बलरामपुर : रामानुजगंज में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई गई आंवला नवमी

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रामानुजगंज की रहने वाली स्थानीय महिला रानी सोनी ने बताया कि, आंवला नवमी की पूजा के लिए यह तिथि बहुत महत्वपूर्ण होती है। हम घर से खीर, पुड़ी, सब्जी, हलवा, भजिया और अगरौटा बनाकर लाए हैं। आंवला पेड़ के नीचे बैठकर इन्हीं व्यंजनों का प्रसाद ग्रहण करते हैं। खास तौर पर अगरौटा का इस दिन विशेष महत्व रहता है।

वहीं मां महामाया मंदिर के पूजारी नंदलाल पांडेय ने बताया कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को आंवला नवमी कहा जाता है। इस दिन आंवला वृक्ष की पूजा करने से मोक्ष और पितृदोष से मुक्ति प्राप्त होती है। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। यहां का माहौल पूरी तरह भक्तिमय है।

दिनभर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में आंवला वृक्ष के चारों ओर परिक्रमा कर पूजन करती रहीं और परिवार के कल्याण, संतति सुख व दीर्घायु की कामना की। पूजा के बाद सभी ने वृक्ष के नीचे बैठकर प्रसाद ग्रहण किया।

उल्लेखनीय है कि, आंवला नवमी का यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति श्रद्धा और संरक्षण का संदेश भी देता है। रामानुजगंज में आज के दिन आंवला वृक्ष लोकविश्वास और संस्कृति का जीवंत प्रतीक बन गया।