उन्होंने कहा हरिद्वार में होने वाले अर्धकुंभ के लिए न तो अभी मुख्यमंत्री या शासन-प्रशासन की ओर से किसी बैठक के लिए निमंत्रण आया है और न ही अखाड़ों को मेले में भाग लेने के लिए कोई प्रस्ताव दिया गया है। हमें प्रस्ताव व निमंत्रण का इंतजार है। मुख्यमंत्री अखाड़ों को अर्धकुंभ मेले के लिए निमंत्रित करेंगे तो अखाड़े उसमें अवश्य शामिल होंगे और अमृत स्नान भी करेंगे।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी ट्रस्ट हरिद्वार के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री राज्य का राजा ही होता है और कुंभ मेले की यह परंपरा है कि कुंभ मेले के कार्यों की शुरुआत पहले राजा और अब मुख्यमंत्री करते हैं। महाकुंभ, कुंभ या अर्धकुंभ जिस राज्य में होता है, उस राज्य के मुख्यमंत्री स्वयं अखाड़ों को मेले का निमंत्रण देते हैं, क्योंकि महाकुंभ, कुंभ व अर्धकुंभ कोई साधारण स्नान या मेला नहीं है। संबंधित राज्य की सरकार पर मेले के संचालन व व्यवस्था का दायित्व होता है।
कहा उज्जैन में कुंभ का आयोजन हो रहा है तो वहां के मुख्यमंत्री ने सभी अखाड़ों को उसका निमंत्रण दे दिया है। नासिक के कुंभ के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने निमंत्रण दिया है। वहां के मुख्यमंत्री, कमिश्नर व कुंभ मेला अधिकारी निरंतर अखाड़ों के संपर्क में हैं। अधिकारियों ने बताया है कि अखाड़ों के लिए एक-एक करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुके हैं। कुंभ मेला शुरू होने से पहले ही सभी अखाड़ों को पांच-पांच करोड़ रुपये मिल जाएंगे।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से वार्ता हुई थी तो उन्होंने कहा था कि श्रीमहंत हरि गिरि महाराज का इंतजार है। अब महाराज जी आ गए हैं, तो उम्मीद है कि मुख्यमंत्री अखाड़ों को अर्धकुंभ मेले का निमंत्रण देंगे, बैठक बुलाकर उनसे वार्ता करेंगे और उनके सुझावों के अनुसार कार्य कराकर मेले को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाएंगे।
