Uttarakhand Traditional Rituals: उत्तराखंड की देवभूमि में जब भी कोई पूजा या शुभ कार्य होता है, तो एक खास चीज़ के बिना वह अधूरा माना जाता है और वह है ‘बर्मा’. 108 कूश के तिनकों से मंत्रों के साथ तैयार किया जाने वाला यह बर्मा आखिर इतना पवित्र क्यों है? क्यों इसके बिना देवताओं का आवाहन नहीं हो सकता? आइए जानते हैं पहाड़ों की इस सदियों पुरानी परंपरा और इसके पीछे छिपे धार्मिक महत्व के बारे में, जो आज भी हर पहाड़ी घर की आस्था का केंद्र है.
पहाड़ों में बर्मा के बिना अधूरा माना जाता है शुभ कार्य, जानें 108 तिनकों से बने देवताओं के इस पवित्र आसन का रहस्य
