अयोध्या के राम मंदिर के दानपात्रों से चढ़ावे की चोरी ने सबको चौंका दिया है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, यह चोरी 200 करोड़ रुपए से ज्यादा की हो सकती है। नोटों की गिनती से जुड़े करीब 50 कर्मचारी संदेह के घेरे में हैं। पुलिस और जांच एजेंसियों ने अब तक 5 कर्मचारियों से करीब 2 करोड़ रुपए की नकदी, एक कार और 3 आईफोन बरामद किए हैं। 4 दिन पहले दिल्ली से एक IPS अफसर अयोध्या पहुंचे। उन्हें एक स्पेशल विमान लेकर आया था। वह भी श्रीराम जन्मभूमि परिसर में ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ बातचीत करके रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। वहीं, इसकी जांच के लिए शासन ने एक विशेष जांच समिति (SIT) का गठन कर दिया है। SIT 15 दिन में अपनी रिपोर्ट देगी। चोरी कैसे सामने आई, ये जानिए रामलला के गर्भगृह और दर्शन पथ के पास रखे दानपात्रों से जो भी नकदी निकाली जाती है, उसे राम जन्मभूमि परिसर के अंदर ही बने एक ‘गोपनीय कक्ष’ में ले जाया जाता है। सुरक्षा कारणों से इस कमरे की सटीक स्थिति को बेहद गुप्त रखा जाता है। इस कमरे में बाहरी लोगों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित होता है। चढ़ावे की गिनती के लिए कुल 50 कर्मचारियों की मौजूदगी इस कमरे में रहती थी। ये कर्मचारी 3 तरह के हैं- 1. 24 कर्मचारी: नोट गिनकर उनके बंडल बनाते हैं। ये कर्मचारी प्राइवेट एजेंसी के जरिए ट्रस्ट ने रखे हैं। 2. 12 कर्मचारी: ये ट्रस्ट के हैं, जो इन 24 कर्मचारियों पर नजर रखते हैं। यानी 1 कर्मचारी के हिस्से में निगरानी के लिए 2 कर्मचारी थे। 3. 14 कर्मचारी : इनमें SBI के कर्मचारी और TCS की ऑडिट टीमों के सदस्य होते हैं। एजेंसी की तरफ से रखे गए कर्मचारियों में ज्यादातर को हर महीने 14,500 रुपए वेतन मिलता है। ट्रस्ट के साथ जुड़े कर्मचारियों में कुछ ऐसे हैं, जो बिना वेतन सेवा देते हैं। पूरे मामले की शुरुआत, तब हुई जब इन कर्मचारियों में शामिल अनुकल्प मिश्रा, लवकुश , राजेश पाठक, रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव, केडी तिवारी, मनीष यादव, करुण, रितिक सिंह, श्रीवास्तव और मौर्य पिछले 5 साल में करोड़पति हो गए। इनकी लाइफस्टाइल बदल गई। महंगी गाड़ियां और जमीनें खरीद लीं। जो कर्मचारी सिर्फ वेतन पर गुजर बसर कर रहे थे, ये लोग उनके निशाने पर आ गए। जब मंदिर प्रशासन में उनकी सुनवाई नहीं हुई, तो रामकोट मोहल्ले के एक कर्मचारी ने इस चोरी की चर्चा को सार्वजनिक कर दिया। ये बात अयोध्या की गलियों से होते हुए अखिलेश यादव तक पहुंच गई। अब ये देशभर की सुर्खियों में छा गया है। जांच के दायरे में ये लोग आए टिन्नू यादव: चंपत राय के सहयोगी की 50 करोड़ की संपत्ति श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के सहयोगी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की अयोध्या और लखनऊ में करीब 50 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियां सामने आई हैं। टिन्नू अयोध्या में ऑटो चलाता था। खुद एक मोटर साइकिल से चलता था। उसका पुश्तैनी मकान राम मंदिर से 1.5 किमी दूर स्वर्गद्वार इलाके में है। जहां इस वक्त उनके भाई रहते हैं। यहां बातचीत में सामने आया कि टिन्नू का एयरपोर्ट के पास हॉस्टल है, जिसमें 70 कमरे हैं। अयोध्या के अलग-अलग 3 रेस्टोरेंट में उसकी पार्टनरशिप है। लखनऊ में एक मकान है, यहां एक फॉर्च्यूनर कार है। नाका इलाके में भी 2 मंजिला मकान है, जिसमें हॉस्टल बनाया हुआ है। टिन्नू से मंदिर परिसर के ही PCF यात्री सुविधा केंद्र में पूछताछ हुई है। मनीष यादव: टिन्नू यादव के भतीजे से 36 लाख कैश मिला श्री राम जन्मभूमि परिसर के अंदर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके टिन्नू यादव ने अपने भतीजे मनीष यादव की नियुक्ति करवा दी। वह भी रुपयों की गणना के काम से जुड़ा हुआ था। मनीष स्वर्गद्वार इलाके के पुश्तैनी घर