यूपी में मलिहाबाद के दशहरी आम की पैदावार पर आंधी-बारिश का असर पड़ा है। सिर्फ 40% पेड़ों पर ही आम आए हैं। इस साल पैदावार कम हुई, इसलिए बाजार में आम कुछ महंगा बिकेगा। किसान मानते हैं कि 50-60 रुपए किलो के भाव पर बिकने वाला आम इस सीजन 100-120 रुपए किलो तक मिलेगा। इस बार साइज भी पिछले सालों से थोड़ा छोटा रहने वाला है। किसान कहते हैं- यूं तो 12 मई से पेड़ों से आम तोड़े जाने लगे हैं, लेकिन ये उतने रसीले नहीं हैं। 1 से 10 जून के बीच में तोड़े जाने वाले आम का स्वाद रसीला और मीठा होगा। दशहरी आम की स्थिति इस बार कैसी होगी, ये संडे बिग स्टोरी में पढ़िए… रसीले आम को लेकर क्या कहते हैं किसान किसान बोले- विदेश नहीं, सिर्फ लोकल मंडी भेज सकेंगे दशहरी
मलिहाबाद इलाके के नबीनगर में हमारी मुलाकात कासिम रजा से हुई। 75 साल के कासिम के पास 20 बीघे में आम के बाग हैं। यहां करीब 50 साल से आम की पैदावार हो रही है। वह आम के पेड़ों की तरफ देखते हुए कहते हैं, ‘इस साल आम की फसल कम है। इस बाग में जो आम पैदा होते थे, उन्हें विदेश में एक्सपोर्ट कर देते थे। लेकिन, इस बार लखनऊ की लोकल मंडियों तक ही आम भेज सकेंगे।’ दरअसल, हर साल 500 टन से ज्यादा आम मलिहाबाद से एक्सपोर्ट होता है। मलिहाबादी दशहरी, जौहरी सफेदा और लखनउवा चौसा दुबई, जापान, अमेरिका से लेकर न्यूजीलैंड तक भेजा जाता है। लेकिन, आम के किसान पैदावार कम होने से परेशान हैं। वो अपने आम यूपी के मार्केट में ही बेचने की बात कहते हैं। आंधी-बारिश नहीं, फसल कम होने के कई कारण
इस बाग के पास ही रईस अहमद का बाग है। हम बाग के अंदर पेड़ों के बीच से गुजरे तो कई पेड़ ऐसे दिखे जिन पर आम आए ही नहीं थे। रईस बताते हैं, ‘हमारे वालिद आम की खेती करते थे। हम बचपन से ही इस काम से जुड़े हुए हैं। पिछले साल जो फसल मिली थी, उसकी तुलना में इस बार सिर्फ 40% फसल दिख रही है।’ ‘ये फसल आंधी-बारिश की वजह से कम नहीं हुई, बल्कि ऐसा रोटेशन में होता है। एक साल अच्छी फसल, तो दूसरे साल हल्की फसल मिलती है। कुछ किसान अपने पेड़ों पर कल्टार दवा डालते हैं। उनके पेड़ों से फसल ठीक मिल रही है, लेकिन ऐसी दवाएं पेड़ पर खराब असर डालती हैं।’ ‘गोल्डन मैंगो’ के लिए आमों पर लिफाफे बांधे
रईस के बाग में कई आमों को कवर किया गया था। एक पेड़ में करीब 100-100 लिफाफे लगाए गए थे। पूछने पर रईस कहते हैं, ‘जिन आमों को लिफाफे से पैक किया गया है, उनका रंग (पीलापन) बहुत अच्छा आएगा। बाजार में इस आम को ‘गोल्डन मैंगो’ कहा जाता है। ये एक लिफाफा 2.10 रुपए का आता है। एक किलो आम में लिफाफा बांधने का खर्च 20 रुपए आता है। 1 जून के आसपास जब हम आम तोड़ेंगे, तब ये 65 से 100 रुपए के बीच बिक सकेगा।’ 1 जून से जो आम टूटेगा, वो ज्यादा रसीला होगा
