(अपडेट )अंबिकापुर : परसोड़ीकला में जमीन विवाद ग्रामीणों और पुलिस में भीषण झड़प, दर्जनों घायल, सियासत भी गरमाई

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ग्रामीणों का आरोप है कि, प्रशासन खदान विस्तार के लिए उनकी जमीन जबरन खाली कराना चाहता है। पथराव के दौरान पुलिस पर गुलेल से भी हमला किया गया। 12 से ज्यादा ग्रामीण भी घायल हुए हैं। इसके बाद पुलिस ने गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज करते हुए गांव में अतिरिक्त फोर्स तैनात कर दिया है।

मामले पर सियासत तेज, टीएस सिंहदेव ने सरकार पर साधा निशाना

घटनाक्रम के बाद नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने एक्स पर कड़ा प्रहार करते हुए लिखा कि, सरकार जिनकी प्रतिनिधि है, उन्हीं पर लाठियां बरसा रही है। परसोड़ीकला में जो हुआ, वह लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। बाहर की निजी कंपनी के हित में स्थानीय ग्रामीणों को कुचला जा रहा है। उन्होंने इसे ‘गुजरात मॉडल’ बताते हुए कहा कि स्थानीय लोगों के अधिकारों और रोजगार को अनदेखा कर बाहरी कंपनियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।

कांग्रेस ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए लिखा कि, अमेड़ा खदान विवाद सिर्फ जमीन का मामला नहीं, बल्कि सरकार की सोच का आईना है। आदिवासी अपने जंगल-जमीन बचाने खड़े हैं, लेकिन सरकार उनकी सुनने को तैयार नहीं।

क्या है पूरा विवाद?

अमेड़ा खदान के विस्तार के लिए एसईसीएल ने वर्ष 2001 में परसोड़ीकला की जमीन अधिग्रहित की थी, परंतु ग्रामीण आज भी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं। गांव के केवल 19प्रतिशत किसानों ने ही मुआवजा लिया है, वह भी बिना नौकरी मिले। बाकी लोग पुश्तैनी जमीन को कोयला उत्खनन के लिए देने से लगातार इंकार कर रहे हैं। बुधवार को प्रशासन करीब 500 पुलिसकर्मियों के साथ खदान का कार्य शुरू कराने पहुंचा। ग्रामीणों के विरोध और पथराव के बाद पुलिस ने भी पत्थर चलाकर जवाब दिया। इसके बाद आंसू गैस का उपयोग करते हुए भीड़ को हटाया गया।

ग्रामीणों के टेंट और तंबू तोड़ दिए गए हैं। कई पुरुष गांव छोड़कर सुरक्षित जगहों पर चले गए हैं। पुलिस आरोपिताें की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।

एसईसीएल का दावा, मुआवजा और रोजगार दिया गया

झड़प के बाद एसईसीएल ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि, परसोड़ीकला के ग्रामीणों को अब तक 10 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया है और रोजगार भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कंपनी का कहना है कि कुछ असामाजिक तत्व खनन कार्य में बाधा डाल रहे हैं। कंपनी ने यह भी बताया कि, यह खदान निजी ऑपरेटर एलसीसी द्वारा संचालित की जा रही है, और बुधवार की झड़प में एएसपी व अपर कलेक्टर भी आंशिक रूप से घायल हुए। मौके पर तनाव के बीच खदान का कार्य आंशिक रूप से पुनः शुरू करा दिया गया है।

परसोड़ीकला की यह घटना जमीन, अधिकार और विकास के बीच चली आ रही खींचातानी को एक बार फिर सुर्खियों में ले आई है। स्थिति फिलहाल शांत जरूर है, लेकिन तनाव अभी भी महसूस किया जा सकता है।