में रहता है। चोरी खुलकर सामने आने के बाद मनीष को भी मंदिर परिसर के ही PCF यात्री सुविधा केंद्र में रखा गया है। चर्चा है कि उसकी बताई जगह से 36 लाख रुपए कैश मिला है। केडी तिवारी: दान में आए सोने के जेवर संभालने की जिम्मेदारी राम मंदिर में दान में चढ़ने वाले सोने-चांदी के जेवरों को संभालने की जिम्मेदारी केडी तिवारी की है। वह भी संदेह के घेरे में हैं। PCF यात्री सुविधा केंद्र में ट्रस्ट के सदस्यों के सवालों के जवाब दे चुके हैं। इन्होंने 1.5 करोड़ रुपए की जमीन खरीदी है, ये जांच के केंद्र में है। आरोप ये भी है कि केडी तिवारी ने 5 करोड़ रुपए की संपत्ति जुटाई है। वह अयोध्या के गौरन का पुरवा के रहने वाले हैं। इस मामले में कहते हैं- मेरी जिम्मेदारी मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के दान किए गए सोने-चांदी के गहनों को तौलकर दानदाता को रसीद देने की थी। फिर उन गहनों को ट्रस्ट के जिम्मेदार अधिकारियों तक सुरक्षित पहुंचा देता था। इसके आगे गहनों के साथ क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा- मैं विद्या भारती के सरस्वती शिशु मंदिर में कई जिलों में टीचर रहा। मेरा बड़ा बेटा भारतीय वायुसेना में अधिकारी पद से रिटायर होने के बाद वर्तमान में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में है। दूसरा बेटा सेना से रिटायर होकर यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर है। सबसे छोटा बेटा मिल्कीपुर में कंप्यूटर ऑपरेटर है, जबकि बेटी टीचर है। मेरे पास जो कुछ है, वो परिवार का है। राजेश पाठक: 5 से 6 साल में राजेश की जीवनशैली बदली
अयोध्या के खाले पुरवा में रहने वाले राजेश पाठक पर भी संदेह है। राजेश नोटों की गिनती करने वाले कर्मचारियों में शामिल है। वह भी मंदिर परिसर के एक कमरे में रखे गए हैं। जांच में जुटे ट्रस्ट कर्मचारियों ने उनसे सवाल पूछे हैं। राजेश की पिछली 5-6 सालों में बदली जीवनशैली जांच के घेरे में है। इनसे क्या रिकवर हुआ? कुल कितने रुपए की संपत्तियां सामने आईं? यह अभी सामने नहीं आया है। अनुकल्प मिश्रा: गांव में फॉर्म हाउस, अयोध्या में 65 लाख का घर खरीदा मंदिर से चढ़ावे की चोरी में लवकुश नाम का शख्स भी आरोपी है। उसका साला अनुकल्प मिश्रा भी नोट गिनने वाली टीम का हिस्सा था। सूत्रों के मुताबिक, कौशलपुरी में मानस डेंटल हॉस्पिटल के पास एक घर है। यह घर पहले भोजपुरी गायक का था। उसे अनुकल्प मिश्रा के परिवार ने 64 से 65 लाख रुपए में खरीदा था। इसके बाद परिवार वहीं रहने लगा। वहीं, अनुकल्प के पैतृक गांव में उसके मकान से लगभग 300 मीटर की दूरी पर एक फार्म हाउस भी बनाया गया है। इसी जगह पर 23 से 30 अप्रैल, 2026 तक श्रीमद्भागवत कथा हुई थी। अनुकल्प ने भागवत कथा और शादी में अपने वैभव का प्रदर्शन कर साड़ियां बांटीं। उसके पिता रविंद्र मिश्रा प्रॉपर्टी डीलर हैं। अनुकल्प परिवार के साथ अयोध्या के कौशलपुरी में रहता है। लवकुश: एक वक्त पर कार मैकेनिक, मंदिर में नौकरी के बाद फैजाबाद में घर बनवा रहा लवकुश पहले कार मैकेनिक था। अयोध्या के रुदौली क्षेत्र के मीनापुर ठकुरान फगौली गांव का रहने वाला है। मंदिर में नौकरी मिलने के बाद उसकी आर्थिक स्थिति तेजी से बदली थी। गांव आने पर वह खूब पैसे खर्च करता है। एक बार उसने गांववालों को शराब पिलाने के लिए ठेके पर 50 हजार रुपए खर्च कर दिए थे। लवकुश के पिता बच्चूलाल गाजियाबाद की लोहा मंडी में काम करते हैं। लवकुश के घर भी ट्रस्ट के लोग पहुंचे थे। कुछ रुपए घर की आलमारी-बक्से में रखे थे, कुछ रुपए उसने गोबर में दबाकर छिपाए थे। इस दौरान 10 लाख रुपए बरामद हुए। उसका एक मकान फैजाबाद में बन रहा है। वो भी जांच के घेरे में है। IPS अधिकारी सीधे केंद्र सरकार को रिपोर्ट कर रहे सोर्स के अनुसार, पूरे मामले की देशभर में चर्चा है। इसलिए केंद्र सरकार ने एक IPS अधिकारी को 4 दिन पहले अयोध्या भेजा था। एक स्पेशल विमान उन्हें लेकर आया था। चर्चा है कि इन अधिकारी की देख-रेख में जांच चल रही है। ये केंद्र सरकार को सीधे रिपोर्ट कर रहे हैं। इन 3 अफसरों को क्यों शामिल किया गया- SIT में लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत (IAS), किरन एस. (IPS, आईजी रेंज) और नीलरतन (विशेष सचिव, वित्त) को शामिल किया गया है। किरन एस. सीबीआई में डीआईजी रह चुके हैं। यानी वित्त, कानून के एक्सपर्ट को कमिश्नर लीड करेंगे। विजय विश्वास पंत: IIT कानपुर से बी.