हरियाणा में भी फैली है अरावली पर्वत श्रंखला:सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश में भी आंदोलन की आहट, पूर्व सीएम हुड्‌डा उठाएंगे आवाज

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अरावली के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जहां राजस्थान में आंदोलन हो रहे हैं। ऐसे आंदोलनों की सुगबुगाहट हरियाणा में भी होने का अंदेशा है। वहीं अरावली पर्वतमालाओं की बात की जाए तो पूरे दक्षिणी हरियाणा में अरावली पर्वत श्रंखला आती है। इसलिए इसको बचाने के लिए न केवल कांग्रेस पार्टी, बल्कि पर्यावरण प्रेमी भी सामने आने लगे हैं। हरियाणा में अरावली दक्षिणी हरियाणा के गुरुग्राम, नूंह, रेवाड़ी, फरीदाबाद और महेंद्रगढ़ जिले में फैली है। इसके अलावा भिवानी के तोशाम में भी अरावली पर्वत श्रंखला के ही पहाड़ हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली नहीं माना जाए। जिसके बाद से राजस्थान में आंदोलन हो रहे हैं। ढोसी का पहाड़ सबसे ऊंचा महेंद्रगढ़ जिले की बात की जाए तो अरावली की यहां पर अनेक पहाड़ियां हैं। इनमें ढोसी की पहाड़ी ही ऐसी पहाड़ी है, जिसकी ऊंचाई 652 मीटर है। इनके अलावा पास के गांव रघुनाथपुरा की पहाड़ी, निजामपुर क्षेत्र के अनेक गांव बेरुंडला, मेघोत बिंजा, बिहारीपुर, जैनपुर, आंतरी, मौसमपुर व छापड़ा, खातोली अहीर, जाट, सरेली, घाटाशेर, टहला, मुकंदपुरा, मूसनौता व पांचनौता गांवों में पहाड़ हैं। कुछ में होता है खनन इसके अलावा बायल, बखरीजा और बसीरपुर में खनन होता है। यहां पर पहाड़ी ग्राउंड स्पेश जैसी है। वहीं गोलवा और खालड़ा की पहाड़ियों में खनन होता है। खालड़ा की पहाड़ी को छोड़ दें तो अन्य पहाड़ियां बहुत छोटी हैं। महेंद्रगढ़ में माधोगढ़ की पहाड़ी के अलावा सतनाली के पास लगती हुई पहाड़ियां भी अरावली का ही हिस्सा हैं। माधोगढ़ पहाड़ी की ऊंचाई भी ज्यादा है। रेवाड़ी, गुरुग्राम व नूहं में भी अनेक पहाड़ियां महेंद्रगढ़ के अलावा रेवाड़ी के कुंड और पाली के पास, गुरुग्राम में मानेसर के पास तथा नूहं में भी अरावली पर्वत श्रंखला की पहाड़ियां आती हैं। इनमें रेवाड़ी और गुरुग्राम की पहाड़ियों की ऊंचाई बहुत ही कम है। उठने लगे विरोध के स्वर सुप्रीम कोर्ट के अरावली पर दिए गए फैसले के बाद राजस्थान के साथ-साथ अब हरियाणा में भी विरोध के स्वर उठने लगे हैं। कांग्रेस इसको लेकर अग्रेसिव है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने एक वीडियो जारी कर इसके नुकसान के बारे में बताया है। वहीं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्‌डा भी इसको लेकर आवाज उठाएंगे। दिल्ली तक फैल जाएगा रेगिस्तान इस बारे में पर्यावरणविद रघुविंद्र यादव ने बताया कि अरावली की पहाड़ियों पर दिया गया फैसला सही नहीं है। प्रदेश में सभी पहाड़ियों की ऊंचाई 100 मीटर से कम ही है। इसको नापने का पैमाना क्या है। अगर इसको समुद्र तल से नापा जाए तो सही रहेगा। अगर पहाड़ ही कट गए तो दिल्ली तक रेगिस्तान फैल जाएगा। स्टीक क्षेत्रफल बताना मुश्किल हरियाणा में अरावली पर्वत श्रृंखला का सटीक कुल क्षेत्रफल बताना मुश्किल है, क्योंकि यह एक विशाल श्रृंखला का हिस्सा है जो कई राज्यों में फैली है, लेकिन यह गुरुग्राम, नूंह और महेंद्रगढ़ जैसे जिलों में है। गुरुग्राम में यह लगभग 11,256 हेक्टेयर (9.48%) में फैली है और इसका सबसे ऊंचा पॉइंट महेंद्रगढ़ के पास ढोसी पहाड़ी (652 मीटर) है, जो अरावली का उत्तरी छोर है और यह थार मरुस्थल को फैलने से रोकने और भूजल स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण है।
मुख्य पॉइंट:
फैलाव: अरावली हरियाणा के दक्षिणी भाग में गुरुग्राम, नूंह, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, झज्जर और भिवानी जिलों में फैली हुई है।
क्षेत्रफल (गुरुग्राम में): गुरुग्राम जिले के कुल क्षेत्रफल का 9.48% (लगभग 11,256 हेक्टेयर) अरावली पहाड़ियों से घिरा है।
सबसे ऊंचा स्थान: हरियाणा में अरावली की सबसे ऊंची चोटी महेंद्रगढ़ जिले के कुलताजपुर गांव के पास ढोसी पहाड़ी (652 मीटर) है।
महत्व: यह भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है जो थार रेगिस्तान के विस्तार को रोकती है, भूजल को रिचार्ज करती है और जैव विविधता का समर्थन करती है।