उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेेनपर निशाना साधते हुए कहा कि क्या यह कार्रवाई कुछ चुनिंदा अधिकारियों और राजनीतिक सरगनाओं को बचाने के लिए की गई है।
उन्होंने कहा कि हमारी जानकारी के अनुसार, यह कदम सीधे-सीधे महत्वपूर्ण साक्ष्यों को मिटाने और आने वाले समय में ईडी या सीबीआई की एंट्री से पहले जमीन तैयार करने का प्रयास प्रतीत होता है। यानी भ्रष्टाचार और घोटालों के सबूतों को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि राज्य की जनता के हितों की रक्षा करें और सुनिश्चित करें कि एक भी साक्ष्य नष्ट न हो। जनता यह जानने का हक रखती है कि—किसे बचाने के लिए यह खेल खेला जा रहा है और किसके इशारे पर सबूत मिटाए जा रहे हैं। क्या किसी भी विभाग के काग़ज़ात बिना फ़ोटो स्टेट करवाये और विधिवत विस्तारपूर्वक ज़ब्ती सूची बनवाये बिना रात के अंधेरे में गुप-चुप तरीक़े से उठाकर ले जाने का प्रावधान है। क्या यह मुख्यमंत्री की जानकारी और सहमति से हुआ है या नहीं।
उन्होंने कहा कि अख़बारों से यह भी पता चला कि पहले भी एसीबी वाले कुछ ऐसे फ़ाइल उठाकर ले गये हैं जिसके चलते अभी शराब दुकानों के अगले आवंटन में मुश्किल हो रही है और इस वजह से राजस्व की हानि संभावित है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से इस गंभीर मामले का संज्ञान लेने को कहा। बाबूलाल ने कहा कि इतिहास गवाह है कि चाहे चोर कितना भी चालाक और शातिर क्यों न हो, अंततः कोई न कोई सुराग ज़रूर छोड़ जाता है। यही सुराग एक दिन पूरे खेल को बेनकाब करेंगे।
