हरियाणा के कुरुक्षेत्र में केडीबी मेला ग्राउंड में लगे पशु मेले में 1 करोड़ का घोड़ा पहुंचा। यह घोड़ा कैथल के गुहला-चीका के पूर्व MLA के फॉर्म से लाया गया। मारवाड़ी नस्ल के घोड़े का नाम अतिबल है। मजबूत कद-काठी, चमकदार रंग, संतुलित चाल और बेहतरीन ग्रुमिंग अतिबल की पहचान है। 34 महीने का अतिबल मेले में ब्यूटी कॉन्टेस्ट में सेंकेंड चैंपियन रहा। अतिबल का रंग काला है, लेकिन उसके माथे पर सफेद निशान है। अतिबल को मेले में लेकर पहुंचे एडवोकेट कपिल जगत ने बताया कि गुजरात के अहमदाबाद के व्यापारी शेरू खान ने उनके घोड़े को खरीदने के लिए 1 करोड़ रुपए का ऑफर दिया था, लेकिन मैंने इसे ठुकरा दिया। हनुमानजी की कृपा से मिला कपिल जगत ने बताया कि मैं हनुमानजी को बहुत मानता हूं। उनकी कृपा से ही मुझे यह घोड़ा मिला है। हनुमानजी को उनके बल और शक्ति के कारण अतुलित बलधामा कहा जाता है। उनके इस नाम को मिलाकर मैंने अपने घोड़े का नाम अतिबल रख दिया है। 29 करोड़ के भारत रत्न का बेटा कपिल जगत ने बताया कि अतिबल की मां गौरी शुद्ध देसी मारवाड़ी नस्ल की घोड़ी है। उसकी मां भी उनके फॉर्म पर ही है। अतिबल दुनिया के सबसे महंगे टॉप के घोड़े भारत रत्न का बेटा है। इस टॉप क्लास घोड़े की कीमत 29 करोड़ रुपए है। मैंने अपने बच्चे की तरह अतिबल को पाला है। अतिबल की डाइट अलग-अलग कपिल जगत ने बताया कि अतिबल को गर्मी और सर्दी के मौसम के मुताबिक डाइट दी जाती है। सर्दी में अतिबल को 3 किलो बाजरा तो खिलाया ही जाता है। साथ में 2 किलो चने उबाल कर देते हैं। चने की खुराक तो पूरा साल ही चलती है, गर्मी में डाइट बदलनी पड़ती है। गर्मी में उसे उबले जौ और जेवी ओट्स देते हैं। हर रोज खा रहा देसी घी की चूरी अतिबल हर रोज देसी घी की चूरी भी खा रहा है। चूरी बनाने में गाय के घी का इस्तेमाल करते हैं। चूरी को 100-150 ग्राम घी में बनाया जाता है। चूरी में बादाम भी पिसकर मिलाए जाते हैं। साथ ही उसे हर रोज सुबह और शाम घास डाला जाता है, जबकि दोपहर को चरने के लिए उसे फॉर्म में खुला छोड़ते हैं। एक घंटा होती मालिश अतिबल के लिए एक केयर टेकर रखा हुआ है। केयर टेकर उसे हर रोज नहलाता है। नहलाने के बाद उसकी एक घंटे तक तेल से मालिश भी होती है। छुट्टी के दिन मैं खुद भी अतिबल की सेवा में समय लगाता हूं। मैं शाम को अतिबल को देखने के बाद ही घर आता हूं। पाकिस्तान से लाए थे घोड़े एडवोकेट कपिल ने बताया कि दादा-परदादा से ही उनको घोड़े रखने का शौक पड़ा। उनके परदादा चौ. फौजा राम पार्टीशन के टाइम पाकिस्तान से इंडिया आए थे। पाकिस्तान में उनके परदादा के पास उस समय काफी घोड़े थे। वे उन घोड़ों को लेकर गुहला-चीका आकर रहने लगे थे। 5वीं पीढ़ी रख रही घोड़े कपिल जगत ने बताया कि उनकी 5वीं पीढ़ी घोड़े पाल रही है। उनके दादा गुहला-चीका के पूर्व MLA चौ. दिल्लू राम भी अपने पास घोड़ा रखते हैं। उनके पास अतिबल के अलावा मारवाड़ी नस्ल के 4 और घोड़े हैं। इसके अलावा एक घोड़ी गौरी भी है।
कुरुक्षेत्र के मेले में आया 1 करोड़ का घोड़ा अतिबल:29 करोड़ के ‘भारत रत्न’ का बेटा है; डाइट मे देसी घी की चूरी, एक घंटा मालिश
