ग्राउंड रिपोर्ट : केमिकल फैक्ट्री मामला: अंदर के हालात देख:बोले पिता, उम्मीद नहीं; 19 मई से बेटा लापता: 5 घंटे करवाया बाहर इंतजार

Spread the love

रेवाड़ी में बावल के सेक्टर-5 की GLS केमिकल इंक कंपनी में लगी भयंकर आग की लपटे आग बुझने के बाद भी महसूस की जा रही है। 19 मई को कंपनी में आग से झुलसे 6 कर्मचारियों में से यूपी निवासी 35 वर्षीय हरि बाबू की मौत हो चुकी है। जबकि चार अभी भी उपचाराधीन है। दो लापता कर्मचारियों का भी अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। आग पर 19 की रात करीब साढ़े 11 बजे काबू पा लिया गया था, परंतु बचाव कार्य अभी भी जारी है। भास्कर की टीम जब ग्राउंड रिपोर्ट करने बावल पहुंची। पहले 5 घंटे बाहर इंतजार करवाया। इसके बाद अंदर जाने की अनुमति तो मिली, परंतु एंट्री करते ही चंद कदम चलने के बाद सुरक्षा कारणों का हवाला देकर फिर रोक दिया। 1500 KM का सफर तय करें पहुंचे बेटे के लापता होने की सूचना के बाद बिहार शेखपुरा के गांव केबलबीघा निवासी सदन राउत करीब 1500 किलोमीटर का सफर तय कर 5-6 सदस्यों के हरियाणा में रेवाड़ी की धरती पर पड़े। दोपहर करीब दो बजे का वक्त होगा। एक टैक्सी बावल में GLS केमिकल कंपनी के सामने सड़क पर आकर रूकी। गाड़ी से दो महिलाओं सहित पांच लोग उतरे और पहले से अपने दोस्तों और भाई के साथ वहां मौजूद जितेंद्र कुमार गाड़ी की तरफ दौड़े। गाड़ी से उतरे परिवार के सदस्यों के साथ तेजी से कंपनी के गेट की तरफ बढ़े। पहले से गेट पर मौजूद पुलिस और सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। जिससे आक्रोशित जितेंद्र और उनके छोटे भाई सुरक्षा घेरा तोड़ गेट के पास पहुंचे और जमीन पर बैठकर चिल्लाने लगे। हमें हमारा भाई चाहिए, जिंदा या मुर्दा। और कितना इंतजार करें, तीन दिन से यही तो कर रहे हैं। पुलिस ने उठाने का प्रयास किया तो जमीन पर लेट गए। धर्मेंद्र की भाभी भी जमीन पर बैठकर जोर से चिल्लाती रही। महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें पकड़ा और गेट से दूर ले गई। करीब 10 मिनट तक कंपनी गेट के सामने हंगामा चलता रहा। एसएचओ- डीएसपी ने स्थिति संभाली हंगामें की सूचना पर पहले एसएचओ फूल कुमार और डीएसपी सुरेंद्र श्योराण बाहर आए। तब तक पुलिस परिवार को गेट के सामने से हटा चुकी थी, परंतु परिवार के सदस्य चिल्ला-चिल्लाकर और कितना मालिक को बुलाओ, ठेकेदार को बुलाओ, कोई हमें कुछ बता क्यों नहीं रहा, और कितना इंतजार करें, तीन दिन से यही तो कर रहे हैं, कंपनी प्रबंधन और प्रशासन से सवाल पूछ रहे थे।
परिवार से बातचीत के लिए डीएसपी आगे आए। छोटे भाई की तरफ इशारा कर बोले, सुबह इन्हें सबकुछ बता दिया था, कंपनी के अंदर भी लेकर गए थे। आपका दर्द हम भी समझते हैं और काम कर रहे हैं। समय कितना लगेगा यह नहीं कह सकते। पहले पिता, फिर भाभी गई पहले लापता 26 वर्षीय धर्मेंद्र के पिता सदन राउत और फिर भाभी और साथ आई महिला को कंपनी के अंदर लेकर गए। जिससे अंदर काम करने की मुश्किले खुद अपनी आंखों से देख सकें। कंपनी के अंदर से बाहर आने के बाद पिता सदन राउत ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि कंपनी के अंदर की भयावता देखने के बाद मुझे अब बेटे की मिट्‌टी मिलने की भी उम्मीद नहीं दिखती। हालांकि वह अब तक की गई कंपनी प्रबंधन और प्रशासन की कार्रवाई से भी खफा दिखाई दिए।
बुधवार देर शाम एनडीआरएफ की टीम वापस लौटने के बाद दैनिक भास्कर की टीम सुबह करीब 11 बजे बावल के सेक्टर-5 स्थित कंपनी के सामने पहुंचें। जहां करीब पांच घंटे टीम से बाहर इंतजार करवाया गया। पांच घंटे बाद गेट से चंद कदम दूर तक अंदर जाने की अनुमति मिली। वहां मौजूद अधिकारियों ने सुरक्षा का हवाला देते हुए कंपनी के अंदर जाने से मना कर दिया।
सुबह पहुंचे सत्येंद्र के परिजन सुबह जब दैनिक भास्कर की टीम GLS केमिकल इंक कंपनी के गेट पर पहुंची तो वहां आगजनी के बाद से लापता सत्येंद्र पासवान की पत्नी सोना देवी, बेटे, नंनद, दामाद और रिश्तेदारों के साथ कंपनी के सामने मौजूद थी। बताया गया कि परिवार कंपनी के सामने धरना देना चाहता था, परंतु पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
