साइना नेहवाल बोलीं- मोबाइल से दूरी बनाएं बच्चे:बैडमिंटन का मौजूदा प्रदर्शन चिंताजनक, पंचकूला में शोरूम का उद्धाटन किया

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पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित एक शोरूम के उद्घाटन समारोह में रविवार को ओलिंपिक में पदक जीतने वाली भारत की पहली बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल बतौर मुख्य अतिथि पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने भारतीय बैडमिंटन के मौजूदा प्रदर्शन, युवा खिलाड़ियों, मोबाइल के बढ़ते प्रभाव और अपने करियर के संघर्षों को लेकर खुलकर बात की। साइना ने पंचकूला से जुड़ी अपनी पुरानी यादें ताजा करते हुए कहा कि, जब वह सिर्फ 13 साल की थीं, तब यहां एक टूर्नामेंट खेलने आई थीं और उसे जीतने में सफल रही थीं। उन्होंने बैडमिंटन को देश का दूसरा सबसे पसंदीदा खेल बताते हुए कहा कि सुपरस्टार बनने के पीछे कई वर्षों की लगातार मेहनत छिपी होती है। उन्होंने कहा, “सुपरस्टार बनना आसान नहीं होता। इसके पीछे कई सालों की मेहनत लगती है। मैंने लगातार 10 से 15 साल तक मेहनत की, तभी ये मुकाम हासिल कर पाई।” भारतीय बैडमिंटन में सुधार की जरूरत साइना ने भारतीय बैडमिंटन के मौजूदा प्रदर्शन पर चिंता जताते हुए कहा कि, पहले भारत को लगातार अच्छे परिणाम मिल रहे थे, लेकिन अब खेल में कुछ कमियां नजर आ रही हैं, जिन्हें सुधारने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि, 10 साल पहले जैसे रिजल्ट आ रहे थे, हम लगातार जीत रहे थे। अब जो गलतियां हो रही हैं उन्हें सुधारने की जरूरत है। खिलाड़ी अच्छा खेल रहे हैं लेकिन रिजल्ट और बेहतर आने चाहिए। बैडमिंटन लीग बढ़ाने की वकालत साइना ने कहा कि देश में बैडमिंटन को और आगे बढ़ाने के लिए ज्यादा लीग आयोजित की जानी चाहिए ताकि बच्चों का खेल के प्रति आकर्षण बना रहे। उन्होंने कहा, “मैं चाहती हूं कि बैडमिंटन में और लीग आएं ताकि बच्चों का इंटरेस्ट बना रहे और ज्यादा खिलाड़ी आगे निकलकर आएं।” मोबाइल से दूर रहें बच्चे आज की पीढ़ी में मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए साइना ने माता-पिता से बच्चों को खेल और फिटनेस के लिए प्रेरित करने की अपील की। उन्होंने कहा, “आजकल बहुत डिस्ट्रैक्शन हैं। मैं पेरेंट्स से कहूंगी कि बच्चों को मोबाइल कम दें, उन्हें रनिंग और एक्सरसाइज की आदत डालें। बच्चे आज ज्यादा फ्रैजाइल हो रहे हैं, उन्हें और मेहनत करनी होगी।” सफलता का श्रेय माता-पिता और कोच को अपने करियर की सफलता का श्रेय साइना ने अपने माता-पिता और कोच पुलेला गोपीचंद को दिया। उन्होंने कहा कि गोपीचंद खिलाड़ियों के लिए सुबह 3 बजे से रात 8 बजे तक स्टेडियम में मेहनत करते थे। साइना ने कहा, “हर बच्चे में एक साइना है। अगर मैं वर्ल्ड नंबर-1 बन सकती हूं तो हर बच्चा बन सकता है। मेरा सपना है कि मैं हमेशा बैडमिंटन से जुड़ी रहूं, चाहे कोचिंग के जरिए हो या मोटिवेशनल टॉक्स के जरिए।”