अखिलेश बोले मुख्यमंत्री ने काशी में तुड़वाए 100 मंदिर:सपा शासनकाल में हुई घटना गलत परिस्थितियों और भाजपा के तांडव की देन थी

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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि मुख्यमंत्री ने काशी में मणिकर्णिका घाट के साथ ही राजमाता पूज्य अहिल्याबाई की मूर्ति को तोड़वा दिया है। सनातन समाज और पाल समाज के लोग मुख्यमंत्री से बहुत नाराज हैं। इन्होंने काशी में करीब सौ मंदिर भी तोड़े हैं। नेपाल नरेश का दान किया हुआ घंटा भी गायब हो गया है। अखिलेश ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार में शंकराचार्य पर वाराणसी में लाठीचार्ज के सीएम योगी के बयान पर अखिलेश यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री बिष्ट जी कुछ नहीं जानते हैं, समाजवादी पार्टी की सरकार में काशी में वह घटना गलत परिस्थितियों और भाजपा के तांडव की वजह से हुई थी। तब पूज्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महराज, शंकराचार्य नहीं थे। लेकिन उस घटना के बाद पूज्यनीय शंकराचार्य से हम लोगों ने क्षमा मांगते हुए अपनी गलती स्वीकार कर ली थी। हम लोग शंकराचार्य जी के साथ हैं। उन्होंने कहा कि इस सरकार ने शंकराचार्य को गंगा में स्नान नहीं करने दिया। उनके रथ को धक्का मारा। बिना डिग्री के मुख्यमंत्री ने शंकराचार्य को पवित्र त्रिवेणी पर अपमानित करने का काम किया। देश के पूरे सनातनी और पीडीए के लोग बाबा साहब अम्बेडकर द्वारा दिए गए वोट के अधिकार से भाजपा को सबक सिखाने का काम करेगा। जगह–जगह ढह रही पानी की टंकियां अखिलेश ने कहा कि भाजपा सरकार में जल जीवन मिशन में बन रही पानी की टंकियां भ्रष्टाचार का भार नहीं सह पा रही है। टंकियां ढह जा रही हैं। मुख्यमंत्री जब लखीमपुर में थे तब भी वहां पानी की टंकी ढह गयी थी। आगरा में ढह गयी। टंकियां जिले-जिले में गिर रही हैं। इनको पता है कि टंकियां ठीक नहीं बनी है। आधा पानी भरा जाता है, तब भी गिर जा रही है। इस सरकार में भ्रष्टाचार की पाइप लाइन महोबा से सीधी लखनऊ आ रही है। जिसकी वजह से टंकी गिर गयी। पानी को सफेद कर बच्चों को पिलाया जा रहा महोबा में तो पानी में दूध मिलाया गया है। पानी को सफेद कर बच्चों को पिलाया जा रहा है। इस सरकार के भ्रष्टाचार को प्रदेश की जनता समझ गयी है। जेन जी लोगों ने सीएम का नया शब्द निकाला है, करप्ट माउथ। जेन जी बहुत जागरूक है। अखिलेश यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री बिष्ट जी को पता ही नहीं कि प्रदेश में क्या हो रहा है। इनके अनरजिस्टर्ड संगी-साथियों ने कभी वंदेमातरम् नहीं गाया। न आजादी के पहले गाया और न आजादी के बाद गाया। इन्हें अपने अनरजिस्टर्ड संगी-साथियों से पूछना चाहिए कि आपने आजादी से पहले वंदे मातरम् क्यों नहीं गया। सुजलाम, सुफलाम क्यों नहीं गाया? जनता का सरकार की नीतियों का विरोध करने का अधिकार वीबी रामजी योजना के विरोध को लेकर अखिलेश यादव ने कहा कि लोकतंत्र में जनता को सरकार की नीतियों का विरोध करने का अधिकार है। लेकिन यह सरकार विरोध नहीं सह पाती है। विरोध को न देख सकती है और न सुन सकती है। सिर्फ अपना राग गाती रहती है। इतनी झूठी सरकार आज तक नहीं देखी है। अखिलेश यादव ने कहा कि वीबी रामजी योजना में यूपी का बजट कम हो गया। इस योजना का विरोध करना अच्छी बात है। इससे सरकार को पता चलेगा कि जनता किस बात से नाराज है। योजना में क्या खामियां है? उसमें क्या संशोधन होना चाहिए? श्री यादव ने कहा कि भाजपा सरकार सच्चाई छिपा रही है। वीबी रामजी योजना में उत्तर प्रदेश का बजट कम हो गया। हम चाहते है कि वीबी रामजी योजना में दिल्ली सरकार यूपी को ज्यादा बजट दें। बजट ज्यादा आयेगा तभी लोगों को ज्यादा काम मिलेगा। भाजपाइयों ने बिल्डिंग खड़ी करने में केवल कमीशन खाया एक अन्य कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने समाजवादी पार्टी के समय में बने मेडिकल कॉलेज, कैंसर इंस्टीट्यूट व अन्य अस्पतालों की जानबूझकर अनदेखी की है। भाजपाइयों ने अपने समय में बने मेडिकल कॉलेजों की बिल्डिंग खड़ी करने में केवल कमीशन खाया है लेकिन उन्हें चलाया नहीं है। मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल, ट्रामा सेंटर बिना स्टॉफ के खड़े हैं। भाजपाइयों ने अपने कार्यालय, और मुख्य भाजपाई जी ने अपनी आयुष यूनिवर्सिटी तो खोल ली है परंतु जनहित में काम करने वाले आम अस्पतालों की पूरी तरह उपेक्षा की है। रही बात स्वास्थ्य मंत्री की तो ये समझ लेना चाहिए कि वो खुद और उनका विभाग ‘हाता नहीं भाता’ की मुख्य-नीति के विस्तार के कारण, उन्हीं की तरह उपेक्षित हैं। स्वास्थ्य मंत्री की कोई सुनता ही नहीं पार्टी की ओर से जारी प्रेस नोट में अखिलेश यादव की ओर से कहा गया है कि अगले मंत्रिमंडल विस्तार में उनसे विभाग छीनने का आधार बनाया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय और विभाग की ऐसी दुर्गति देखकर हर कोई, ये सहज रूप से स्वीकार भी कर लेगा कि सच में स्वास्थ्य मंत्री की लापरवाही और कमीशनखोरी की वजह से प्रदेश में चिकित्सा सेवाओं की इतनी दुर्दशा हुई है। जबकि सच ये है कि उन बेचारों के हाथ में पैसों के हिस्से बाँट के अलावा और कुछ अधिकार या दूसरी शक्ति, सामर्थ्य और अख्तियार नहीं है। स्वास्थ्य-चिकित्सा विभाग में वो नेम प्लेट पर ही मंत्री हैं, कोई उनकी सुनता भी नहीं है। सुना है उन्होंने अपने मोबाइल में एक रिमाइंडर लगा रखा है, जो रोज सुबह उन्हें याद दिलाता है कि वो स्वास्थ्य मंत्री हैं। जानेवालों के बारे में अब और क्या कहा जाए, थोड़े लिखे को ही पूरा समझा जाए, उनका ‘हाता से जो पुराना नाता है’, शायद उसीकी वजह से बंद हो रहा उनका खाता है। भाजपा जाए तो सेहत सुधर पाए।