रईस कहते हैं, ‘दशहरी आम तो 12 मई से ही तोड़ा जाने लगा है। कार्बाइड (केमिकल) से पकाकर ये आम बाजार में भेजा जा रहा। किसान से अभी 25 से 30 रुपए किलो के भाव से आम खरीदा जा रहा है। हालांकि, बाजार में मांग ज्यादा होने की वजह से 80 से 100 रुपए के भाव से बिक रहा है। लेकिन अभी ये आम उतने रसीले और मीठे नहीं हैं। 1 जून के बाद पेड़ों से जो आम तोड़े जाएंगे, उनका स्वाद बहुत मीठा और रसीला होगा। फिर मानसून की बारिश शुरू होने यानी करीब 25 जून तक मार्केट में अच्छी क्वालिटी का आम मिलेगा।’ इस बार आम का साइज कैसा होगा किसान बोले- इस बार दशहरी का वजन कम होगा
किसान फैसल बाग में आम तोड़ते हुए दिखे। वह टूटे हुए आम दिखाते हुए कहते हैं, ‘इस साल जो आम आया है उसकी क्वालिटी बहुत अच्छी नहीं है। इस बार बड़े साइज के आम कम हैं। दशहरी आम औसतन 200 से 250 ग्राम का होता है। किंग साइज दशहरी 400 से 500 ग्राम तक का हो जाता है। इस बार 120 से 150 ग्राम वजन रहने की उम्मीद है।’ फैसल कहते हैं, ’कई किसानों के आमों में कटर रोग लग गया है। इससे आम के ऊपर दाग या फिर छेद नजर आने लगा है। जैसे ही ये आम पकेगा, फल सड़ जाएगा। इसलिए ज्यादातर किसान ऐसे आमों को जल्दी-जल्दी पेड़ से तोड़कर मार्केट में बेच रहे हैं।’ क्या दशहरी आम महंगा होने की उम्मीद है 30-40 रुपए में बिकने वाला आम, 80-100 रुपए के भाव पर मिलेगा
मोहम्मद सफी हर सीजन में किसानों से उनके बाग में पैदा होने वाले आमों को खरीदते हैं। वो किसानों को एकमुश्त पैसा देते हैं। वह बताते हैं, ‘25-26 सालों से आम का व्यापार कर रहा हूं। हर तीसरे साल यही होता है। फसल अपने-आप कम हो जाती है। रेट पर असर पड़ना तय है। पहले जो आम 30-40 रुपए में मिल जाता था, इस साल 80-100 रुपए तक बिकेगा।’ सफी कहते हैं, ’बाग में इस बार अच्छे आमों की पैकिंग की है। इससे आम एकदम साफ निकलेगा। अच्छी क्वालिटी का आम 80 से 100 रुपए तक बिक जाएगा। अभी झांसी से लेकर दिल्ली तक आम भेजे जा रहे हैं।’ कई बागों में सिर्फ 10% ही आम आए
किसान अब्बासी कहते हैं, ’हमारे बागों में पिछले साल के मुकाबले सिर्फ 10% फसल आई है। अभी जो आम टूट रहे हैं, मंडियों में उसका रेट 25-30 रुपए किलो मिल रहा है। आगे चलकर रेट बढ़ेगा, क्योंकि आम कम है। जिस बाग में खड़े होकर आप हमसे बात कर रहे हैं, यहां एक सीजन में 1 हजार कैरेट आम निकलता था। इस बार सिर्फ 50 कैरेट निकल रहा है। आम कम आया है, इसलिए पिछले साल के मुकाबले महंगा बिक सकता है।’ किसान बोले- आम कम, लेकिन हमारी लागत तो उतनी ही लगी
लखनऊ में सिर्फ मलिहाबाद में ही नहीं, माल और काकोरी इलाके में भी आम की अच्छी पैदावार होती है। काकोरी इलाके में हमारी मुलाकात किसान शत्रुघ्न से हुई। वो बाग में पानी लगाकर लेटे हुए थे। कहते हैं, ’हमारे पास 5-6 बीघे में बाग हैं। पिछले साल हमने आम बेचकर 5 लाख रुपए तक कमा लिए थे। इस साल 1 लाख रुपए मिलना भी मुश्किल है। पैदावार भले कम हो, लेकिन लागत वही है। पेड़ों पर दवा छिड़काव किया जा रहा है। इस बार फसल कम होने के पीछे सिर्फ आंधी वजह नहीं है।’ दशहरी की फसल खराब होने के वैज्ञानिक कारण जानिए वैज्ञानिक बोले- जब बौर आया, तभी बारिश हुई
