सपा 2027 में लोकसभा वाला फॉर्मूला दोहराएगी:सामान्य सीटों पर SC उम्मीदवार उतारेगी; नहीं काटेगी विधायकों के टिकट

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यूपी विधानसभा चुनाव 2027 जल्द कराए जाने की सुगबुगाहट के बीच सपा ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सपा ने उम्मीदवारों की एक लिस्ट तैयार कर ली है। दूसरी पर काम चल रहा है। पहली लिस्ट मौजूदा विधायकों की है, जिनमें ज्यादातर के टिकट रिपीट किए हैं। दूसरी लिस्ट पर मंथन चल रहा है। इसमें सामान्य सीटों पर दलित उम्मीदवार उतारे जाने की चर्चा है। सुरक्षित सीटों को लेकर भी सपा इस बार ज्यादा अलर्ट है। सपा आखिर कैसी रणनीति बना रही है? इस रिपोर्ट में पढ़िए… अपनाया जाएगा लोकसभा चुनाव का फॉर्मूला सपा की निगाह PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वोटों पर है। इसमें भी दलित वोटबैंक पर खास फोकस है। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा इसी वोटबैंक के बूते 5 से बढ़कर 37 सीटों पर पहुंंची थी। सपा को 2024 में मिले वोटों को अगर विधानसभा सीट वाइज देखें, तो 184 सीटों पर बढ़त हासिल की थी। लोकसभा चुनाव में सपा ने नया प्रयोग करते हुए 2 सामान्य सीटों पर अनुसूचित जाति (SC) के कैंडिडेट उतारे थे। इसमें फैजाबाद से अवधेश प्रसाद और मेरठ से सुनीता वर्मा को टिकट मिला था। नतीजा यह हुआ कि अयोध्या में राममंदिर बनने के बावजूद भाजपा फैजाबाद सीट हार गई। अवधेश प्रसाद ने 50 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की। इसी तरह मेरठ में भी काफी करीबी मुकाबला रहा। पर्दे के राम अरुण गोविल मात्र 10 हजार वोट से चुनाव जीत पाए थे। मेरठ की 5 विधानसभा सीटों में से 4 पर भाजपा पीछे रही थी। अगर सपा 2027 में भी इस वोटबैंक में वो सेंध लगाने में कामयाब रहती है, तो उसकी सत्ता में वापसी की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। बसपा के वोटबैंक पर सपा की निगाह वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र कुमार कहते हैं- 2024 के लोकसभा चुनाव में अयोध्या सीट पर मिली कामयाबी के फॉर्मूले को सपा विधानसभा चुनाव में भी आजमाएगी। पार्टी 40 से 50 सामान्य सीटों पर दलित उम्मीदवार उतार सकती है। इनमें ज्यादातर सीटें पश्चिमी यूपी की होंगी। यहां सपा, बसपा और चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी के दलित वोटबैंक को अपने पक्ष में लेना चाहती है। यह वोटबैंक पहले बसपा का था, लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद से बंट गया। सुरक्षित सीटों पर जीत बनाती है सरकार यूपी में विधानसभा की 86 सुरक्षित सीटें हैं। इनमें SC के लिए 84 और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 2 सीटें रिजर्व हैं। लोकसभा चुनाव में प्रदेश में 17 सीटें SC के लिए सुरक्षित हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में सपा ने इनमें से 7 सीटें जीती थीं। एक सीट कांग्रेस के खाते में गई थी। यूपी का इतिहास कुछ ऐसा रहा है कि जो भी आधी से ज्यादा सुरक्षित सीटें जीतता है, वही यूपी में सरकार बनाता है। एक दर्जन नेता परिवार के लिए मांग रहे टिकट पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि सपा अपने मौजूदा विधायकों के टिकट नहीं काटेगी। बशर्ते वो पार्टी में मौजूद हों और अपने विधानसभा क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखते हों। सपा के पास मौजूदा समय में 102 विधायक हैं। कई विधायक और नेता ऐसे हैं, जो अपने परिवार के लोगों को टिकट दिलाना चाहते हैं। इनमें पूरब से लेकर पश्चिमी यूपी तक के नेता शामिल हैं। चुनाव परिवार के लोग लड़ेंगे या मौजूदा विधायक, यह अभी तय नहीं हुआ है। ऐसी सीटों की संख्या करीब 12 बताई जा रही है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… अखिलेश सिफारिश नहीं, सर्वे से चुनेंगे जिताऊ कैंडिडेट, रिटायर्ड IAS को जिम्मेदारी; कांग्रेस को 70-75 सीटें दे सकते हैं यूपी में समाजवादी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संभावित कैंडिडेट्स का सर्वे करवा रही है। टिकट के दावेदार जमीन पर कितने मजबूत हैं, इसको 2 तरह से जांचा जा रहा है। पहला- प्राइवेट एजेंसी से सर्वे करवाकर। दूसरा- लोकल लीडर के फीडबैक के आधार पर। सर्वे की मॉनिटरिंग खुद अखिलेश यादव कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़िए…