महराजगंज के एक निजी अस्पताल में ऐसे जुड़वां बच्चे का जन्म हुआ है, जिनके दो सिर हैं लेकिन उनका शरीर सीने और पेट से जुड़ा हुआ है। मां और नवजात पूरी तरह स्वस्थ हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, यह एक बेहद दुर्लभ मामला है। डेढ़ से दो लाख मामलों में ऐसे एक-दो ही केस सामने आते हैं। हालांकि, ज्यादातर मामलों में ऐसे बच्चे जीवित नहीं रह पाते। रविवार को जिला मुख्यालय से करीब 42 किलोमीटर दूर कोल्हुई के एक प्राइवेट अस्पताल में इन बच्चों का जन्म हुआ। 38 वर्षीय मां मंजू शर्मा बतावलपुर की रहने वाली है। पेट का हिस्सा दोनों बच्चों के बीच जुड़ा हुआ अपेक्स हॉस्पिटल के मेडिकल डायरेक्टर अरशद अंसारी ने बताया कि प्रसव कराने पहुंची मां मंजू शर्मा ग्रेविडा-4 थी, यानी यह उनकी चौथी प्रेग्नेंसी थी। अल्ट्रासाउंड में ट्विन प्रेग्नेंसी दिखाई दी। इसके बाद हमारी टीम ने सफल ऑपरेशन किया। मां और बच्चों की स्थिति पूरी तरह ठीक है। ऑपरेशन के दौरान यह पता चला कि बच्चे कंजॉइंट ट्विंस (Conjoined Twins) हैं। मेडिकल टर्म में इसका मतलब है कि बच्चे के सिर, हाथ और पैर अलग-अलग हैं, लेकिन पेट का हिस्सा दोनों बच्चों के बीच जुड़ा हुआ है। शुरुआत में माता-पिता बच्चों को सरकारी टीम को दिखाने को तैयार नहीं थे। लेकिन बाद में काउंसलिंग के बाद वे सहमत हो गए। सरकारी मेडिकल टीम भी बच्चों की निगरानी कर रही है। बच्चों को सर्जरी कर अलग करने के लिए भी मेडिकल एक्सपर्ट्स से सलाह दी जा रही। पिता ने सरकारी सहयोग की अपील की बच्चों के पिता सनोज शर्मा ने बताया कि मैं कर्मा चौराहा, बतावलपुर का रहने वाला हूं। आज मेरे बच्चे का जन्म हुआ है। वो जुड़वा हैं और पेट से जुड़े हैं। ऑपरेशन सफल रहा। मां-बच्चे दोनों स्वस्थ हैं। हम चाहते हैं कि सरकारी सहयोग और समर्थन मिले, ताकि बच्चों का सही तरीके से इलाज हो सके। दोनों लड़कियां हैं और उनका ऑपरेशन सुरक्षित ढंग से किया जाए। वह ऑटो चालक हैं और इसी से परिवार का जीवन यापन करते हैं। पहले से ही दो बेटियां और एक बेटा है। जुड़वा बच्चे जो पैदा हुए हैं, वे दोनों बेटियां हैं। डिलीवरी के समय महिला का वजन 107 किलो था। दोनों बच्चों का वजन 3.5 किलो है। डेढ़-दो लाख में एक केस, ज्यादातर बच नहीं पाते लखनऊ के मेडिकल कॉलेज की गायनाकोलॉजिस्ट सुजाता देव ने बताया कि बच्चे जुड़े हुए होने के कारण नार्मल डिलीवरी करवाना न के बराबर था। बच्चे सीने से जुड़े हुए हैं। बच्चों का वजन 3.50 किलो है। डेढ़-दो लाख में ऐसा एक केस सामने आता है। ऐसे मामलों में बच्चों के बचने का चांस काफी कम होता है। 34 हफ्ते से पहले बच्चों की डिलीवरी नहीं हो सकती है। दुनिया में कई ऐसे बच्चे जीवित भी हैं। कंजॉइंट ट्विंस के चार मामले ———————————————————— ये खबर भी पढ़ेंः- नोएडा के युवराज को सिस्टम ने मारा, 7 जिम्मेदार:16 जनवरी को नाले में डूब गए थे; SIT का सवाल- 2 घंटे तक क्यों नहीं निकाला नोएडा में 16 जनवरी की रात सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की पानी में डूबने से मौत हो गई थी। शासन की ओर से घटना को लेकर विशेष जांच दल (SIT) गठित की गई। SIT ने 22 से ज्यादा सवाल प्राधिकरण समेत तीन विभागों से पूछे। पढ़ें पूरी खबर…
2 सिर, 4 हाथ-पैर वाले बच्चे का हुआ जन्म:महराजगंज के प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी; डॉक्टर बोले- 2 लाख में एक केस आता
