बस्तर गोंचा पर्व में श्रीरामचरित मानस का अखंड पाठ हुआ शुरू, एक जुलाई को हेरापंचमी पूजा विधान होगा
जगदलपुर, 04 जुलाई। बस्तर गोंचा पर्व में भगवान श्रीजगन्नाथ, माता सुभद्रा व बलभद्र स्वामी के गुंडिचा मंदिर-सिरहसार भवन में विराजित होने के बाद भगवान के दर्शन और पूजन के लिए हजाराे श्रद्धालु रोजाना पहुंच रहे हैं। आज साेमवार सुबह गुंडिचा मंदिर-सिरहसार भवन में श्रीगणेश पूजन के साथ श्रीरामचरित मानस का अखंड पाठ शुरू किया गया, संगीतमय अखंड श्रीरामायण पाठ 24 घंटे तक चलेगा। एक जुलाई को इसका परायण किया जाएगा। 360 घर आरण्यक ब्राहम्ण समाज के वरिष्ठ सदस्य बनमाली पानीग्राही के परिवार के द्वारा अनवरत विगत 44 वर्षों से अंखड रामायण पाठ का आयोजन किया जा रहा है। गुंडिचा मंदिर-सिरहसार भवन में श्रीजगन्नाथ, माता सुभद्रा व बलभद्र स्वामी के समक्ष आज साेमवार काे 38 परिवाराें ने सत्यनारायण कथा श्रवण किया। एक जुलाई को बस्तर गोंचा पर्व के नियत कार्यक्रम के अनुसार हेरापंचमी पूजा विधान संपन्न की जाएगी।
रियासत कालीन पंरंपरा का निर्वहन करते हुए आज भगवान श्रीजगन्नाथ काे अर्पण किये जाने वाले अमनियात भाेग का अर्पण ग्राम बिन्ता-बारसुर, कुम्हली-पोटानार,लोहण्डीगुड़ा, छिन्दगांव, टाकरागुड़ा के 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के परिवाराें द्वारा संपन्नता उपरांत श्रीजगन्नाथ के भात-प्रसाद का वितरण किया गया, इस दाैरान हजराे श्रृद्धलुओं ने श्रीजगन्नाथ के भात का प्रसाद ग्रहण किया।
360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज एवं बस्तर गाेंचा समिति के वरिष्ठ सदस्य एवं बनमाली पानीग्राही ने बताया कि भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा व बलभद्र स्वामी की असीम कृपा से वर्ष 1981 से शुरू हुए श्रीरामचरित मानस का अखंड पाठ का यह सिलसिला अनवरत 44 वर्षों से बस्तर गोंचा पर्व में 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के आशिर्वाद से मेरे परिवार के माध्यम से गुंडिचा मंदिर-सिरहसार भवन में आयोजित किया जा रहा है। आगे भी इसे अनवरत जारी रखा जायेगा।
उन्हाेंने बताया कि आषाढ़ शुक्ल षष्ठी तिथि में एक जुलाई को बस्तर गोंचा पर्व के नियत कार्यक्रम के अनुसार हेरापंचमी पूजा विधान संपन्न की जाएगी। हेरापंचमी पूजा विधान में महालक्ष्मी की दो डोलियां श्रीजगन्नाथ मंदिर से निकाली जाएगी। एक डोली पहले निकलकर बस्तर महाराजा के राजमहल, राजगुरू परिवार व कुंवर परिवार की ओर से होते हुए सिरहासार चौक पंहुचने के बाद दूसरी डोली श्रीजगन्नाथ मंदिर से निकलकर माता महालक्ष्मी की दो डोलियां रथ परिक्रमा स्थल से होते हुए गुंडिचा मंदिर-सिरहासार भवन पंहुचेगी जहां माता लक्ष्मी-भगवान श्रीजगन्नाथ के मध्य संवाद होगा।
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