राम मंदिर ट्रस्ट में होगा बड़ा फेरबदल:जिम्मेदारियां लिखित में तय होंगी; चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की बदलेगी भूमिका

Spread the love

अयोध्या राम मंदिर के मैनेजमेंट में बड़ा बदलाव हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, चढ़ावा गिनने, मंदिर संपत्तियों के रख-रखाव और दर्शन व्यवस्था को नए सिरे से तैयार किया जाएगा। ट्रस्ट और मंदिर के संचालन के लिए अनुभवी अफसरों और संघ से जुड़े लोगों को तैनात किया जा सकता है। चढ़ावा चोरी की घटना के बाद ये प्लानिंग की जा रही है। इसी बीच यह भी सामने आया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बने ट्रस्ट में अब तक न तो ट्रस्टियों की लिखित जिम्मेदारी तय है और न ही कामकाज का कोई आधिकारिक बंटवारा किया गया है। अनुभवी लोगों के हाथ आएगी कमान सूत्रों के मुताबिक, मंदिर का मैनेजमेंट संभालने के लिए एक नया स्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इसमें तैनात हर अफसर और कर्मचारी की जिम्मेदारी लिखित रूप में तय होगी। मैनेजमेंट टीम की हैरार्की बनाई जाएगी यानी किस अधिकारी के पास कौन-सी जिम्मेदारी होगी, कौन किसे रिपोर्ट करेगा और जवाबदेह कौन होगा, यह लिखित रूप से तय किया जाएगा। सिर्फ कर्मचारियों की ही नहीं, ट्रस्ट के हर सदस्य और पदेन सदस्य की भूमिका भी लिखित रूप से तय होगी। चढ़ावा गिनने और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन का काम किसी एक व्यक्ति के भरोसे नहीं रहेगा। इसमें कई लोगों की भागीदारी तय की जाएगी। जिससे आगे किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। SIT की रिपोर्ट के बाद बनेगी SOP मंदिर ट्रस्ट के सूत्रों का कहना है कि SIT की जांच रिपोर्ट आने के बाद मंदिर मैनेजमेंट, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और संपत्तियों की रक्षा के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाया जाएगा। इसमें किसी एक व्यक्ति को सारे अधिकारी देने के बजाय जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा होगा। SOP तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मंदिर में करीब 1500 लोग काम करते हैं। इनमें बड़ी संख्या RSS के स्वयंसेवकों की है। उन्हें मंदिर की ओर से वेतन मिलता है, लेकिन उनकी लिखित जवाबदेही तय नहीं है। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और ट्रस्ट के पदेन सदस्य नृपेंद्र मिश्रा ने खुद इस स्थिति को स्वीकार किया है। चंपत राय, गोपाल और अनिल मिश्रा हटेंगे सूत्रों का कहना है कि चढ़ावा राशि को लेकर उठे सवालों के बाद संघ के बड़े पदाधिकारी भी सक्रिय हैं। संघ SIT रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। इसके बाद संबंधित लोगों की जवाबदेही तय की जा सकती है। ट्रस्ट के प्रमुख चेहरों में शामिल चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को हटाया जा सकता है। या फिर उनकी भूमिकाएं बदली जा सकती हैं। इनकी जगह कुछ नए चेहरों को ट्रस्ट और प्रबंधन व्यवस्था में शामिल किया जा सकता है। वहीं, संघ के कुछ पदाधिकारी मानते हैं कि गोपाल राव ने लंबे समय तक मंदिर की सेवा की है। उनकी निष्ठा पर कोई सवाल नहीं है। इसलिए कोशिश रहेगी कि यह संदेश न जाए कि उन्हें किसी फाइनेंशियल गड़बड़ी या गबन के चलते हटाया गया है। नृपेंद्र मिश्रा ने उठाए मैनेजमेंट पर सवाल मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और ट्रस्ट के पदेन सदस्य नृपेंद्र मिश्रा ने भी मंदिर मैनेजमेंट पर सवाल उठाए हैं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के सदस्यों की कोई अकाउंटेबिलिटी तय नहीं है। न ही उनके बीच डिस्ट्रिब्यूशन ऑफ वर्क है। हालांकि ट्रस्ट महासचिव चंपत राय को क्लीनचिट देते हुए उन्हें निष्ठावान और मंदिर के प्रति समर्पित बताया। नृपेंद्र मिश्रा ट्रस्ट के सबसे सक्रिय पदेन सदस्यों में रहे हैं। उनके बयान के बाद चर्चा शुरू हो गई है कि अगर व्यवस्थाओं में इतनी कमियां थीं, तो ये पहले क्यों सामने नहीं आईं? इस सवाल पर दैनिक भास्कर ने उनसे बात की, तो उन्होंने SIT रिपोर्ट आने से पहले कुछ भी कहने से इनकार किया। वैष्णोदेवी श्राइन की तर्ज पर बोर्ड बनाने के आसार सूत्रों के मुताबिक, मंदिर मैनेजमेंट और फाइनेंशियल प्लानिंग में कमियां उजागर होती ही ब्यूरोक्रेसी भी एक्टिव हो गई है। रिटायर्ड और मौजूदा अफसर चाहते हैं कि मंदिर में किसी रिटायर्ड या मौजूदा IAS अधिकारी को सीईओ बनाया जाए। उनकी देख-रेख में मंदिर मैनेजमेंट के लिए एक अलग ऑफिस बने। इसके लिए वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड का उदाहरण भी दिया जा रहा है। ऐसा करने से मंदिर की कमान सीधे तौर पर सरकार और ब्यूरोक्रेसी के हाथ आ जाएगी। ————————– ये खबर भी पढ़ें… अयोध्या में SIT ने पूछा- हार, चरण पादुका किसे दी, महंत बोले- टिन्नू को दिए; चांदी की ईंट देने वाले कारोबारी ने सच्चाई बताई अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT अब ऐसे दानदाताओं से संपर्क कर रही है, जिन्होंने मंदिर ट्रस्ट के किसी कर्मचारी को जेवर सौंपे थे। SIT अपनी रिपोर्ट में ये फैक्ट शामिल करेगी कि कब और किसके हाथों में जेवर सौंपे गए। कोई रसीद दी गई थी या नहीं। पूरी रिपोर्ट पढ़िए…