सुनवाई के दौरान मामले के पक्षकार हेमराज की ओर से अधिवक्ता प्रहलाद शर्मा ने अदालत को बताया कि यह मामला खंडपीठ में विचाराधीन है, लेकिन उसके बावजूद भी जेडीए बार-बार रोड का अलाइनमेंट बदलता है। जबकि रोड के मूल प्लान पर किसी को भी एतराज नहीं था। उन्होंने सोसायटी से भूखंड खरीदे थे और वे कई सालों से रह रहे हैं, लेकिन अलाइनमेंट बदलने के कारण उनके मकानों पर भी टूटने की तलवार लटक गई है। पिछली सुनवाई पर जेडीए ने कहा था कि जो रोड बननी है, उसमें कुछ हिस्सा जेडीए का है और कुछ हिस्सा हाउसिंग बोर्ड का है। इस रोड का साल 2018 में जोनल डवलपमेंट प्लान बना दिया था। वहीं यह भी तय कर दिया था कि जेडीए अपने हिस्से में 13 महीने व 6 दिन की अवधि में रोड बना देगा। इसके तहत ही वे रोड के लिए डिमार्केशन करने लगे हैं।
गौरतलब है कि इस रोड को लेकर जेडीए व हाउसिंग बोर्ड के अलग-अलग मत होने पर पूर्व में हाईकोर्ट ने प्रमुख यूडीएच सचिव को पेश होकर यह बताने के लिए कहा था कि इस 100 फीट रोड के निर्माण के लिए उनकी क्या कार्य योजना है।
