दीपक जादौन दीनू के साथ मिलकर काम करता था। वह अपहरण, जमीनों पर कब्जे करने और रंगदारी मांगने जैसे संगीन मामलों में दीनू के साथ बराबर का हिस्सेदार था। जैसे ही पुलिस ने दीनू के खिलाफ एक के बाद एक मामले दर्ज करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। तभी से दीपक पुलिस की आंखों में धूल झोंककर इधर-उधर फरारी काट रहा था।
उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस कई राज्यों में छापेमारी कर रही थी लेकिन मंगलवार की दोपहर अचानक उसने सरदार की वेशभूषा में न्यायालय में अपने वकील के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। उसका हुलिया देखकर उसे कोई भी पहचान नहीं सका।
बाद में उसे अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन चतुर्थ की अदालत में समर्पण करने के बाद 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
