हमारे देश की प्रमुख दलहनी फसलों में से एक है अरहर : दलहन वैज्ञानिक
कानपुर, 06जुलाई (हि.स.)। हमारे देश की प्रमुख दलहनी फसलों में से एक अरहर है। दलहन उत्पादन के साथ-साथ 150 से 200 किलोग्राम वायुमंडलीय नाइट्रोजन मृदा में स्थिरीकरण कर देता है। जिससे मृदा की उर्वरता में वृद्धि होती है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार अरहर की बुवाई का उत्तम समय मध्य जुलाई तक है। यह जानकारी चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के दलहन वैज्ञानिक डॉ अखिलेश मिश्रा ने दीं है।
दलहन वैज्ञानिक डॉ अखिलेश मिश्रा ने बताया कि अरहर हमारे देश की प्रमुख दलहनी फसलों में से एक है। उन्होंने कहा कि अरहर उत्पादन के साथ-साथ 150 से 200 किलोग्राम वायुमंडलीय नाइट्रोजन मृदा में स्थिरीकरण कर देता है। जिससे मृदा की उर्वरता में वृद्धि होती है।
डॉ अखिलेश ने बताया कि अरहर की बुवाई का उत्तम समय मध्य जुलाई तक है। उन्होंने किसानों को सलाह देते हुए कहा कि अरहर की उन्नतशील प्रजातियां जैसे नरेंद्र अरहर एक ,नरेंद्र अरहर दो, आजाद अरहर, मालवीय एवं आईपीए 203 प्रमुख हैं।
उन्होंने कहा कि अरहर के लिए दोमट एवं भारी मृदाएं सर्वोत्तम होती हैं। उन्होंने कहा कि अरहर के लिए 12 से 15 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर आवश्यकता होती है।
साथ ही बुवाई के पहले किसान भाई जैव उर्वरक जैसे राइजोबियम कल्चर से उपचारित करने के बाद बुवाई करें। जिससे कि अधिक मात्रा नाइट्रोजन में स्तरीकरण होता है तथा उत्पादन में वृद्धि होती है।
उन्होंने कहा कि बुआई के पहले 20 किलोग्राम नाइट्रोजन,50 किलोग्राम फास्फोरस, 20 किलोग्राम पोटाश तथा 20 किलोग्राम सल्फर देना सर्वोत्तम होता है।