टेक पास हैं। अभी लखनऊ के मंडलायुक्त हैं। SIT की अध्यक्षता करेंगे। चढ़ावे और दान की व्यवस्था को समझेंगे। बेहतर करने के सुझाव देंगे। किरन एस: अपराध की जांच का लंबा अनुभव है। चढ़ावा चोरी के आरोपों की तह तक जाएंगे। यानी, पुलिस के एंगल से जांच संभालेंगे। नीलरतन: वित्त विभाग में विशेष सचिव हैं। यह मंदिर के ऑडिट, दान और वित्तीय लेन-देन का निरीक्षण करके रिपोर्ट तैयार करेंगे। हालांकि, जांच को लेकर अयोध्या के संत आश्वस्त नहीं हैं। पहले चर्चा थी कि इस घोटाले की जांच समिति में रिटायर्ड जज शामिल होंगे, लेकिन शासन की बनी विशेष समिति में ऐसा नहीं हुआ। शासन के मुताबिक, इस समिति का गठन खुद तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर ही किया गया है। संत कहते हैं- मंदिर निर्माण समिति की बैठक के लिए पहुंचे अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने इस विवाद से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कहा कि उन्हें ट्रस्ट के आंतरिक कार्यों से कोई मतलब नहीं है, वह केवल निर्माण कार्यों से संबद्ध हैं।
————————— ये खबरें भी पढ़िए- ऑटो ड्राइवर ने राम मंदिर मैनेजमेंट में कैसे ली एंट्री, टिन्नू यादव पर चढ़ावे की चोरी के आरोप; 28 साल पहले चंपत राय से जुड़ा था अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के बाद देशभर में टिन्नू यादव सुर्खियों में है। कहने को टिन्नू ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के खास सहयोगी है, लेकिन श्रीराम मंदिर ट्रस्ट में वह बहुत पावरफुल बताया जाता है। चाहे सिक्योरिटी का मैनेजमेंट हो या चढ़ावे को बैंक में डिपॉजिट कराना हो, टिन्नू ही सब कुछ मैनेज करता आया है। पढ़िए पूरी खबर… राम मंदिर ट्रस्ट ने योगी से कहा-SIT गठित करें, चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारी के घर से 10 लाख मिले, गोबर में दबाए था अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे के 7 करोड़ रुपए की चोरी के दावे का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, मंदिर ट्रस्ट ने शनिवार को सीएम योगी से चोरी के दावे की जांच SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) से कराने की मांग की है। इधर, मंदिर के कर्मचारी लवकुश मिश्रा (27) के घर से 10 लाख रुपए बरामद हुए हैं। उसने पैसे गोबर में दबाकर छिपाए थे। हालांकि, ये रुपए किसके हैं? इसके बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है। पढ़िए पूरी खबर… ‘राम मंदिर ट्रस्ट में धर्माचार्य रहते तो गड़बड़ी नहीं होती’, शंकराचार्य बोले- चंपत राय ईमानदार नहीं, दान का एक-एक पैसा भगवान का ‘राम मंदिर के दान पर सबसे ज्यादा सवाल उठने चाहिए। दान का एक-एक पैसा भगवान का पैसा होता है। सनातन धर्म में देवस्व (चढ़ावा) को अत्यंत पवित्र माना गया है। अगर उस पैसे के उपयोग को लेकर सवाल हैं, तो जवाब भी होना चाहिए और जांच भी होनी चाहिए। चंपत राय ईमानदार नहीं हैं। पहले से एक ट्रस्ट मौजूद था, जिसमें चार शंकराचार्य, पांच वैष्णवाचार्य और 13 अखाड़ों के प्रमुख थे। जब वह ट्रस्ट था, तो नया ट्रस्ट बनाने की क्या जरूरत थी? अगर शंकराचार्य और धर्माचार्य ट्रस्ट में रहते, तो कोई गड़बड़ी नहीं कर पाता।’ पढ़िए पूरी खबर.…
राम मंदिर से क्या 200 करोड़ का चढ़ावा चोरी हुआ:50 कर्मचारी रडार पर, कई 5 साल में करोड़पति हुए; अब तक 2 करोड़ कैश मिला
