- भाई के द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं। इसकी जांच भी कराई जा सकती है। यह आरोप पारिवारिक विवाद के कारण लगाए जा रहे हैं। मैं जांच के लिए तैयार हूं। पत्नी से फोन पर बात करते-करते भावुक हुए
प्रशांत कुमार सिंह ने इस्तीफा देने के बाद पत्नी से फोन पर बात की। हैलो…कहते ही वे बेहद भावुक नजर आए। उनका गला रूंध गया और वे अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके। उन्होंने रोते हुए पत्नी से कहा- मन बेहद व्यथित था। मैंने इस्तीफा दे दिया है। मुझे बर्दाश्त नहीं हुआ। जिसका नमक खाते हैं, उसका सिला अदा करना चाहिए। मैं बहुत पीड़ा में था। मैं उसी प्रदेश से वेतन लेता हूं, उसी सरकार के तहत काम करता हूं। अगर उसी नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक बातें हों और मैं चुप रहूं, तो यह मेरे लिए संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वे पिछले दो रातों से सोए नहीं थे और उनकी दो छोटी बेटियां हैं। वे चाहते हैं कि बच्चे यह देखें कि उनका पिता सही और गलत के बीच खड़ा होने से नहीं डरा। यह फैसला किसी आवेग में नहीं, बल्कि लंबे आत्ममंथन के बाद लिया गया है। ‘ठेला गाड़ी पर बैठकर सीएम को उल्टा सीधा नहीं कह सकते’
GST डिप्टी कमिश्नर ने कहा- मैं तब तक अपना सरकारी काम करता रहूंगा, जब तक मेरा इस्तीफा मंजूर नहीं हो जाता। इस्तीफा मंजूर होने के बाद, जो भी साधन मेरे पास होंगे, उनसे समाज के लिए काम करूंगा। आज जो दर्द मुझे है, वही मैं कह रहा हूं। संविधान में विरोध करने का तरीका तय है, लेकिन ठेला गाड़ी (पालकी) पर बैठकर मुख्यमंत्री को उल्टा सीधा नहीं कह सकते। वो हमारे अन्नदाता हैं। मेरा कहना बस इतना है कि आप लोग ऐसे लोगों से सावधान रहिए। ये समाज में गलत माहौल बनाते हैं। समाज को आपस में बांटते हैं। मैं ऐसे बयानों का विरोध करता हूं, क्योंकि इनके कारण समाज जातियों में बंटने लगता है। प्रशांत के इस्तीफे की अहम बातें पत्नी ने भी इस्तीफा दिया था, बहन गोरखपुर में तहसीलदार
डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह की पत्नी वीणा सिंह मुंबई एयरपोर्ट पर स्पोर्ट्स कोटे से सिक्योरिटी इंचार्ज (दरोगा) थीं। 5 साल पहले उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। दो बेटियां हैं। एक की उम्र 10 साल और दूसरे की 15 साल है। पत्नी दोनों बेटियों के साथ लखनऊ में रहती हैं। पिता त्रिपुरारी सिंह आजमगढ़ बिजली विभाग में बाबू के पद से रिटायर्ड हैं। दो भाई हैं। बड़े भाई विश्वजीत सिंह लखनऊ में ही रहते हैं। छोटी बहन जया सिंह कुशीनगर में तहसीलदार हैं। दिवंगत सपा नेता अमर सिंह के करीबी, चुनाव भी लड़ चुके
प्रशांत कुमार सिंह आजमगढ़ से एलएलबी की पढ़ाई करने के बाद छात्र नेता भी रहे हैं। इस दौरान दिवंगत सपा नेता अमर सिंह के करीबी भी रहे हैं। नौकरी के दौरान उत्तर प्रदेश जीएसटी संगठन के चुनाव में भाग्य आजमा चुके हैं। प्रशांत कुमार ने कोचिंग क्लासेस चलाई, अमर सिंह की पार्टी में जिलाध्यक्ष रहे दैनिक भास्कर GST अफसर प्रशांत कुमार सिंह के गांव सरवां पहुंचा। वहां हमें मोनू सिंह मिले। वे प्रशांत कुमार के भाई लगते हैं। उन्होंने बताया- प्रशांत कुमार का 2013 में सिलेक्शन हुआ था। प्रशांत कुमार 2010 से 2013 तक स्वर्गीय रमाकांत के मकान में बच्चों को कोचिंग पढ़ाते थे। 