जिसके बाद ठेकेदार के कर्मी उन्हें अपनी गाड़ी में बैठाकर वहां से दूर किसी अज्ञात स्थान पर ले गए। दोपहर को हंगामें के बाद धर्मेंद्र के परिवार के साथ भी ऐसा ही हुआ। उनके साथ धर्मेंद्र की तलाश में आए गांव के दो युवक साढ़े चार बजे तक कंपनी के सामने उनका इंतजार करने के बाद अपने ठिकानों पर चले गए। यह भी जानिए बावल के सेक्टर-5 स्थित GLS केमिकल कंपनी में 19 मई की सुबह लगी आग से झुलसे 6 कर्मचारियों में से यूपी के रूखाला अलीगढ़ निवासी 35 वर्षीय हरिबाबू की उपचार के दौरान मौत हो चुकी है। चार अन्य का अलग-अलग अस्पतालों में उपचार चल रहा है। जिनमें एक की हालत अब भी गंभीर बताई जा रही है और दो कर्मचारी अभी लापता हैं। कई घंटे बाद पहुंची DCP केमिकल में लगी आग को बुझाने के लिए ड्राई केमिकल पाउडर (DCP) की जरूरत पड़ती है। फायरबिग्रेड के पास इसकी सीमित मात्रा होती है। मंगलवार सुबह करीब सवा 11 बजे कंपनी में आग लगी। फायरबिग्रेड की गाड़ी मौके पर पहुंच गई, परंतु कंपनी प्रबंधन को आग पर काबू पाने के लिए पर्याप्त मात्रा में ड्राई केमिकल पाउडर (DCP) की व्यवस्था करने के लिए तीन से चार घंटे का समय लग गया। जिससे फायरबिग्रेड तेजी से हो रहे आग के फैलाव को तत्काल रोकने में सफल नहीं हो पाई। कटघरे में सेफ्टी सिस्टम आगजनी का शिकार हुई GLS कंपनी में ऑनलाइन फायरसिस्टम से जुड़ी हुई है। कंपनी के अंदर भी चारों तरफ पाइप लाइन लगी हुई हैं। इसके बावजूद कंपनी में भड़की आग ने फायर सेफ्टी सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह केवल GLS कंपनी में ही देखने को नहीं मिला, आगजनी का शिकार होने वाली अधिकतर साइट पर ऐसा ही देखने को मिलता है। जिससे इस पूरी प्रक्रिया से जुडे विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। 60 डिग्री टेंपरेचर पिक प्वाइंट कंपनी की एक यूनिट में एक समय में 16 टन मॉल तैयार होता है और कंपनी में ऐसी 20 से 22 यूनिट बनी हुई हैं। इंक बनाने के प्रोसेस में प्रयोग होने वाला केमिकल तापमान 60 डिग्री डेंपरेचर होते ही स्वयं ही आग पकड़ लेता है। मंगलवार को कंपनी के ब्लायर में नीचे लीकेज हो रही थी। जिसे रोकने के लिए वहां काम करने वाले कर्मियों ने लीकेज रोकने के लिए चोट मारी थी। आशंका है कि इसी से अचानक केमिकल ने पकड़ ली। नीचे केमिकल होने के कारण आग तेजी से फैली और बुझने से पहले अपनी चपेट में आई हर चीज का पिंघला दिया। ऐसे में यदि कोई इंसान अंदर रह गया तो अब कुछ मिलने वाला नहीं। कंपनी में लगे लोहे के पिंघलने से बने मलबे का हटाना इतना आसान नहीं है। एक तो अंदर का टेंपरेचर अब भी हाई बना हुआ है। बचाव टीमें फायर सूट पहनकर अंदर जा रही हैं। ऐसे में मलबे को हटाने के लिए कटर से काटते समय निकलने वाली चिंगारी फिर से आग भड़कने का कारण बन सकती हैं। फोटो से समझे आग लगने के बाद की स्थिति
जेसीबी से हटा रहे मलबा टीमें जेसीबी से तोड़कर धीरे-धीरे मलबे को हटाने का प्रयास कर रही हैं। केमिकल के ड्रेमों के लेबल भी जल चुके हैं। जिससे केमिकल की पहचान करना मुश्किल हैं। ऐसे में छेड़छाड़ करने पर केमिकल से भी आग भड़कने का खतरा बना रहता है। कंपनी के एक कर्मचारी ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर ऑफ माइक दैनिक भास्कर को आग लगने से अब तक स्थिति पर यह खुलासा किया। यह भी जानिए बावल की GLS केमिकल कंपनी में 19 मई की सुबह लगी आग में मेटीनेंस यूनिट में काम करने वाले 6 कर्मचारी झुलस गए थे। जिनमें से हरिबाबू की मौत हो चुकी है। झुलसे पांच अन्य प्रवेश, विक्रम, अमित और प्रदीप में से एक की हालात अभी भी क्रिटिकल बताई जा रही है। बिहार के शेखपुरा के गांव केबलबीघा निवासी 26 वर्षीय धर्मेंद्र 26 और बिहार नालंदा के सिन्तु निवासी 45 वर्षीय सत्येंद्र पासवान अभी भी लापता हैं।