आम की फसल कम होने की वैज्ञानिक वजह जानने के लिए हमारी टीम मलिहाबाद के रहमानखेड़ा में सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर (CISH) पहुंची। संस्थान के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. एच. एस. सिंह ने बताया, ‘इस बार सीजन की शुरुआत में पेड़ों पर बौर (फूल) बहुत अच्छे आए थे। बंपर पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन ठीक उसी समय मौसम ने दगा दे दिया।’ फ्लावरिंग के पीक पर कोहरा: जब पेड़ों पर फूल आने का सबसे मुख्य (पीक) समय था, तब लगातार दो दिन तक भारी कोहरा पड़ गया। हालत यह थी कि बौर से पानी टपक रहा था। 4 दिन बाद बेमौसम बारिश: कोहरे के ठीक चार दिन बाद अचानक तेज बारिश हो गई। आम की फ्लावरिंग के दौरान बौर पर पानी गिरना ‘जहर’ के बराबर होता है। चिपचिपा होकर सड़ गया बौर: पानी गिरने की वजह से बौर में नमी बैठ गई। वह चिपचिपा हो गया और फूल खराब हो गए। यही वजह है कि इस बार मलिहाबाद में 60% तक आम कम आ रहे हैं। मलिहाबाद में नुकसान, पर वेस्ट यूपी में चौसा-लंगड़ा की बंपर फसल
डॉ. एच. एस. सिंह ने एक दिलचस्प पहलू यह भी बताया कि मौसम का यह नुकसान पूरे यूपी में एक जैसा नहीं है। मलिहाबाद की फसल भले ही कम हुई हो, लेकिन मेरठ और अमरोहा की बेल्ट (पश्चिमी यूपी) में इस बार चौसा और लंगड़ा आम की बहुत शानदार फसल आई है। देश की कुल खपत का 25% आम यूपी से देश में पिछले साल करीब ढाई करोड़ टन आम का उत्पादन हुआ था। दुनिया में भारत पहले नंबर पर रहा। दूसरे नंबर पर इंडोनेशिया था। वहां 36 लाख टन आम का उत्पादन हुआ। भारत के ढाई करोड़ टन आम में करीब 58 लाख टन आम का उत्पादन यूपी में हुआ। इसमें भी करीब 30% आम मलिहाबाद, माल और काकोरी के इलाके से हुआ। लखनऊ से सिर्फ 30 किलोमीटर दूर हरदोई हाईवे पर मलिहाबाद का इलाका है। यहां 100 से ज्यादा बगीचे 46 हजार बीघा इलाके में फैले हैं। 2 हजार से ज्यादा परिवारों की पीढ़ियां 100 सालों से आम पैदा कर रही हैं। यूपी में सरकार ने कुल 4 पैक हाउस बनवाए हैं। ये सहारनपुर, अमरोहा, वाराणसी और लखनऊ में हैं। यहीं से यूपी का आम दूसरे देशों तक पहुंचता है। – विजुअल सपोर्ट. तुषार राय —————————– यह खबर भी पढ़ें – मलिहाबाद में आम के पेड़ों पर 40% ही बौर, ठंड ने लेट की फसल, किसान दवा छिड़क रहे; बोले- इस बार महंगा बिकेगा यूपी के मैंगोलैंड लखनऊ के मलिहाबाद में आम पेड़ों पर बौर आ चुके हैं। लेकिन किसान डरे हुए हैं, क्योंकि सिर्फ 40-50% पेड़ों ही बौर दिख रहे हैं। आम के पेड़ों पर बौर बढ़ाने के लिए दवा का छिड़काव किया जा रहा है। पिछले साल 15 मार्च तक बागों के 80% पेड़ बौर से लद गए थे। इसलिए पिछले साल आम की पैदावार अच्छी हुई थी। पढ़िए पूरी खबर…
मलिहाबादी आम आंधी-बारिश से 60% कम हुआ:इस बार ₹60 वाला ₹100-120 में मिलेगा; किसान बोले- देश के बाहर नहीं भेज पाएंगे