2011 में अमर सिंह ने राष्ट्रीय लोकमंच पार्टी बनाई थी। उन्हें मऊ में पार्टी का जिलाध्यक्ष बनाया गया था। इस दौरान उन्होंने पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य किया। GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह मामले की टाइमलाइन अब बात प्रशांत कुमार के भाई विश्वजीत की दावों की… GST अधिकारी प्रशांत सिंह के बड़े भाई विश्वजीत सिंह ने कहा- उनकी जन्म तिथि 28 अक्टूबर 1978 है। उन्होंने 27 अक्टूबर 2009 को 31 साल की उम्र में CMO मऊ के यहां से 40 फीसदी कोटे का एक विकलांग सर्टिफिकेट बनवाया। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में 40 प्रतिशत विकलांगता पर 4 फीसदी का रिजर्वेशन मिलता है। उस कोटे के जरिए इन्होंने 2011 बैच में सिलेक्शन पा लिया। नौकरी करने लगे। अयोध्या से पहले कानपुर में पोस्टेड थे। 16 अगस्त 2021 को मुझे ये जानकारी हुई कि ये नौकरी उन्होंने विकलांग कोटे से पाई है। तब मैंने सीएमओ मऊ को अप्रोच किया। जो बीमारी दिखाई गई, वह उस उम्र में पूरे वर्ल्ड में बीमारी होती ही नहीं। मैंने सीएमओ को ये बात बताई। पत्रावली सीएमओ मऊ के पास थी। तब उन्होंने कहा कि यह प्रमाण पत्र गलत बना है। फिर मैंने उनको सुप्रीम कोर्ट की एक व्यवस्था बताई। शिकायत पर जांच रिपोर्ट.. शिकायत पर कोर्ट का आदेश… शंकराचार्य बोले- अफसर चापलूसी कर रहा GST अफसर के इस्तीफे पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- अयोध्या वाला अधिकारी तो उन्हें (सीएम योगी) खुश करने के लिए इस्तीफा दे रहा। चापलूसी कर रहा है। क्या यूपी सरकार जिस तरह से अलंकार अग्निहोत्री को सस्पेंड किया, उसी तरह से अयोध्या वाले अधिकारी को सस्पेंड कर सकती है? आप देखिएगा, ये कभी नहीं करेंगे। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- अगर अयोध्या वाले अधिकारी को योगी आदित्यनाथ का समर्थन ही करना था, तो वह काम करते रहता, ज्यादा जीएसटी कलेक्ट करता, उसने तो इस्तीफा देकर सरकार के काम में बाधा पहुंचाई है। कांग्रेस ने कहा- अफसर सरकार का नमक नहीं खाता
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय बोले- GST कमिश्नर के इस्तीफे पर अजय राय ने कहा, कोई भी अधिकारी सरकार का नमक नहीं खाता। जनता के टैक्स से उसको वेतन मिलता है। जनता के वफादार बनें। सरकार आती जाती हैं। सरकार के गलत कार्यों को छिपाने के लिए सरकार के समर्थन में अगर ये लोग इस तरह काम कर रहे हैं, तो ये देश का दुर्भाग्य है। ————————– ये खबर भी पढ़ें शंकराचार्य मामले पर इस्तीफा देने वाले बरेली मजिस्ट्रेट सस्पेंड:सरकारी गाड़ी वापस ली गई, DM से मिलने नहीं दिया तो दफ्तर के बाहर धरने पर बैठे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान में इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को शासन ने सस्पेंड कर दिया। उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि, अब तक इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ। माना जा रहा कि जांच पूरी होने के बाद ही सरकार इस्तीफा स्वीकार करेगी। फिलहाल, अग्निहोत्री को शामली अटैच कर दिया गया। बरेली कमिश्नर को मामले की जांच सौंपी गई है। मजिस्ट्रेट से सरकारी गाड़ी वापस ले ली गई है। वह मंगलवार सुबह 11 बजे डीएम से मिलने कलेक्ट्रेट पहुंचे, तो उन्हें अंदर जाने नहीं दिया गया। नाराज होकर वे कलेक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। पढ़ें पूरी खबर…
अयोध्या के GST अफसर ने वापस लिया इस्तीफा:कहा था- सरकार का नमक खाया, योगी के सपोर्ट में नौकरी छोड़ी थी
