अदालत ने आज हुई सुनवाई में जनहित याचिका की गंभीरता परखने के लिए याचिकाकर्ता से उनके सामाजिक कार्यों और पृष्ठभूमि का विवरण पेश करने को कहा है। अदालत ने याचिका लगाने वाले से पूछा कि, आप 80 साल के हैं, आपने कितने सामाजिक कार्य अपने जीवन में किए हैं। उच्च न्यायालय ने उनके वकील से उनके द्वारा किए गए सामाजिक कार्य का डेटा प्रस्तुत करने को कहा है। डेटा प्रस्तुत करने के लिये मंगलवार तक का समय हाईकोर्ट ने दिया है। साथ ही राज्य शासन को भी इस मामले में पक्ष रखने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी।
उल्लेखनीय कि बीते 20 अगस्त को छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया है, जिसमें गजेंद्र यादव, गुरु खुशवंत साहेब और राजेश अग्रवाल को शामिल किया गया. मंत्रिपरिषद में अब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित कुल 14 सदस्य हो गये हैं।
याचिकाकर्ता का कहना कि मंत्रियों की संख्या विधानसभा में कुल सीटों के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। छत्तीसगढ़ विधानसभा की 90 सीटों के हिसाब से यह संख्या अधिकतम 13.50 यानी 13 मंत्री होनी चाहिए।लेकिन 20 अगस्त को तीन नए मंत्री बनाए जाने के बाद कैबिनेट में अब 14 सदस्य हो गए हैं, जो इस सीमा से अधिक है।कांग्रेस का कहना है कि यह संविधान के अनुच्छेद 164 (1 क) का उल्लंघन है।जबकि भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताया है, और मंत्रियों की संख्या को लेकर हरियाणा में लागू फार्मूले का उदाहरण पेश किया है ।
