हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के बाद पानीपत जिला परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। उपायुक्त एवं निर्धारित प्राधिकारी की ओर से जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, जिला परिषद के प्रधान (अध्यक्ष) का चुनाव आगामी 28 जनवरी को सुनिश्चित किया गया है। चुनाव प्रक्रिया लघु सचिवालय स्थित उपायुक्त कार्यालय के बैठक हॉल में की जाएगी। आधिकारिक पत्र के अनुसार, चुनाव के लिए सभी 16 निर्वाचित सदस्यों की बैठक 28 जनवरी को सुबह 11 बजे बुलाई गई है। चुनाव प्रक्रिया की शुरुआत सदस्यों के स्वागत और हाजिरी के साथ होगी। इसके तुरंत बाद, 11:30 बजे दो-तिहाई बहुमत की उपस्थिति सुनिश्चित होने पर अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए निर्देश दिए जाएंगे। नामांकन से लेकर नतीजे तक का पूरा शेड्यूल
प्रशासन ने पूरी चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और त्वरित बनाने के लिए समय निर्धारित किया है। 11:45 बजे से नामांकन फॉर्म प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके बाद जांच, नाम वापसी और ईवीएम (EVM) तैयार करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मतदान दोपहर 1:15 बजे से शुरू होगा और दोपहर 2:00 बजे तक मतगणना पूरी कर परिणाम की घोषणा कर दी जाएगी। इन सदस्यों पर टिकी है नजर
इस चुनावी बैठक के लिए वार्ड नंबर 1 से 17 तक के सभी सदस्यों को सूचना भेज दी गई है। इनमें उप-प्रधान आर्य सुरेश मलिक, आकाश पौडिया, रणदीप सिंह, अन्नू, संदीप, रेखा रानी, जगवीर सिंह, सुदेश रानी, सुंदर, ज्योति, राजेश कुमार, ममता देवी, नारायण दत्त, प्रियंका तोमर, पूजा और जितेन्द्र कुमार शामिल हैं। तीन साल में भाजपा की 2 चेयरपर्सन हटीं, अब कुर्सी खाली
पानीपत जिला परिषद की चेयरपर्सन की कुर्सी पिछले 3 साल में 2 बार भरी। पहली चेयरपर्सन ज्योति शर्मा भाजपा के समर्थन से बनीं थी। जबकि दूसरी बार काजल देशवाल चेयरपर्सन बनने के बाद भाजपाई बन गईं थी। दोनों ही लंबे समय तक कुर्सी पर नहीं टिक पाईं। अब चेयरपर्सन की कुर्सी खाली है। पहले ज्योति, फिर काजल बनीं चेयरपर्सन
ज्योति शर्मा 27 दिसंबर 2022 को भाजपा के समर्थन से जिला परिषद चेयरपर्सन चुनी गई थीं। लेकिन उनके खिलाफ लामबंदी शुरू हो गई। 6 मार्च 2024 को उन्हें पद छोड़ना पड़ा। उस समय 17 में से 13 पार्षद उनके खिलाफ खड़े थे। इसके बाद 14 जून 2024 को इन्ही लामबंद पार्षदों के समर्थन से काजल देशवाल सर्वसम्मति से चेयरपर्सन बन गईं। लेकिन सिर्फ एक साल ही इस पद पर रह पाईं। जाति प्रमाणपत्र फर्जी साबित होने पर उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। फर्जी सर्टिफिकेट से पार्षद बनीं, फिर चेयरपर्सन तक पहुंचीं
पानीपत जिला परिषद का वार्ड-13 पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित था। काजल देशवाल ने इस वार्ड से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन में खुद को कश्यप राजपूत बताया। इसके साथ ही एक जाति प्रमाणपत्र भी लगाया गया। उसमें उल्लेख था कि कश्यप राजपूत पिछड़ा वर्ग में आते हैं। जबकि जांच में यह सामने आया कि उत्तर प्रदेश, जहां काजल का जन्म हुआ, वहां कश्यप राजपूत पिछड़ा वर्ग की बजाय सामान्य श्रेणी में आते हैं। डीएम की रिपोर्ट में साफ लिखा गया कि यह जाति प्रमाणपत्र अवैध है। इसी आधार पर काजल की सदस्यता और चेयरपर्सन की कुर्सी चली गई। ज्योति से हारी और उन्हीं से कुर्सी भी छीनी
पानीपत जिला परिषद चेयरपर्सन का पद इस बार महिला के लिए आरक्षित था। तब भाजपा के समर्थन से ज्योति शर्मा मैदान में उतरीं और विपक्ष ने काजल देशवाल को उतारा। मुकाबला कड़ा हुआ और ज्योति 2 वोटों से चेयरपर्सन बनीं। लेकिन एक साल के भीतर ही उनके खिलाफ पार्षद लामबंद हो गए और अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी कर ली। प्रस्ताव पेश होने से पहले ही ज्योति शर्मा ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद काजल देशवाल चेयरपर्सन बन गईं।
पानीपत जिला परिषद अध्यक्ष के चुनाव की घोषणा:नामांकन से नतीजे तक का शेड्यूल जारी, तीसरी बार चुनीं जाएगी प्रधान
