दरअसल, दिल्ली मेट्रो ब्लू लाइन पर सेक्टर 52 मेट्राे स्टेशन के पास से ही नाेएडा मेट्राे की अक्वा लाइन का स्टेशन सेक्टर 51 है। अभी यहां मेट्राे बदलने के लिए यात्रियाें काे उतर कर चलना पड़ता है। इन दाेनाें मेट्राे स्टेशनाें काे आपस में जाेड़ने के लिए एक एविलेटिड स्काईवाॅक बनाया जा रहा है। इसे बनाने काकार्य जून वर्ष 2023 में शुरू हुआ था और अब तक सात डेडलाइन घाेषित होने और नोएडा प्राधिकरण के कई दावों के बाद भी अभी तक शुरू नहीं हाे पाया है।
नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी महेंद्र प्रसाद ने बताया कि परियोजना की समीक्षा कर काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही मौके का निरीक्षण भी किया जाएगा। नोएडा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार परियोजना में 85 प्रतिशत काम पूरा होने के बाद अब विद्युत यांत्रिक और तकनीकी काम शुरू हो गया है।
उल्लेखनीय है कि मेट्रो की ब्लू लाइन के सेक्टर-52 और एक्वा लाइन के सेक्टर-51 मेट्रो स्टेशन के बीच 430 मीटर के स्काईवॉक पर यात्रियों को अब पैदल भी चलना होगा। इस स्काईवाॅक पर मोड़ और प्रवेश बिंदु के चलते तकनीकी तौर पर बदलाव किए गए हैं। अब 430 मीटर के इस स्काईवॉक में 260 मीटर में ही ट्रैवलेटर लगेंगे। शेष यानी लोगों को 170 मीटर लाेगाें काे पैदल चलना होगा। पहले इस स्काईवाॅक पर 430 मीटर ट्रैवलेटर लगेंगे। दोनों मेट्रो स्टेशन की दिशा में ट्रैवलेटर अलग-अलग और किनारों पर मिलेंगे। इनके बीच अगर कोई यात्री पैदल निकलना चाहता है तो उसके लिए भी जगह छोड़ी जा रही है। ट्रैवलेटर से उतर कर 170 मीटर पैदल चलना होगा। पूरा स्काईवॉक वातानुकूलित रहेगा। बीच में तीन जगहों पर आपातकालीन निकास का विकल्प रखा गया है। यह स्काईवॉक अब तक के बने सभी एफओबी और स्काईवॉक में सबसे ज्यादा हाईटेक होगा। स्काईवॉक में सिविल से जुड़े काम करीब 15 करोड़ 10 लाख रुपये की लागत से होने हैं। विद्युत यांत्रिक विभाग से 15 करोड़ 90 लाख रुपये से होने प्रस्तावित हैं।
