विधानसभा के मॉनसून सत्र के पहले दिन नाचन के विधायक विनोद कुमार के सवाल के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री ने ये जानकारी सदन के पटल पर रखी।
मुख्यमंत्री ने जवाब में कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया विभागों या बोर्डों द्वारा नहीं बल्कि कंपनियों और ठेकेदारों के माध्यम से टेंडर प्रणाली से होती है। चयनित कंपनियां अपनी आवश्यकता के अनुसार श्रमशक्ति उपलब्ध कराती हैं और कर्मचारियों को संबंधित विभागों में तैनात करती हैं।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों में हटाए गए कर्मचारियों का ब्यौरा भी सदन में रखा गया। कृषि विभाग से 1, वन विभाग से 6, तकनीकी शिक्षा विभाग से 1, कुल्लू जिला परिषद से 1, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो से 1, श्रम एवं रोजगार विभाग से 18, बहुउद्देश्यीय परियोजनाएं एवं विद्युत विभाग से 5 और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग से सबसे अधिक 910 आउटसोर्स कर्मचारियों को हटाया गया है।
इस तरह प्रदेश में कुल 943 आउटसोर्स कर्मचारी अब तक विभिन्न विभागों से हटाए या बदले जा चुके हैं।
