बैठक के दौरान यीडा ने मेडिकल डिवाइस पार्क का अवलोकन प्रस्तुत करते हुए जापानी प्रतिनिधिमंडल को बताया कि यह पार्क 350 एकड़ में फैला है और इसकी परियोजना लागत 440 करोड़ है, जिसमें केंद्र सरकार की 100 करोड़ की सहायता भी शामिल है। लगभग 90 फीसदी बुनियादी ढाँचा पूरा हो चुका है और 101 चिकित्सा उपकरण कंपनियों को जमीन आवंटित की जा चुकी है। यह पार्क रेडियोलॉजी और इमेजिंग, कार्डियो-रेस्पिरेटरी डिवाइस, कैंसर केयर और रेडियोथेरेपी, इम्प्लांट्स और इन-विट्रो डायग्नोस्टिक्स जैसे प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों पर केंद्रित है।
जापानी प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से मात्र 5 किमी दूर स्थित, यह पार्क विश्वस्तरीय बुनियादी ढाँचा, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और आकर्षक प्रोत्साहन प्रदान करता हैै जिसमें पूंजीगत ब्याज सब्सिडी, एसजीएसटी प्रतिपूर्ति, ईपीएफ और रोजगार प्रोत्साहन, कौशल विकास सहायता और 100 फीसदी स्टाम्प शुल्क छूट शामिल हैं। बैठक के दौरान यीडा ने जापान के साथ गहरे औद्योगिक और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए हवाई अड्डे के पास 500 एकड़ में एक जापानी शहर बनाने की योजना की भी घोषणा की।
जापानी प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय कंपनियों के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, संयुक्त विनिर्माण और घटक विकास सहयोग में गहरी रुचि व्यक्त की। कृष बायोमेडिकल्स, पॉलीमेड, डेस्को, सायन मेडिकल्स और मेडिसिस जैसी आवंटियों ने अपने सकारात्मक अनुभव साझा किए और यीडा की रणनीतिक स्थिति और निवेशक-अनुकूल वातावरण पर जोर दिया। इस दौरान जापानी प्रतिनिधिमंडल ने कृष बायोमेडिकल्स के विनिर्माण संयंत्र का भी दौरा किया, जो चिकित्सा उपकरण पार्क आवंटियों में पहली पूर्ण इकाई है।
बैठक में भारत और जापान दोनों पक्षों द्वारा मेड इन इंडिया एंड जापान ढाँचे के अंतर्गत सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। जिसमें घरेलू और वैश्विक बाजारों, विशेष रूप से अफ्रीका और मध्य पूर्व, को लक्षित किया गया। यह पारस्परिक रूप से तय किया गया कि एमईजे जनवरी व फरवरी 2026 में संभावित साझेदारियों और निवेशों पर विस्तृत चर्चा के लिए जापानी मेडटेक फर्मों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल पार्क में लाएगा।
