डॉ राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के प्रौढ़ एवं सतत प्रसार शिक्षा विभाग में एक दिवसीय शैक्षिक संगोष्ठी ‘विश्व का भारतीय पुरातन परम्पराओं की ओर बढ़ रहा आकर्षक’ पर आयोजन किया गया।
आज सम्पूर्ण विश्व भारत की संस्कृति, सभ्यता और पुरातन परम्पराओं की ओर आकर्षित हो रहा है। विश्व के कई देशों के छात्र, नागरिक, और वैज्ञानिक भारत की चिर पुरातन परम्पराओं को अपना कर अपने अपने तरीके से लाभान्वित हो रहे हैं। यह वक्तव्य संगोष्ठी के मुख्य अतिथि अमेरिका के क्लीवलैंड क्लीनिक फाउंडेशन,ओहियो के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं उद्यमी, स्मिथ स्कूल ऑफ़ लाइफ लर्निंग के असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. सुदेश अग्रवाल ने दिया।
छात्र-छात्राओं के साथ संवाद में डॉ. अग्रवाल ने बताया कि हमें अपनी सांस्कृतिक परम्परा को दैनिक जीवन में उतारना होगा। जीवन कार्य पद्धति को अधिक शोधपरक बनाकर उसे गहनता से अंगीकृत करने की आवश्यकता है। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि कोविड 19 के पूर्व अमेरिका के इंडियन स्टडीज प्रकल्प के साथ कई वर्षों तक विदेशी छात्र-छात्राओं के कुछ दल भारतीय परंपराओं के अध्ययन के लिए आते थे। वे शोधार्थी अपने-अपने क्षेत्रीय समूह में भारत के ग्रामीण परिवेश और संस्कृतियों को पूर्वाग्रह से मुक्त होकर स्वीकार करने के लिए आकर्षित होते रहे। हमें अपनी संस्कृति, सभ्यता को और अधिक विस्तार देने का समय आ गया है।
विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र मिश्र ने डॉ. सुदेश अग्रवाल का स्वागत करते हुए कहा कि भारत की प्रतिभाएं विश्व भर में अपनी विशिष्ट क्षमता का प्रदर्शन कर रही हैं। भारत की संस्कृति सभ्यता पर निरंतर राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे शोध इस बात की ओर संकेत करते हैं कि युगों-युगों से हमारे पूर्वजों द्वारा विकसित ज्ञान परम्परा कितनी समृद्ध और लोक कल्याणकारी है। इस संगोष्ठी में भारतीय जनता पार्टी विदेश सम्पर्क विभाग, अवध क्षेत्र के संयोजक रवि तिवारी ने कहा कि हमें अपने दैनिक जीवन में अपने संस्कारों को गहनता पूर्वक स्थान देना वर्तमान कालखंड की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
इस अवसर पर डॉ. शालिनी पांडे, डॉ. सरिता सिंह, रत्नेश यादव, विनीता पटेल, सरिता पाठक, शोध छात्र विनय शर्मा, मोनिका, दीक्षा एवं विभाग के छात्र-छात्राओं की सहभागिता रही।
